‘भारत और जापान की हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति बड़ी जिम्मेदारी है’: जयशंकर

नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को आठवें भारत-जापान हिंद-प्रशांत मंच को संबोधित करते हुए भारत और जापान की साझेदारी पर प्रकाश डाला. जयशंकर ने कहा कि यह साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक स्थिरता को बढ़ाने और वैश्विक आर्थिक विकास में योगदान देगी. जयशंकर ने सोशल मीडिया एक्स पर करीब 3 मिनट का वीडियो भी डाला.

जयशंकर ने कहा, “दो प्रमुख लोकतंत्रों और समुद्री राष्ट्रों के रूप में, भारत और जापान की हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति बड़ी ज़िम्मेदारी है. हिंद-प्रशांत महासागर पहल, जिसमें जापान समुद्री व्यापार, परिवहन और संपर्क स्तंभ का सह-नेतृत्व करता है, हमारे योगदान को आगे बढ़ाने की क्षमता रखती है. हमारी साझेदारी, जो पिछले कुछ दशकों में बहुत गहरी हुई है, पहले से कहीं अधिक मूल्यवान है.”

जयशंकर ने कई प्रमुख पहलों की ओर इशारा किया जो भारत-जापान संबंधों की विकसित होती प्रकृति को प्रदर्शित करती हैं. जिनमें अगली पीढ़ी की गतिशीलता साझेदारी, आर्थिक सुरक्षा पहल, संयुक्त ऋण तंत्र, स्वच्छ हाइड्रोजन और अमोनिया पर संयुक्त घोषणा और खनिज संसाधनों पर समझौता ज्ञापन शामिल हैं.

जयशंकर ने कहा, “हमारे द्विपक्षीय संबंध बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप हैं और यह विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग में परिलक्षित होता है. प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री ताकाइची के बीच पदभार ग्रहण करते ही हुई हालिया बातचीत इस बात का प्रमाण है कि हम दोनों इसे कितनी प्राथमिकता देते हैं. अगस्त में प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा ने अगले दशक के लिए संयुक्त दृष्टिकोण को महत्वपूर्ण रूप से रेखांकित किया.”

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत-जापान साझेदारी विश्वास पर आधारित है और पिछले एक दशक में और मज़बूत हुई है. जयशंकर ने मानव संसाधन सहयोग और आदान-प्रदान कार्य योजना का हवाला देते हुए लोगों के बीच आदान-प्रदान के महत्व पर भी ज़ोर दिया. इस पहल का उद्देश्य सामाजिक स्तर पर दोनों देशों के बीच गहरी समझ विकसित करना है.

विदेश मंत्री ने सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों – एआई, अर्धचालक, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, “आगे की ओर देखते हुए, भारत-जापान साझेदारी को अपनी शक्तियों का लाभ उठाने, अपनी आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अर्धचालकों, महत्वपूर्ण खनिजों, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष में निवेश करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.”

जयशंकर ने जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी के साथ अपनी बैठक का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, “हाल ही में कुआलालंपुर में आयोजित पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में, मुझे अपने नए समकक्ष और पुराने मित्र, मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी से एक बार फिर मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. हम इस बात पर सहमत हुए कि निकट भविष्य में व्यक्तिगत रूप से इस पर और अधिक विस्तृत समीक्षा करना हमारे पारस्परिक हित में है.”