भारत पहुंचे ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, पीएम मोदी संग मुलाकात, जानें क्या होगा फायदा

नई दिल्ली: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर दो दिवसीय दौरे के लिए 8 अक्टूबर को भारत पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया. भारत आए पीएम स्टार्मर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे.

विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार दोनों देशों के नेता भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) द्वारा प्रस्तुत अवसरों पर व्यवसायों और उद्योग जगत के नेताओं के साथ चर्चा करेंगे.

बता दें, कीर स्टार्मर के लिए भारत का यह कोई साधारण यात्रा नहीं है. इस मुलाकात में व्यापार, निवेश, शिक्षा, रक्षा और तकनीक जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा होगी. इससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे. भारत 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है और उसके साथ व्यापार तेज और सस्ता होने वाला है.
यह मुलाकात क्यों अहम है?
बता दें, इस साल जुलाई में पीएम मोदी यूके गए थे, जहां दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक पहलुओं की समीक्षा की और इसे मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की. इसके अलावा उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर भी विचार किया था.

दोनों नेताओं ने अगले 10 सालों के लिए मिलकर ‘विजन 2035’ नाम की योजना बनाई थी. यह महत्वाकांक्षी और भविष्य-केंद्रित समझौता तेजी से वैश्विक परिवर्तन के समय में आपसी विकास, समृद्धि और एक समृद्ध, सुरक्षित और टिकाऊ दुनिया को आकार देने के लिए दोनों देशों के संकल्प को रेखांकित करता है. इसके तहत व्यापार, शिक्षा, रक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और लोगों के रिश्तों को बेहतर बनाया जाएगा.

व्यापार में क्या होगा?
भारत और ब्रिटेन ने कॉम्प्रीहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) पर भी हस्ताक्षर किए थे. विदेश मंत्रालय के मुताबिक व्यापार सौदा दोनों देशों में आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा और नौकरियों और समृद्धि का समर्थन करेगा. दोनों पक्ष द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) के शीघ्र समापन की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. दोनों पक्ष रेनुअल एनर्जी, स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान, टेकनोलॉजी, व्यावसायिक सेवाओं, वित्तीय सेवाओं और रक्षा जैसे प्राथमिकता वाले विकास क्षेत्रों में इनोलेशन, रिसर्च और नियामक सहयोग का समर्थन करेंगे.

इसका क्या मतलब है?
इस समझौते के तहत भारत के 99 प्रतिशत सामान ब्रिटेन में बिना टैक्स के बिक सकेंगे. भारत में भी ब्रिटेन के 90 फीसदी सामानों पर टैक्स हटाया गया है. दोनों देशों का लक्ष्य है कि 2030 तक व्यापार दोगुना किया जाए. फिलहाल दोनों देशों के बीच करीब 56 अरब डॉलर का कारोबार है.
किन सेक्टर्स को फायदा मिलेगा?
इस एग्रीमेंट से भारतीय किसानों और लघु उद्योगों को लाभ होगा. इसके अलावा फार्मा, कपड़ा, ऑटो पार्ट्स, आईटी, जेम्स-ज्वैलरी जैसे आइटम्स सस्ते होने की उम्मीद है. इससे छोटे बिजनेस को विदेश में नया बाजार मिलेगा.

छात्रों और युवाओं के लिए फायदा?
दोनों देश कोशिश कर रहे हैं कि छात्रों को वीजा आसानी से मिले. अगर ऐसा होता है तो दोनों देशों के छात्रों को बड़ा फायदा होगा. साथ ही ब्रिटेन की यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई करने के लिए सहयोग बढ़ेगा और नौकरी के अवसर बढ़ेंगे. इसके अलावा छात्रों के लिए स्किल डेवलपमेंट और स्टार्टअप में पार्टनरशिप के रास्ते खुलेंगे.

डिफेंस और टेक्नोलॉजी में साझेदारी
भारत और ब्रिटेन मिलकर डिफेंस प्रोडक्ट्स बनाएंगे. इससे मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा. टेक्नोलॉजी के साथ-साथ नए रोजगार के मौके मिलेंगे और भारत की सेना को मजबूत तकनीक का लाभ मिलेगी.साथ ही जलवायु, पर्यावरण और ऊर्जा के क्षेत्र में लाभ मिलेगा.

दोनों देश मिलकर ग्रीन एनर्जी, क्लाइमेट चेंज और साफ ऊर्जा पर काम करेंगे. इससे भविष्य की पीढ़ियों को साफ हवा, साफ पानी और बेहतर पर्यावरण मिल सकेगा. फिनटेक और इनोवेशन में भारत का रोल भी बढ़ेगा.

भारत के स्टार्टअप्स को विदेशी निवेश और ग्लोबल पहचान मिल सकती है
सामरिक दृष्टि से देखा जाए तो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र जहां भारत, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश हैं. इससे ये दुनिया की राजनीति और व्यापार का नया केंद्र बन गया है.इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी और आक्रामक रवैये को लेकर कई देश चिंतित हैं. वहीं, ब्रिटेन, जो अब यूरोपियन यूनियन से बाहर है ब्रेक्सिट के बाद, इंडो-पैसिफिक में नई भूमिका चाहता है. ऐसे में भारत-ब्रिटेन की साझेदारी एक बैलेंसिंग फोर्स के रूप में उभर सकती है.