यूपी में 4 करोड़ मतदाता कटे; योगी बोले– ‘ये हमारे थे’, अखिलेश ने 6 पॉइंट में समझाया SIR का फायदा किसे?

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) (Special Intensive Review) प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है. मुख्यमंत्री ने 14 दिसंबर को भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यक्रम में कहा था कि SIR प्रक्रिया के तहत अब तक लगभग 12 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि यूपी की आबादी 25 करोड़ से अधिक है. इस लिहाज से प्रदेश में मतदाताओं की संख्या कम से कम 16 करोड़ होनी चाहिए.

मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया था कि 2024 की मतदाता सूची में प्रदेश में 15 करोड़ 44 लाख मतदाता थे, लेकिन SIR प्रक्रिया में करीब 4 करोड़ नाम हटाए गए. अब जब 12 करोड़ मतदाता हैं, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ये मतदाता सरकार या पार्टी के विरोधी नहीं थे, बल्कि “ये मतदाता हमारे थे”, जिनके नाम प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके.

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अभी दो हफ्ते का समय शेष है और इस अवधि में पूरी पारदर्शिता के साथ छूटे हुए योग्य मतदाताओं के नाम जोड़े जाएं. मुख्यमंत्री के इस बयान पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री स्वयं यह स्वीकार कर रहे हैं कि SIR के दौरान जिन 4 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल नहीं हुए, उनमें 85 से 90 प्रतिशत भाजपा के मतदाता थे.

अखिलेश यादव ने इस बयान के राजनीतिक अर्थ भी निकाले. उन्होंने लिखा, पहला अर्थ यह है कि ‘पीडीए प्रहरी’ की सतर्कता के कारण SIR में भाजपा मनमाफिक गड़बड़ी नहीं कर पाई. दूसरा यह कि जिन मतदाताओं के नाम साक्ष्य के अभाव में हटाए गए, उनमें से अधिकांश भाजपा समर्थक थे. यानी गड़बड़ी भाजपा के वोटरों की ओर से थी.

तीसरा, अगर चार करोड़ में से 85 प्रतिशत भी मानें तो करीब 3 करोड़ 40 लाख भाजपा मतदाता कम हो गए. चौथा, इसका सीधा असर आगामी विधानसभा चुनाव की 403 सीटों पर पड़ेगा. पांचवां, गणित के हिसाब से देखें तो प्रति सीट भाजपा को लगभग 84 हजार वोटों का नुकसान हुआ है. छठा और अंतिम निष्कर्ष यह कि इस गणना से भाजपा आगामी चुनावी रेस से बाहर होती दिख रही है, जबकि यह ‘पीडीए की जीत का अंकगणित’ है.

अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल के संभावित नुकसान को देखते हुए ही चुनाव आयोग ने दो हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया है, लेकिन इसके बावजूद ‘पीडीए प्रहरी’ अब पहले से दोगुनी सतर्कता के साथ SIR प्रक्रिया पर नजर रखेंगे.

वहीं, इस पूरे विवाद पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री के बयान से समाजवादी पार्टी फिलहाल खुश हो सकती है, लेकिन असली परीक्षा 2027 के चुनाव में होगी. SIR के तहत जो नाम हटाए जा रहे हैं, वे या तो मृतक हैं या प्रदेश छोड़कर जा चुके हैं.

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भी ईटीवी भारत से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री का बयान स्वयं इस बात का प्रमाण है कि पीडीए प्रहरी कितने चौकन्ने थे. इसी वजह से पीडीए समर्थकों के वोट नहीं कटे. मुख्यमंत्री के आंकड़ों से पार्टी पूरी तरह सहमत नहीं है, लेकिन जो अंतिम समय मिला है, उसमें सपा और अधिक सतर्क रहकर यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो.

उधर, अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया. उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया का एकमात्र उद्देश्य निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है, ताकि केवल योग्य मतदाता ही मतदान कर सकें. इसके लिए यह अभियान युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वह इस तरह के बयान देकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है.