जयन्ती पर याद किए गए पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर

भारत रत्न दिये जाने पर प्रसन्नता

बस्ती: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा द्वारा बुधवार को ब्लाक रोड स्थित संगठन कार्यालय पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को उनके 100 वीं जयन्ती पर याद किया गया। सामाजिक कार्यकर्ता मुख्य अतिथि रामतौल शर्मा ने कर्पूरी ठाकुर को नमन् करते हुये कहा कि कर्पूरी ठाकुर बिहार के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे। उन्होंने अपने दो के कार्यकाल में जिस तरह की छाप बिहार के समाज पर छोड़ी है, वैसा दूसरा उदाहरण नहीं दिखता है। लम्बे समय से उन्हें भारत रत्न दिये जाने की मांग चल रही थी।

केन्द्र सरकार ने कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की मांग पूरा कर दिया जो स्वागत योग्य कदम है। कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने 1967 में पहली बार उपमुख्यमंत्री बनने पर अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म किया, इसके चलते उनकी आलोचना भी खूब हुई, लेकिन उन्होंने शिक्षा को आम लोगों तक पहुंचाया। उनका योगदान सदैव याद किया जायेगा। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला अध्यक्ष ठाकुर प्रेमनन्दबंशी ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर 1952 की पहली विधानसभा चुनाव जीतने के बाद वे बिहार विधानसभा का चुनाव कभी नहीं हारे। बिहार के दो बार मुख्यमंत्री और दूसरे उप मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की सादगी की खूब चर्चा होती है। उनकी सादगी के चर्चे पूरे देश में मशहूर थे। आजादी के बाद एक बार भी विधायक, विधान पार्षद बनकर लोग करोड़ों के मालिक हो जाते हैं। शहरों में उनके आवास बन जाते हैं। लेकिन, कर्पूरी ठाकुर उन तमाम लोगों से अलग थे। जीवन पर्यंत राजनीति के उच्च मापदंड को बनाकर रखा। जिसमें, ईमानदारी और जनता के प्रति जवाबदेही को स्वीकार किया। ऐसे व्यक्तित्व से नई पीढी को प्रेरणा लेनी चाहिये।