त्रेतायुग से चली आ रही गोरखनाथ मंदिर की खिचड़ी परंपरा, सीएम योगी के कार्यकाल में बदला स्वरूप

गोरखपुर: 15 जनवरी को मकर संक्रांति है. इस अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में लगने वाले विश्व प्रसिद्ध खिचड़ी मेला में आस्थावानों की श्रद्धा और उल्लास का अभिनंदन के लिए गोरखनाथ मंदिर के रास्ते को पूरी दुल्हन की तरह सजाया गया है. आधुनिक तकनीकी व्यवस्था से सुरक्षा के भी कड़े प्रबंध किए गए हैं. खिचड़ी मेला में श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए विशेष इंतजाम सुनिश्चित किए गए हैं.

यूपी रोडवेज स्पेशल बसें चलाएगा: आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए यूपी रोडवेज स्पेशल बसें चलाएगा. वहीं पूर्वोत्तर रेलवे की तरफ से स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था की गई है. इनका ठहराव नकहा जंगल रेलवे स्टेशन पर भी होगा.श्रद्धालुओं के लिए 18 रैन बसेरे: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नगर निगम भी मुस्तैद है. नगर निगम की तरफ से संचालित डेढ़ दर्जन रैन बसेरों में श्रद्धालुओं को ठौर देने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं. खिचड़ी मेला में श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद चार बार व्यवस्थागत तैयारियों की समीक्षा कर चुके हैं.

रोडवेज 13 रूट्स पर 450 खिचड़ी मेला बसें चलाएगा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर परिवहन निगम ने खिचड़ी मेला स्पेशल बसों को चलाने की रूपरेखा तय कर ली है. यूपी रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक लव कुमार सिंह ने बताया कि रोडवेज 13 रूटों से 450 खिचड़ी मेला बसें चलाएगा. बसों का संचलन 13 जनवरी की सुबह 4 बजे से शुरू हो जाएगा. स्पेशल बसों की सेवा 16 जनवरी तक मिलेगी. रोडवेज सोनौली-फरेंदा-गोरखपुर रूट पर 40, ठूठीबारी-महराजगंज-गोरखपुर रूट पर 40 बसें चलायी जाएंगी.15 मिनट से लेकर एक घंटे के अंतराल पर मिलेंगी बसें: इनके अलावा बढ़नी-सिद्धार्थनगर-गोरखपुर रूट पर 20, बलरामपुर-गोंडा-गोरखपुर रूट पर 12, बांसी-मेंहदावल-गोरखपुर रूट पर 20, लार-देवरिया-गोरखपुर रूट पर 55, तमकुही रोड-कसया-गोरखपुर रूट पर 55, गोला-सिकरीगंज-गोरखपुर रूट पर 20, पडरौना-कसया-गोरखपुर रूट पर 50, दोहरीघाट-कौड़ीराम-गोरखपुर रूट पर 50, अयोध्या-खलीलाबाद-गोरखपुर रूट पर 60, रुद्रपुर-गौरी बाजार-गोरखपुर रूट पर 20 और कप्तानगंज-पिपराइच-गोरखपुर रूट पर 8 खिचड़ी मेला बसों का संचालन करेगा. अलग-अलग रूटों पर ये बसें 15 मिनट से लेकर एक घंटे के अंतराल पर उपलब्ध होंगी.
24 घंटे एक्टिव रहेगा कंट्रोल रूम: यूपी रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक के अनुसार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए खिचड़ी मेला में गोरखनाथ मंदिर परिसर में 13 जनवरी से 16 जनवरी तक 24 घंटे क्रियाशील रहने वाला कंट्रोल रूम संचालित किया जाएगा. कंट्रोल रूम का नंबर 2786005161 और 9415669805 है. इसी अवधि में रेलवे स्टेशन के पास स्थित रोडवेज बस स्टेशन पर भी कंट्रोल रूम स्थापित होगा जो तीन पालियों में काम करेगा. इसका नंबर 9451063836 है.

25 इलेक्ट्रिक बसें भी चलायी जाएंगी: इसके अलावा यात्रियों की सुविधा के लिए गोरखपुर सिटी ट्रांसपोर्ट की 25 इलेक्ट्रिक बसें भी संचालित रहेंगी. पूर्वोत्तर रेलवे ने खिचड़ी मेला स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला लिया है. पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि खिचड़ी मेला में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्पेशल ट्रेनें अलग अलग तिथियों में चलाई जाएंगी. ट्रेन संख्या 05016/05015 नौतनवा-गोरखपुर-नौतनवा अनारक्षित मेला विशेष गाड़ी का संचलन नौतनवा से 13 से 22 जनवरी तक तथा गोरखपुर से 14 से 23 जनवरी तक 10 फेरों के लिए किया जायेगा.

