लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र के दौरान मंगलवार को कार्यपालिका और जनप्रतिनिधियों के संबंधों को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली. नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने आरोप लगाया कि अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन तक नहीं उठाते और दलाली में व्यस्त रहते हैं. दूसरी ओर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह अपने सदन में घोषणा की है कि उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले में दो-दो कम्पोजिट स्कूल बनाए जाएंगे.
प्रत्येक जिले में दो-दो कम्पोजिट स्कूल: प्रत्येक स्कूल की लागत 25 करोड रुपये होगी. उन्होंने दावा किया कि इन स्कूल में निजी स्कूलों जैसी व्यवस्थाएं होंगी और बच्चों के एडमिशन की मारामारी रहेगी. सदन में मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने आरोप लगाया कि कार्यपालिका का विधायिका पर हावी होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है. इस संदर्भ में उन्होंने पीठ से हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि सदन की गरिमा की अवहेलना हो रही है.
सभी दलों के विधायक परेशान: समाजवादी पार्टी के विधायक कमाल अख़्तर ने भी कहा कि स्थिति ऐसी हो गई है कि सत्ता पक्ष के विधायकों को भी धरने पर बैठना पड़ता है. उन्होंने कहा कि अधिकारी किसी की सुनवाई नहीं करते, जिससे सभी दलों के विधायक परेशान हैं. उन्होंने मांग की कि सरकार ऐसी व्यवस्था करे जिससे नौकरशाही पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित हो सके. सपा विधायक संग्राम सिंह यादव ने भी अधिकारियों पर फोन न उठाने और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का आरोप लगाया.
अधिकारियों की लापरवाही का मुद्दा उठा: संग्राम सिंह यादव ने कहा कि विधानसभा द्वारा जनप्रतिनिधियों के लिए तय प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित कराया जाए और किसी भी अधिकारी द्वारा उसकी अवहेलना न होने पाए. सपा विधायक रागिनी सोनकर भी अधिकारियों की कथित लापरवाही का मुद्दा उठाते हुए जनप्रतिनिधियों की समस्याओं को गंभीरता से लेने की मांग की. इस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि मामला पीठ के संज्ञान में है. इस पर उचित व्यवस्था की जाएगी. उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री से बातचीत कर ठोस समाधान निकालने का आश्वासन दिया.
अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाते: सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने आरोपों को निराधार बताया. उन्होंने कहा कि कार्यपालिका के व्यवस्थापिका पर हावी होने का सवाल ही नहीं उठता है और जो अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाते, सरकार उनके साथ नहीं है. इसको लेकर पहले से जारी शासनादेश को प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है.
अधिकृत नंबर जारी किए जाएं: मंत्री असीम अरुण ने सुझाव दिया कि प्रदेश या जिला स्तर पर ऐसे अधिकृत नंबर जारी किए जाएं, जिन पर हर हाल में अधिकारियों को जवाब देना अनिवार्य हो, ताकि जनप्रतिनिधियों की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो सके. कई बार अधिकारियों के सामने भी ऐसी समस्याएं आती हैं जिसके चलते वो फोन नहीं उठाते हैं. इसकी व्यवस्था की जानी चाहिए. सदन में उठे इस मुद्दे ने कार्यपालिका और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की आवश्यकता को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है.
बिजली के मुद्दे पर सदन में भिड़ गए पक्ष-विपक्ष, सपा सदस्यों ने किया वॉकआउट: विधान परिषद में नियम 105 के तहत समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य आशुतोष सिन्हा के अलावा अन्य सपा सदस्यों ने बिजली का मुद्दा उठाया. बिजली आपूर्ति को लेकर सरकार पर तीखा हमला किया. बदहाल विद्युत आपूर्ति की बात रखते हुए ऊर्जा मंत्री से सवाल किया. सपा के विधान परिषद सदस्यों ने नियम 105 के तहत सवाल किया कि उत्तर प्रदेश मे विद्युत व्यवस्था दिन प्रतिदिन बदहाल होती जा रही है.
