लखनऊ: मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर, लखनऊ में सिल्क एक्सपो 2026 का शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने किया.
रेशमी उत्पादों की सराहना: इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप भी उपस्थित रहे. समारोह में पंंडित दीन दयाल उपाध्याय रेशम रत्न सम्मान का वितरण किया गया, जिसमें रेशम उद्योग से जुड़े 16 विशिष्ट लोगों को सम्मानित किया गया. साथ ही विभागीय उपलब्धियों पर आधारित ‘रेशम मित्र 2025’ पत्रिका का विमोचन भी किया गया.रेशम उत्पादन बढ़ाने पर जोर: मंत्रियों ने प्रदर्शनी में लगे रेशमी उत्पादों के स्टॉलों का निरीक्षण कर विभागीय प्रयासों की सराहना की. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री राकेश सचान ने कहा कि योगी सरकार के नेतृत्व में प्रदेश में रेशम उत्पादन को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है. उन्होंने बताया कि वर्ष 1988 में रेशम विभाग की स्थापना के समय प्रदेश में जहां मात्र 27 मीट्रिक टन रेशम का उत्पादन होता था, वहीं आज यह बढ़कर 450 से 500 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है.
वाराणसी में रेशम की खपत सबसे ज्यादा: वर्ष 2022 में उत्पादन लगभग 300 मीट्रिक टन था, जिसे बीते चार वर्षों में प्रतिवर्ष औसतन 50 मीट्रिक टन की वृद्धि के साथ नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया गया है. मंत्री सचान ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में रेशम की वार्षिक खपत लगभग 5 से 6 हजार मीट्रिक टन है, जिसमें अकेले वाराणसी एवं आसपास के क्षेत्रों में 3500 से 4000 मीट्रिक टन रेशम की खपत होती है.
मल्टी रीलिंग इकाइयों की स्थापना हुई: सरकार का लक्ष्य प्रदेश को अपनी आवश्यकता के अनुरूप रेशम उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे किसानों, बुनकरों और उद्यमियों को स्थायी रोजगार और आय के अवसर मिल सकें. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना एवं केंद्रीय रेशम बोर्ड की योजनाओं के तहत कुशीनगर, बलरामपुर, गोंडा, लखीमपुर, श्रावस्ती, महाराजगंज, बस्ती, औरैया एवं सहारनपुर सहित विभिन्न जनपदों में मल्टी रीलिंग इकाइयों की स्थापना की गई है.
75 इकाइयों को 2.16 करोड़ रुपये सहायता: वर्ष 2024-25 में 1630 लाभार्थियों को कीटपालक गृह निर्माण एवं उपकरण क्रय हेतु 32.49 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की गई, जबकि वाराणसी में रेशम वस्त्रों की बुनाई, रंगाई एवं निर्माण के लिए 75 इकाइयों को 2.16 करोड़ रुपये की सहायता दी गई. चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1100 नए लाभार्थियों को रेशम उत्पादन से जोड़ने के लिए 18.10 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता प्रस्तावित है, जिसमें जनजाति वर्ग के लाभार्थी भी शामिल हैं.रेशम मित्र पोर्टल से हो रहा फायदा: इसके साथ ही प्रदेश में पहली बार मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना को स्वीकृति दी गई है, जिसके अंतर्गत आगामी 10 वर्षों में 13,500 किसानों को 9,000 एकड़ भूमि पर शहतूत वृक्षारोपण से जोड़ते हुए 360 मीट्रिक टन अतिरिक्त रेशम धागा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. मंत्री ने बताया कि किसानों और उद्यमियों की सुविधा के लिए रेशम मित्र पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन, मॉनिटरिंग और पारदर्शी क्रियान्वयन की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे योजनाओं का लाभ सरलता और प्रभावी ढंग से लाभार्थियों तक पहुंच रहा है.
उत्पादन, रोजगार और आय में लगातार वृद्धि: राज्य मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से प्रदेश में रेशम उद्योग ने ऐतिहासिक प्रगति की है. केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से प्रतिवर्ष 2000 से 2500 नए किसानों को रेशम कीटपालन से जोड़कर उत्पादन, रोजगार और आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की जा रही है. रेशम उद्योग प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ आधार प्रदान कर रहा है.
8 श्रेणियों में दिये गये पुरस्कार: सिल्क एक्सपो 2026 के अंतर्गत आयोजित पंंडित दीन दयाल उपाध्याय रेशम रत्न सम्मान समारोह में कृषकों, बुनकरों, उद्यमियों, डिजाइनरों और कार्मिकों को 8 श्रेणियों में प्रथम व द्वितीय पुरस्कार प्रदान किए गए. प्रथम पुरस्कार के रूप में 50,000 रुपये, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 25,000 रुपये, प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान किए गए.
प्रदर्शनी 6 फरवरी तक चलेगी: एक्सपो में केंद्रीय रेशम बोर्ड (भारत सरकार) से पंजीकृत उत्तर प्रदेश सहित बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों के बुनकरों और व्यापारियों द्वारा शुद्ध रेशमी का प्रदर्शन एवं विक्रय किया जा रहा है. यह प्रदर्शनी 06 फरवरी 2026 तक आम जनता के लिए खुली रहेगी.