पूर्वोत्तर रेलवे की खिचड़ी मेला स्पेशल ट्रेनें: इस ट्रेन की सुविधा नौतनवा,बरवाकलां हाल्ट, नईकोट, भागीरथपुर, लक्ष्मीपुर, झामट, पुरन्दरपुर, लोक विद्यापीठ नगर, आनन्दनगर, लोहरपुरवा, कैम्पियरगंज, रामचौरा हाल्ट, महावनखोर हाल्ट, पीपीगंज, कौडिया जंगल तथा मानीराम से मिल सकेगी. इसके अलावा खिचड़ी मेला में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 15069 गोरखपुर-ऐशबाग एक्सप्रेस का 13 से 16 जनवरी तक, 15067 गोरखपुर-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस का 14 जनवरी को नकहा जंगल स्टेशन पर अतिरिक्त ठहराव दिया जाएगा.

एक मिनट का अतिरिक्त अस्थाई ठहराव: इसके अलावा 15065 गोरखपुर-पनवेल एक्सप्रेस का 13, 15 एवं 16 जनवरी को, 15706 दिल्ली-कटिहार एक्सप्रेस का 14 जनवरी को, 15010 इज्जतनगर-गोरखपुर एक्सप्रेस का 13 से 16 जनवरी तक, 12572 आनन्द विहार टर्मिनस-गोरखपुर एक्सप्रेस का 13 एवं 16 जनवरी को, 15105 छपरा-नौतनवा एक्सप्रेस का 13 से 16 जनवरी तक, 18202 नौतनवा-दुर्ग एक्सप्रेस का 16 जनवरी को, 15106 नौतनवा-छपरा एक्सप्रेस का 13 से 16 जनवरी तक अतिरिक्त ठहराव दिया जाएगा.वहीं 15009 गोरखपुर-इज्जतनगर एक्सप्रेस का 13 से 16 जनवरी तक, 12571 गोरखपुर-आनन्द विहार टर्मिनस एक्सप्रेस 14 एवं 16 जनवरी को, 18201 दुर्ग-नौतनवा एक्सप्रेस का 15 जनवरी को, 18205 दुर्ग-नौतनवा एक्सप्रेस का 16 जनवरी को, 15705 कटिहार-दिल्ली एक्सप्रेस का 15 जनवरी को, 11079 लोकमान्य तिलक टर्मिनस-गोरखपुर एक्सप्रेस का 16 जनवरी को, 15066 पनवेल-गोरखपुर एक्सप्रेस का 13 से 15 जनवरी तक, 15070 ऐशबाग-गोरखपुर एक्सप्रेस का 13 से 16 जनवरी तक नकहा जंगल स्टेशन पर एक मिनट का अतिरिक्त अस्थाई ठहराव प्रदान किया जायेगा.

735 लोगों के ठहरने की क्षमता: नगर निगम की तरफ से की गई व्यवस्थाओं के संबंध में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने बताया कि श्रद्धालु महानगर के अलग अलग स्थानों पर क्रियाशील 16 रैन बसेरों में ठहर सकते हैं. कुल 735 लोगों की क्षमता वाले इन रैन बसेरों में सभी आवश्यक प्रबंध हैं. उन्होंने बताया कि कचहरी बस स्टेशन के पास, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, टीपीनगर, धर्मशाला बाजार, रेलवे स्टेशन के पास, मोहरीपुर, आवास विकास कॉलोनी शाहपुर, हांसुपुर, शिवपुर सहबाजगंज, बशारतपुर, झूलेलाल मंदिर के पास के स्थायी रैन बसेरों के अलावा राप्तीनगर और बरगदवा में अस्थायी रैन बसेरे बनाए गए हैं.

खिचड़ी चढ़ाकर मन्नत मांगते हैं श्रद्धालु: मकर संक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर में लगने और इससे पखवारा पूर्व शुरू होकर, माहभर से अधिक समय तक चलने वाला खिचड़ी मेला श्रद्धा, मनोरंजन और रोजगार का संगम होता है. सूर्यदेव के उत्तरायण होने पर महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की त्रेतायुग से चली आ रही यह अनूठी परंपरा पूरी तरह लोक को समर्पित है. गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी के रूप में चढ़ाए जाने वाला अन्न वर्षभर जरूरतमंदों में वितरित किया जाता है. मंदिर के अन्न क्षेत्र में कभी भी कोई जरूरतमंद पहुंचा, खाली हाथ नहीं लौटा. ठीक वैसे ही, जैसे बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाकर मन्नत मांगने वाला कभी निराश नहीं होता.

खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा त्रेतायुगीन: गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ कहते हैं कि मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा त्रेतायुगीन मानी जाती है. मान्यता है कि उस समय आदियोगी गुरु गोरखनाथ एक बार हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित मां ज्वाला देवी के दरबार मे पहुंचे. मां ने उनके भोजन का प्रबंध किया. कई प्रकार के व्यंजन देख बाबा ने कहा कि वह तो योगी हैं और भिक्षा में प्राप्त चीजों को ही भोजन रूप में ग्रहण करते हैं. उन्होंने मां ज्वाला देवी से पानी गर्म करने का अनुरोध किया और स्वयं भिक्षाटन को निकल गए.

हर मकर संक्रांति पर खिचड़ी का भोग: भिक्षा मांगते हुए वह गोरखपुर आ पहुंचे और राप्ती और रोहिन के तट पर जंगलों में बसे इस स्थान पर धूनी रमाकर साधनालीन हो गए. उनका तेज देख तभी से लोग उनके खप्पर में अन्न (चावल, दाल) दान करते रहे. इस दौरान मकर संक्रांति का पर्व आने पर यह परंपरा खिचड़ी पर्व के रूप में परिवर्तित हो गई. तब से बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने का क्रम हर मकर संक्रांति पर जारी है. कहा जाता है कि उधर ज्वाला देवी के दरबार मे बाबा की खिचड़ी पकाने के लिए आज भी पानी उबल रहा है.

पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ खिचड़ी अर्पित करेंगे: मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नाथ पंथ की विशिष्ट परंपरानुसार शिवावतारी गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी चढ़ाकर समूचे जनमानस की सुख समृद्धि की मंगलकामना करते हैं. उत्तर प्रदेश, बिहार और देश के विभिन्न भागों के साथ-साथ पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी लाखों की तादाद में श्रद्धालु शिवावतारी बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाते हैं. मकर संक्रांति के दिन भोर में सबसे पहले गोरक्षपीठ की तरफ से पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ खिचड़ी चढ़ाकर बाबा को भोग अर्पित करते हैं.

श्रद्धालुओं के ठहरने और दूसरी सुविधाओं का इंतज़ाम: नेपाल राजपरिवार की ओर से आई खिचड़ी बाबा को चढ़ाई जाती है. इसके बाद मंदिर के कपाट खोल दिए जाते हैं और जनसामान्य की आस्था खिचड़ी के रूप में निवेदित होनी शुरू हो जाती है. खिचड़ी महापर्व को लेकर मंदिर व मेला परिसर सज धजकर तैयार है. प्रशासन के साथ ही मंदिर प्रबंधन की तरफ से श्रद्धालुओं के ठहरने और अन्य सुविधाओं का पूरा इंतज़ाम किया गया है.

सामाजिक समरसता का केंद्र है गोरखनाथ मंदिर: गोरखनाथ मंदिर सामाजिक समरसता का ऐसा केंद्र है जहां जाति, पंथ, महजब की बेड़ियां टूटती नजर आती हैं. इसके परिसर में क्या हिंदू, क्या मुसलमान, सबकी दुकानें हैं. यानी बिना भेदभाव सबकी रोजी रोटी का इंतजाम है. यही नहीं, मंदिर परिसर में लगने वाला खिचड़ी मेला भी जाति-धर्म के बंटवारे से इतर हजारों लोगों की आजीविका का माध्यम बनता है.

व्यापारी पूरे साल करते हैं पर्व का इंतजार: मंदिर परिसर में नियमित रोजगार करने वालों से लेकर मेला में दुकान लगाने वालों तक, बड़ी भागीदारी अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की होती है. उन्होंने कभी कोई भेदभाव महसूस नहीं किया बल्कि अपनेपन के भाव से विभोर होते रहते हैं. मेले में खरीदारी से लेकर मनोरंजन के साधनों तक भरपूर इंतजाम हैं. कानपुर की राजेश तिवारी और बिहार के कई सालों से यहां आ रहे हैं. बहुत आनंद के साथ इस आयोजन में अपने सामान की बिक्री कर घर इस आस से घर लौटते हैं कि अगले साल फिर बाबा गोरखनाथ के खिचड़ी मेला में आना है