लखनऊ: प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा विस्तार का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है. उत्तर प्रदेश ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है. राष्ट्रीय पोर्टल के अनुसार राज्य में अब तक 11,64,038 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 3,93,293 रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन पूरे हो चुके हैं. इसके माध्यम से 3,98,002 परिवार सीधे लाभान्वित हुए हैं. प्रदेश में कुल स्थापित सौर क्षमता 1,343.5 मेगावाट तक पहुंच चुकी है.
3,500 करोड़ सब्सिडी ट्रांसफर: प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश न सिर्फ स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में अग्रणी बन रहा है, बल्कि रोजगार सृजन, आर्थिक गतिविधियों के विस्तार, भूमि संरक्षण और डिजिटल ऊर्जा भविष्य की दिशा में भी एक नए युग का नेतृत्व कर रहा है. इस योजना के अंतर्गत 2,663.57 करोड़ रुपये की केंद्रीय सरकार की सब्सिडी और लगभग 920 करोड़ रुपये की राज्य सरकार की सब्सिडी लाभार्थियों के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से सीधे हस्तांतरित की गई है. उत्तर प्रदेश जुलाई 2025 से लगातार देश में इंस्टॉलेशन के मामले में शीर्ष दो राज्यों में बना हुआ है, जो राज्य की प्रगति और मजबूत क्रियान्वयन क्षमता को दर्शाता है.
रिकॉर्ड 35,804 रूफटॉप सोलर प्लांट इंस्टॉल: यूपीनेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि फरवरी माह 2026 में उत्तर प्रदेश के लिए सौर ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियों का माह साबित हुआ है. इस एक माह के अंदर रिकॉर्ड 35,804 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किए गए, साथ ही 28 फरवरी को एक ही दिन में 2,211 इंस्टॉलेशन कर उत्तर प्रदेश ने पूरे भारत में किसी भी राज्य की तरफ से एक दिन में किए गए सर्वाधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है. यह उपलब्धि राज्य की तीव्र कार्यक्षमता और मिशन मोड में चल रहे क्रियान्वयन का प्रमाण है.
60,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार: इस योजना ने प्रदेश में व्यापक सौर ऊर्जा अर्थव्यवस्था को जन्म दिया है. वर्तमान में 4,500 से अधिक वेंडर्स सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जिससे 60,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है. प्रतिदिन औसतन चार से पांच मेगावाट रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन किए जा रहे हैं, जिससे राज्य में प्रतिदिन लगभग 20 से 25 करोड़ रुपये का व्यवसाय पनप रहा है. रूफटॉप सोलर से प्रतिदिन 60 लाख यूनिट से अधिक मुफ्त बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिसका अनुमानित आर्थिक मूल्य लगभग चार करोड़ रुपए रोजाना है.
5000 एकड़ से अधिक भूमि की बचत: रूफटॉप सोलर मॉडल का एक महत्वपूर्ण लेकिन अप्रत्यक्ष लाभ भूमि संरक्षण के रूप में सामने आया है. इस योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश में 5000 एकड़ से अधिक भूमि की बचत हुई है. अगर यही क्षमता ग्राउंड-माउंटेड सोलर प्लांट्स के माध्यम से स्थापित की जाती, तो विशाल भू-भाग की आवश्यकता होती. अब यह भूमि औद्योगिक, वाणिज्यिक, कृषि तथा अन्य विकासात्मक गतिविधियों के लिए उपलब्ध रह सकती है. तेजी से बढ़ते इंस्टॉलेशन ने सौर उद्योग से जुड़े उपकरणों जैसे मॉड्यूल, इन्वर्टर, स्ट्रक्चर और केबल की मांग को भी बढ़ाया है, जिससे प्रदेश में एक मजबूत सप्लाई चेन विकसित हुई है.
सौर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि से कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आ रही है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उत्तर प्रदेश अब सौर ऊर्जा को भविष्य के डिजिटल ऊर्जा व्यापार मॉडल से जोड़ने की दिशा में भी अग्रसर है.