ई-बसों की खरीद में मेड इन यूपी को दें प्राथमिकता, सीएम योगी ने परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ई-बसों की खरीद में भी अब ‘मेड इन यूपी’ को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि परिवहन निगम आगे से यूपी में निर्मित बसें ही खरीदे. परिवहन विभाग और उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि बस स्टेशनों के निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए. यात्रियों की सुविधा का सबसे पहले ख्याल रखा जाए सड़क सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए.

पीपीपी मॉडर पर विकसित हो रहे 23 बस स्टेशन

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री को जानकारी दी गई कि रोडवेज 23 बस स्टेशनों को पीपीपी मॉडल पर विश्वस्तरीय टर्मिनल के रूप में विकसित कर रही है. दूसरे चरण में 54 अतिरिक्त बस स्टेशनों का विकास प्रस्तावित है, जबकि 50 बस स्टेशनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है. यूपीएसआरटीसी आठ शहरों में इलेक्ट्रिक डिपो भी स्थापित कर रहा है, जहां 240 किलोवाट क्षमता के चार से आठ यूनिवर्सल चार्जर लगाए जाएंगे.

ई-वाहनों को प्रोत्साहित करने कि लिए 942 करोड़ की दी गई छूट

मुख्यमंत्री ने यात्रियों की जरूर को ध्यान में रखते हुए नए रूट चिन्हित करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के निर्देश दिए. परिवहन विभाग की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 37.9 लाख नए वाहन पंजीकृत हुए, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में जून तक ही 11 लाख से अधिक वाहनों का पंजीकरण हो चुका है. इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए कर और शुल्क में 942 करोड़ रुपये से अधिक की छूट दी गई है.

यूपी को स्मार्ट इंडस्ट्रियल हब बनाने की दिशा में बड़ी पहल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन “सशक्त और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” को साकार करने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है. उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) और सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) ने सतत (सस्टेनेबल) और स्मार्ट औद्योगिक अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए. इस करार से यूपी न केवल पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा, बल्कि नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को भी हासिल करने की ओर अग्रसर होगा. इस एमओयू पर यूपीसीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) मयूर महेश्वरी और सीईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) चेतन प्रकाश जैन ने हस्ताक्षर किए.

ग्रामीण विकास को तेज करने पर जोर

प्रदेश के ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने और ग्रामीण विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए पंचायती राज निदेशालय, लखनऊ में शुक्रवार को एक अहम समीक्षा बैठक हुई. बैठक में राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के तहत संचालित योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा की गई. जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे गांवों तक पहुंचे. बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय के अपर सचिव सुशील कुमार लोहानी ने की. इस दौरान पंचायती राज निदेशक अमित कुमार सिंह सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.

वित्तीय ऑडिट की तरह होगा डेटा ऑडिट

वहीं उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है. इसी कड़ी में प्रदेश में फॉरेंसिक साइंस को बढ़ावा देते हुए 13 साइबर कैबिनेट और सभी 75 जिलों में मोबाइल फॉरेंसिक वैन की सौगात दी गई है. यह जानकारी नोएडा में आयोजित एक कार्यशाला में उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने दी. कार्यशाला में प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट पर भी चर्चा हुई. विशेषज्ञों ने बताया कि आने वाले समय में डेटा चोरी पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लग सकता है. डॉ. गोस्वामी ने कहा कि जिस तरह वित्तीय ऑडिट होता है, उसी तरह अब डेटा ऑडिट भी अनिवार्य होगा. उन्होंने डेटा को धन से भी अधिक मूल्यवान बताते हुए सोशल मीडिया पर सावधानी बरतने की सलाह दी. उन्होंने डेटा इंश्योरेंस को भविष्य की बड़ी चुनौती बताया, जो जल्द ही आम लोगों तक पहुंचेगा.