अब तक की सबसे मजबूत दोस्ती’, ईरान से जंग के बीच अमेरिका ने भारत के साथ रिश्तों की तारीफ की

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच मजबूत रिश्तों को दोहराते हुए, भारत में अमेरिकी दूतावास ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हवाले से कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुए हैं. एक्स पर एक पोस्ट में, अमेरिकी कॉन्सुलेट ने ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फोटो शेयर की.

उन्होंने ट्रंप का एक पुराना कोट शेयर करते हुए इमेज के साथ कैप्शन लिखा है. जिसमें ट्रंप ने कहा कि, उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि आज की घोषणाओं के साथ, अमेरिका और भारत के बीच दोस्ती सबसे मजबूत है. उन्हें लगता है कि, दोनों देशों के बीच यह अब तक की सबसे मजबूत दोस्ती है.

ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि हमारा रिश्ता दोनों देशों के दो नेताओं के बीच अब तक का सबसे अच्छा रिश्ता है, और यह कहना मेरे लिए सम्मान की बात है.”यह संदेश ऐसे समय में साझा किए गए हैं जब अमेरिका ईरान के बीच पिछले एक महीने से ज्यादा समय से जंग जारी है.

एक तरफ अमेरिका दुनिया भर के साथियों से मदद मांग रहा है, वहीं भारत के भी ईरान के साथ रिश्ते हैं. शुक्रवार की पोस्ट में ट्रंप के हवाले से कहा गया कि उन्होंने भारत के साथ मजबूत रिश्ते बनाने की बात कही है, और कहा कि “यह कुछ ऐसा है जो ज़्यादातर लोगों के लिए नहीं कहा जा सकता.”

अमेरिका एवं भारत के संबंधों को अत्यधिक महत्व देते हैं ट्रंप: भारत में अमेरिका के राजदूत
दूसरी तरफ, भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका एवं भारत के संबंधों को अत्यधिक महत्व देते हैं. गोर ने अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात के बाद मंगलवार शाम सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “कुछ दिनों के लिए अमेरिका लौटा हूं। पहला पड़ाव-राष्ट्रपति से ‘व्हाइट हाउस’ में मुलाकात. राष्ट्रपति अमेरिका और भारत के संबंधों को अत्यधिक महत्व देते हैं.”

गोर ने ‘ओवल ऑफिस’ (राष्ट्रपति का कार्यालय) में ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ अपनी एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर साझा की. गोर ने इस साल जनवरी में भारत में अमेरिका के राजदूत का पदभार संभाला था. इससे पहले वह व्हाइट हाउस के राष्ट्रपति कार्मिक कार्यालय में निदेशक के रूप में कार्यरत थे. गोर दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए अमेरिका के विशेष दूत भी हैं.

ईरान युद्ध पर ट्रंप के बार-बार बदलते रुख से अमेरिकी असमंजस में
ईरान युद्ध में नाटो सहयोगियों से मदद मांगने, नाटो सहयोगियों की जरूरत नहीं होने की घोषणा करने, तेहरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की धमकी देने और फिर ऐसे हमलों को लगभग रातोंरात स्थगित करने के अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बदलते रुख से अमेरिकी असमंजस में हैं.

ईरान युद्ध पर लगातार बदलते रुख को लेकर ट्रंप को सोशल मीडिया पर भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. कुछ लोग उनका मजाक उड़ाते हुए “ट्रंप ऑलवेज चिकन्स आउट (टैको)” यानी “ट्रंप दबाव के चलते अपने फैसले वापस ले लेते हैं या टाल देते हैं” हैशटैग के तहत पोस्ट कर रहे हैं. ट्रंप ने मार्च की शुरुआत में संवाददाताओं के साथ बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में यूरोपीय देशों के साथ-साथ पश्चिम एशिया से तेल एवं गैस की आपूर्ति पर निर्भर अन्य देशों से मदद मांगी थी.

होर्मुज, ईरान के नियंत्रण वाला एक संकरा जलमार्ग है, जिसका इस्तेमाल वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की लगभग 20 फीसदी आपूर्ति के परिवहन के लिए किया जाता है. ट्रंप ने कहा था, “अगर हमें उनकी ‘माइन बोट’ की जरूरत हो या किसी भी चीज की, उनके पास मौजूद किसी भी उपकरण की, तो उन्हें हमारी मदद के लिए तुरंत आगे आना चाहिए. हम चाहते हैं कि वे आएं और जलडमरूमध्य में हमारी मदद करें.”

उन्होंने हालांकि साथ ही यह भी कहा था, “मेरा मानना ​​है कि हमें किसी की जरूरत नहीं है. हम दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र हैं. हमारे पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है. हमें उनकी जरूरत नहीं है.” होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने में मदद की ट्रंप की अपील को यूरोपीय देशों, चीन, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों से बेहद ठंडी प्रतिक्रिया मिली.