बदायूँ: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा राज्यसभा जाने की ट्वीट के बाद से बिहार का सियासी पारा सातवे आसमान पर है, विपक्ष बीजेपी पर हमलावर है, तो जदयू नेताओं, कार्यकर्ताओं का पार्टी दफ्तर के सामने धरना प्रदर्शन जारी है.
मुख्यमंत्री बीजेपी का हो सकता है: हालांकि कुछ समय से नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में भागीदारी देखी जा रही है. तमाम मंचों पर उनका चेहरा दिखाया जा रहा है. इससे यह आंदाजा लगाया जा रहा है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है और मुख्यमंत्री बीजेपी का हो सकता है.
नीतीश कुमार चले राज्यसभा: इस संबंध में जदयू के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अनूप पटेल ने कहा कि नीतीश कुमार अगर केंद्र की राजनीति में आते हैं तो इसका फायदा उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओं और पार्टी को मिलेगा. उत्तर प्रदेश में जेडीयू को और मजबूती मिलेगी. अनूप पटेल ने कहा कि हमारे सीनियर नेता का निर्णय देश हित और पार्टी हित में हमेशा सही होता है, हम लोग अपने नेता के निर्णय के साथ हैं.
डिप्टी सीएम जदयू का होगा: उन्होंने कहा कि जो फार्मूला पहले था, पार्टी उसी लाइन पर काम करेगी, इस बार दो डिप्टी सीएम जदयू के होंगे और मुख्यमंत्री का चेहरा बीजेपी का होगा, हम लोगों की बहुत समय से मांग थी कि निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाया जाए, हमें उम्मीद है कि अब वह सक्रिय राजनीति में आएंगे, जहां तक जानकारी है कि डिप्टी सीएम पद के लिए जदयू से तीन नाम चल रहे हैं, जिसमे उनका नाम भी शामिल है.
नीतीश कुमार के केंद्रीय राजनीति में: अनूप पटेल ने कहा कि नीतीश कुमार सीनियर लीडर हैं. उनके अनुभव का पार्टी को और देश को लाभ होगा. बिहार में समर्थकों के प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि 2025 के चुनाव में हम लोगों ने घर-घर जाकर वोट मांगा था और प्रचंड बहुमत से हमारी सरकार बनी थी, तो स्वाभाविक है कि पब्लिक को बुरा लगेगा, कार्यकर्ताओं में पीड़ा रहेगी, नीतीश कुमार के केंद्रीय राजनीति में आने से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा अन्य कई प्रदेशों की राजनीति में हमारी पार्टी को फायदा मिलेगा.
राजनीतिक कैरियर पर संकट: दूसरी तरफ नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले को लेकर जेडीयू नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी है, उन्हें अपने सियासी भविष्य पर खतरा मंडराता नजर आ रहा है, उनको अपने राजनीतिक कैरियर पर संकट दिख रहा है. उन्हें लगता है कि पावर ट्रास्फर होने से जेडीयू की सियासी अहमियत कमजोर होगी और बीजेपी की ताकत बढ़ेगी, जिससे उन्हें हाशिए पर धकेल दिया जाएगा.