बारामूला: भारतीय सेना ने स्वतंत्रता दिवस से पहले जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास चल रहे ऑपरेशन सिंदूर के तहत गश्त तेज कर दी है. सेना घुसपैठ की कोशिशों को रोकने और सीमा पार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उन्नत हथियारों और उन्नत निगरानी उपकरणों का इस्तेमाल कर रही है. नियंत्रण रेखा पर तैनात सैनिक रूस निर्मित एके-47 राइफलों, अमेरिका निर्मित सिग 716 असॉल्ट राइफलों और एके-203 से लैस हैं.
अधिकारियों ने बताया कि एके-203, रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता बढ़ाने तथा सैनिकों को अत्याधुनिक मारक क्षमता से लैस करने के प्रयासों का हिस्सा है. छोटे हथियारों के अलावा, गश्ती इकाइयां ऊबड़-खाबड़ इलाकों और संदिग्ध घुसपैठ मार्गों पर नजर रखने के लिए त्रिनेत्र ड्रोन का उपयोग कर रही हैं, जिसका नाम संस्कृत में “तीसरी आंख” के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
ये ड्रोन जीपीएस-आधारित रात्रि उड़ान क्षमताओं, दृश्यमान और अवरक्त दोनों तरंगदैर्ध्य में चमकती रोशनी और दोहरे सेंसर वाले पेलोड से लैस हैं. इनकी स्कैनिंग तकनीक अल्ट्रा-हाई-रिज़ॉल्यूशन 3डी मैपिंग को सक्षम बनाती है, जिससे सैनिकों को कम दृश्यता की स्थिति में भी इलाके की विशेषताओं और संभावित खतरों का विस्तृत दृश्य मिलता है.
मंगलवार को ईटीवी भारत की टीम उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में लगभग 8,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित सेना की आखिरी चौकी पर पहुंची. अधिकारियों ने बताया कि इस रणनीतिक चौकी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में एक आतंकी लॉन्चपैड को नष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. यह चौकी नियंत्रण रेखा के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर नजर रखती है, जिससे यह निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया दोनों के लिए महत्वपूर्ण है.
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह कड़ी चौकसी ऑपरेशन सिंदूर के तहत शुरू किए गए सटीक अभियानों का एक हिस्सा है. 15 अगस्त के जश्न से पहले एक एहतियाती कदम है. संवेदनशील इलाकों में सैनिकों की मौजूदगी बढ़ा दी गई है. नियंत्रण रेखा पर निगरानी उड़ानें ज़्यादा बार की जा रही हैं.