अलीगढ़: नगर निगम ने अलीगढ़ शहर को ‘जीरो वेस्ट सिटी’ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. मथुरा बाईपास स्थित कचरा प्रोसेसिंग प्लांट पर वर्षों से जमा लिगेसी वेस्ट (पुराना कचरा) के निस्तारण कार्य ने अब रफ्तार पकड़ ली है. करीब 10 लाख मीट्रिक टन कचरे के विशाल ढेर में से पिछले 3–4 महीनों में रिकॉर्ड 3 लाख मीट्रिक टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा चुका है, जो शहर के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.
नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान में लगातार मॉनिटरिंग और समीक्षा के चलते काम में तेजी आई है. लक्ष्य है कि सितंबर 2026 तक मथुरा बाईपास पर जमा पूरे कचरे के पहाड़ को खत्म कर दिया जाए. इससे शहर को लंबे समय से चली आ रही गंदगी और प्रदूषण की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है.
रविवार को नगर आयुक्त ने प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी और संबंधित एजेंसी के अधिकारियों के साथ प्लांट का निरीक्षण किया. उन्होंने अब तक की प्रगति पर संतोष जताते हुए शेष कार्य को और गति देने के निर्देश दिए. साथ ही उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि अप्रैल के पहले सप्ताह में 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाला नया फ्रेश कचरा निस्तारण प्लांट पूरी तरह चालू कर दिया जाए.
नगर निगम की सफाई व्यवस्था में भी पिछले छह महीनों में बड़ा सुधार देखने को मिला है. पहले जहां शहर से रोजाना 400 से 450 मीट्रिक टन कचरा एकत्र होता था, अब यह बढ़कर करीब 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन हो गया है. यह वृद्धि बेहतर डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और जागरूकता अभियान का परिणाम मानी जा रही है.
सिर्फ कचरा संग्रहण ही नहीं, बल्कि यूजर चार्ज (शुल्क) वसूली में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पिछले चार महीनों में यह राशि 48 लाख रुपये प्रति माह से बढ़कर 86 लाख रुपये प्रति माह तक पहुंच गई है, जिससे नगर निगम की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है और सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाने में मदद मिल रही है.
नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा कि शहर को स्वच्छ और कचरा मुक्त बनाने के लिए नगर निगम की टीम दिन-रात काम कर रही है. रिकॉर्ड समय में 3 लाख मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण इसी का परिणाम है. उन्होंने भरोसा जताया कि तय समय सीमा के भीतर पूरा लिगेसी वेस्ट खत्म कर दिया जाएगा और नया प्लांट शुरू होने से रोजाना निकलने वाले ताजा कचरे का भी वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण संभव होगा.
नगर आयुक्त ने कहा, कचरे के निस्तारण के बाद निकलने वाली सामग्री का भी उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है. RDF (Refuse Derived Fuel) का इस्तेमाल वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट, सीमेंट उद्योग और पेपर मिलों में किया जाएगा, जिससे कचरे का पुनः उपयोग संभव होगा और पर्यावरण पर भार कम पड़ेगा.
महापौर प्रशांत सिंघल ने कहा कि सरकार के मार्गदर्शन में अलीगढ़ तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है. स्वच्छता अभियान और आधुनिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था शहर को नई पहचान दिलाएगी और विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगी. कुल मिलाकर, अलीगढ़ अब कचरे के ढेर से बाहर निकलकर स्वच्छ और आधुनिक शहर बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहा है, जिसकी झलक आने वाले महीनों में और साफ दिखाई देगी.