लखनऊ: उत्तर प्रदेश में नई शिक्षक भर्ती से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि परिषदीय स्कूलों में शिक्षक छात्र अनुपात के अनुसार शिक्षकों की संख्या पर्याप्त है। लिहाजा भर्ती का कोई प्रस्ताव या प्रक्रिया विचाराधीन नहीं हैं। उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे बेरोजगार युवाओं को इस खबर से निराशा होगी। क्योंकि प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार नई भर्ती लाने का विचार नहीं कर रही।
सदन में पेश हुआ शिक्षकों का आंकड़ा!
यूपी विधानमंडल सत्र में योगी सरकार ने विधानसभा में प्रदेश के शिक्षकों का आंकड़ा पेश किया. इसकी वजह बने गोसाईगंज विधायक अभय सिंह। उन्होने सदन में शिक्षक भर्ती का मुद्दा उठाया था. उन्होंने पूछा कि 85152 पद खाली होने के बावजूद प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती क्यों नहीं हो रही है. सरकार की तरफ से जवाब देने के लिए बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह सामने आए. उन्होंने सदन को बताया कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को मिलाकर शिक्षक-छात्र का अनुपात पूरा हो रहा है. उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा में 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए. अपर प्राइमरी के लिए 35 और एक का अनुपात निर्धारित है.
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के कितने पद खाली?
बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षक और छात्र के अनुपात को बरकरार रखे हुए है. अनुपात पूरा होने की वजह से पठन पाठन में दिक्कत नहीं आ रही है. 2017 से अब तक एक लाख 26 हजार 371 नए शिक्षकों की भर्ती की गई है. वहीं, 69 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को मंत्री ने अदालत में लंबित बताया. पूरक प्रश्न के जवाब में मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि उप्र बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्राधीन संचालित परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में स्वीकृत पद 417886 के सापेक्ष प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक के 85152 पद खाली हैं.
सदन में पेश किया डेटा
योगी सरकार के मंत्री ने दावा किया कि प्राथमिक स्कूलों में 147766 शिक्षामित्रों को शामिल करते हुए छात्र-शिक्षक का अनुपात 21 और 1 है. उन्होंने अनुपात को मानक के अनुसार पूरा बताया.
शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने पर विचार कर रही सरकार
संदीप सिंह ने कहा कि शिक्षा मित्रों के मानदेय और सुविधाएं बढ़ाने के लिए उच्च न्यायालय के आदेश पर बेसिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। उसकी रिपोर्ट आने पर विचार किया जाएगा। संदीप सिंह ने विधानसभा में बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से शिक्षा मित्रों की सहायक अध्यापक पद पर हुए समायोजन को रद्द किया गया था। उस समय उनका मानदेय 3500 रुपये था। 2017 में सरकार ने शिक्षा मित्रों का मानदेय करीब तीन गुना बढ़ाकर 10000 रुपये महीना किया। उन्होंने कहा कि मानदेय बढ़ाने को लेकर शिक्षा मित्रों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मामले में कमेटी गठित कर कार्यवाही करने का आदेश दिया है। उच्च न्यायालय के आदेश पर बेसिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी गठित की है।