सरकारी दावे बनाम जमीनी सच्चाई: सरकार की तरफ से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश आज विद्युत उत्पादन, आपूर्ति व सुधार के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धिया प्राप्त कर चुका है, लेकिन जमीनी सच्चाई इन दावों से बिल्कुल विपरीत है. ग्रामीण अंचलों, कस्बों, नगर निगम क्षेत्रों, औद्योगिक ईकाइयों और किसानों को भीषण बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है. समाजवादी पार्टी की सरकार में विद्युत उत्पादन क्षमता मे ऐतिहासिक वृद्धि हुई. भविष्य की बिजली की आवश्यकताओं को देखते हुये कई नये पावर प्लान्ट जैसे जवाहरपुर, ओबरा सी हार्डगंज एक्सटेन्शन (33,000 मेगावाट) की कुल क्षमता वाले धर्मल पावर प्लान्ट की आधारशिला रखी गई और पुरानी परियोजनाओं को रफ्तार दी गई.
ऊर्जा मंत्री का पलटवार और वॉकआउट: सपा के सदस्यों की तरफ से नियम 105 के तहत किए गए सवाल का ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने सदन में जवाब देना शुरू किया, लेकिन जब उन्होंने यह कहा कि आपकी सरकार में इतना भ्रष्टाचार फैला हुआ था कि तमाम पदों पर भ्रष्टाचारियों की भर्ती कर दी गई जिसकी वजह से आज भी वे भ्रष्टाचार फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हमारी जीरो टॉलरेंस की सरकार में ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जा रही है. आपके शासनकाल में बिजली की हालत ये थी कि झूलते तारों पर लोग बिजली आती नहीं थी तो कपड़े सुखाते थे. ऊर्जा मंत्री के जवाब से खफा समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया. काफी देर तक सदन की कार्यवाही स्थगित रही.
अघोषित कटौती और स्मार्ट मीटर का मुद्दा: सदन में बिजली के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य आशुतोष सिन्हा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि आज उत्तर प्रदेश में बिजली की व्यवस्था ध्वस्त हो गयी है. भाजपा सरकार ने प्रदेश में बिजली उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कोई नया काम नही किया है. प्रदेश में बड़े पैमाने पर अघोषित बिजली कटौती हो रही है. किसानों को सिचाई के समय बिजली नहीं मिल पा रही है.
बढ़ते दाम और आपूर्ति के दावे: सरकार लोगों के घरो मे प्रीपेड/स्मार्ट मीटर लगा रही है जिससे उपभोक्ताओं से ज्यादा बिजली की बिल की वसूली की जा रही है. सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों को ही विद्युत कटौती के खिलाफ धरना प्रदर्शन करना पड़ रहा है. शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 24 व 18 घण्टा की विद्युत आपूर्ति का दावा हवा हवाई हैं. गर्मी के दिनो में भीषण बिजली की कटौती की जाती है.
कनेक्शन शुल्क और जर्जर व्यवस्था: आये दिन बिजली कटौती और बिजली दरों मे वृद्धि से लोगो का जीना दूभर हो गया है. जो विद्युत कनेक्शन लगभग 500 रुपए में लगाये जाते थे उसे बढ़ा कर 6000 रुपए कर दिया गया है. दो किलोवाट का कनेक्शन अनिवार्य कर दिया गया है. शहरी क्षेत्रों में डेवलपमेन्ट चार्ज के रूप में उपभेक्ताओं से लाखों रुपए की वसूली की जा रही है.
जर्जर बुनियादी ढांचा और सुरक्षा खतरा: प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या मे विद्युत केबल अत्यधिक जर्जर अवस्था मे है. ट्रांसफार्मर अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक भार पर संचालित हो रहे हैं. जर्जर तारों, सार्ट सर्किट से आम नागरिकों, किसानों, पशुओ को जान माल का खतरा बना रहता है. इसके बावजूद जर्जर तारों व ट्रांसर्फामरों को बदले जाने के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है.
विभागीय लापरवाही और बिलिंग धांधली: प्रदेश मे विद्युत विभाग मनमाने ढंग से कार्य कर रहा है. उदाहरण के लिए आजमगढ़ विकास खण्ड हरैया में स्थित रौनापार उपकेन्द्र के ग्राम पंचायत देवारा खास राजा (शिवलोचन का पुरा मे) के 12 घरो में बिना विद्युत केबल, खम्भा लगाये और बिना बिजली कनेक्शन के विद्युत विभाग ने मीटर लगाकर 2018-19 से बिजली बिल वसूला है. प्रदेश में बदहाल विद्युत व्यवस्था से स्थिति विस्फोटक हो गई है. लोग आन्दोलित हो रहे हैं और कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है.