श्रीनगर: जम्मू कश्मीर में आई विनाशकारी बाढ़ के लगभग एक महीने बाद भी हजारों बाढ़ प्रभावित परिवार और किसान सरकारी राहत का इंतजार कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल्द ही केंद्र शासित प्रदेश का दौरा करने की उम्मीद है, जबकि प्रशासन ने अभी तक नुकसान के आकलन की रिपोर्ट को अंतिम रूप नहीं दिया है.
अगस्त और सितंबर में आई बाढ़ ने कृषि भूमि के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया, घरों को नष्ट कर दिया और जम्मू क्षेत्र और कश्मीर घाटी में पुलों और सड़कों सहित प्रमुख बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया. इस महीने की शुरुआत में किए गए प्रारंभिक आकलन के बावजूद, अंतिम नुकसान रिपोर्ट केंद्र सरकार को नहीं सौंपी गई है.जम्मू के संभागीय आयुक्त रमेश कुमार ने ईटीवी भारत को बताया कि प्रशासन ने अभी तक प्रांत में हुए नुकसान का अंतिम आकलन नहीं किया है. कश्मीर के संभागीय आयुक्त अंशुल गर्ग ने कहा कि संबंधित अधिकारियों द्वारा आकलन किया जा रहा है. गर्ग ने ईटीवी भारत को बताया कि, मुख्य सचिव ने सभी विभागों को गुरुवार तक आकलन पूरा करने के निर्देश दिए हैं. आकलन पूरा होने के बाद, रिपोर्ट भारत सरकार को भेज दी जाएगी.
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की. उन्होंने अधिकारियों को नुकसान का आकलन शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया ताकि एक व्यापक बाढ़ पैकेज के लिए भारत सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके.उमर ने शनिवार को कहा कि बाढ़ ने 330 पुलों, लगभग 1,500 किलोमीटर सड़कों, सरकारी भवनों, फसलों और फलों को क्षतिग्रस्त कर दिया है या बहा दिया है. उन्होंने पीएम मोदी के संभावित दौरे को लेकर कहा कि, वे जब आएंगे तो उनकी सरकार एक व्यापक राहत पैकेज की मांग उनके समक्ष रखेगी ताकि जम्मू-कश्मीर के लोगों को आवश्यक राहत मिल सके. उन्होंने राजमार्ग बंद होने से प्रभावित सेब उत्पादकों को मुआवजा देने का भी आश्वासन दिया.
वहीं, डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री जम्मू-कश्मीर के लिए 2014 के पैकेज से दोगुना पैकेज की घोषणा करेंगे. चौधरी ने कहा कि, जम्मू में दुकानदार से लेकर व्यापारी तक, सभी को नुकसान हुआ है. कश्मीर में किसान और सेब उत्पादक समान रूप से प्रभावित हैं.
2014 में, प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर की यात्रा के बाद 80 हजार करोड़ रुपये के राहत और पुनर्निर्माण पैकेज की घोषणा की थी, जो उस समय विनाशकारी बाढ़ से तबाह हो गया था.पिछले हफ्ते जम्मू के प्रभावित इलाकों का दौरा करने वाले केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 5,000 से ज़्यादा घर क्षतिग्रस्त हुए हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी. उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा ज्ञापन सौंपे जाने के बाद, केंद्र सरकार राहत प्रदान करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी.”
चौहान ने यह भी घोषणा की कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत 1.3 लाख रुपये की सहायता मिलेगी, साथ ही एक अलग शौचालय के लिए भी धनराशि दी जाएगी. ग्रामीण विकास विभाग द्वारा अत्यधिक गरीबी में रहने वाले लोगों को 1.3 लाख रुपये की यह सहायता प्रदान की जाती है.
विपक्षी नेताओं ने भी बाढ़ राहत और प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए दबाव बढ़ा दिया है. भाजपा महासचिव और विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मिलकर वित्तीय सहायता बढ़ाने की मांग की. शर्मा ने कहा, “मैंने उपराज्यपाल से अनुरोध किया है कि प्रभावित परिवारों के लिए सहायता राशि में पर्याप्त वृद्धि की जाए, ताकि लोग सम्मान के साथ अपना जीवन फिर से शुरू कर सकें.”
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और जम्मू-कश्मीर के प्रभारी डॉ. सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जम्मू-कश्मीर के लोगों तक पर्याप्त राहत पहुंचाने के लिए भारत सरकार के समक्ष यह मुद्दा उठाएगी.
पीडीपी प्रवक्ता जुहैब मीर ने कहा कि सरकार को अब तक लोगों को राहत राशि दे देनी चाहिए थी. मीर ने सवाल किया कि, सरकार नुकसान के आकलन में देरी क्यों कर रही है और अधिकारियों के अंतिम आकलन का इंतजार क्यों कर रही है. अंतिम आकलन से पहले, सरकार को लोगों और किसानों को शुरुआती राहत प्रदान करनी चाहिए थी.