भारत में पुतिन करीब 28 घंटे गुजारेंगे, दोनों देशों के नेता करेंगे बड़ी डील, जानें सबकुछ

नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का आज गुरुवार 4 दिसंबर से दो दिवसीय भारत दौरा शुरू हो रहा है. जानकारी के मुताबिक पुतिन शाम को नई दिल्ली पहुंचेंगे, जहां उनका भव्य स्वागत किया जाएगा. सूत्रों से पता चला है कि उनके साथ कई मंत्री भी भारत आ रहे हैं. भारत दौरे के दौरान पुतिन पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. इसके साथ-साथ दोनों देशों के नेता कई व्यापारिक समझौतों पर भी साइन करेंगे. बता दें, पुतिन 23वें भारत-रूस समिट में शामिल होने के लिए यहां आ रहे हैं.

रूस के राष्ट्रपति पुतिन के गुरुवार शाम करीब 4:30 बजे नई दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है. उसके कुछ घंटे बाद, पीएम मोदी उनके लिए एक प्राइवेट डिनर आयोजित करेगे. यह डिनर उनके दिल्ली पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद होगा. यह डिनर भारत और अमेरिका के बीच खराब रिश्तों के बीच, दोनों देशों के बीच पूरी स्ट्रेटेजिक और इकोनॉमिक पार्टनरशिप को बढ़ाने के लिए होगा. इसके बाद अगले दिन शुक्रवार को पीएम मोदी और पुतिन के बीच होने वाली मीटिंग होगी, जिसमें दोनों देशों के बीच डिफेंस संबंधों को बढ़ाना, भारत-रूस बिजनेस को बाहरी दबाव से बचाना और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर में सहयोग की संभावना तलाशना, इन मुद्दों पर फोकस रहेगा. ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इस पर पश्चिमी देशों की भी नजर रहेगी.यूक्रेन में युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका की नई कोशिशों के बीच रूसी नेता भारत आ रहे हैं, इसलिए यह मुद्दा समिट में खास तौर पर उठने की उम्मीद है. अगले दिन शुक्रवार की बात करें तो 23वें भारत-रूस समिट से पहले पुतिन का आधिकारिक रूप से स्वागत किया जाएगा. इससे पहले वे राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे.

समिट के बाद, पुतिन रूस के सरकारी ब्रॉडकास्टर का नया इंडिया चैनल लॉन्च करेंगे, जिसके बाद वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तरफ से आयोजित भोज में शामिल होंगे. रूसी नेता के शुक्रवार रात करीब 9:30 बजे भारत से रवाना होने की उम्मीद है, जिससे उनका करीब 28 घंटे का दौरा खत्म हो जाएगा. बता दें, रूस के राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब जब भारत-अमेरिका के रिश्ते पिछले दो दशकों में शायद सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामान पर 50 परसेंट का भारी टैरिफ लगा दिया है, जिसमें रूस से कच्चा तेल खरीदने पर 25 परसेंट टैक्स भी शामिल है.

इस समिट में भारत के रूस से कच्चे तेल की खरीद पर अमेरिकी बैन के असर पर चर्चा होने की संभावना है. इससे पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा कि वेस्टर्न देशों के बैन की वजह से रूस से भारतकी क्रूड ऑयल की खरीद ‘कुछ समय’ के लिए कम हो सकती है, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि मॉस्को सप्लाई बढ़ाने के लिए कदम उठा रहा है.

समिट में, उम्मीद है कि पुतिन मोदी को यूक्रेन विवाद को खत्म करने के लिए अमेरिका की नई कोशिशों के बारे में बताएंगे. यूक्रेन और रूस के बीच तीन सालों से जारी युद्ध को लेकर भारत लगातार यह कहता रहा है कि युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी ही एकमात्र रास्ता है. मोदी-पुतिन की बातचीत के बाद, दोनों पक्षों के बीच कई समझौतों पर साइन होने की उम्मीद है, जिसमें एक भारतीय कामगारों के रूस आने-जाने को आसान बनाने पर, और दूसरा डिफेंस कोऑपरेशन के बड़े फ्रेमवर्क के तहत लॉजिस्टिक सपोर्ट पर होगा. सूत्रों से पता चला है कि फार्मा, एग्रीकल्चर, फूड प्रोडक्ट्स और कंज्यूमर गुड्स के क्षेत्र में रूस को इंडियन एक्सपोर्ट में काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. यह कदम रूस के पक्ष में बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर भारत की चिंताओं के बीच उठाया गया है.

समिट से पहले, दोनों देशों के पक्षा मंत्री आज गुरुवार को बातचीत करेंगे, जिसमें रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम और दूसरे जरूरी रक्षा उपकरणों को खरीदने के भारत के प्लान पर फोकस रहने की उम्मीद है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 मिसाइल सिस्टम बहुत असरदार साबित हुए. टॉप मिलिट्री अधिकारियों ने कहा कि पूरा फोकस दोनों देशों के बीच पहले से ही करीबी डिफेंस और सिक्योरिटी रिश्तों को और बढ़ाने पर होगा, जिसमें रूस से भारत को रक्षा उपकरणों की तेजी से सप्लाई पक्का करने पर खास ध्यान दिया जाएगा.

इससे पहले अक्टूबर 2018 में, भारत ने रूस के साथ S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की पांच यूनिट खरीदने के लिए USD 5 बिलियन की डील साइन की थी, जबकि US ने चेतावनी दी थी कि इस कॉन्ट्रैक्ट पर आगे बढ़ने पर काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन्स एक्ट (CAATSA) के तहत प्रतिबंध लग सकते हैं.