लखनऊ: कुकरैल नदी पर कब्जा करके अवैध रूप से बसाए गए अकबरनगर प्रथम और द्वितीय के निर्माण को ध्वस्त करने पर रोक लगाने की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने एलडीए को सभी विस्थापितों को वैकल्पिक आवास आवंटित करने के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के ध्वस्तीकरण आदेश को बरकरार रखा है।
सुप्रीम कोर्ट ने केवल अकबरनगर ही नहीं, अस्ती गांव के उदगम स्थल से गोमती नदी में विलय तक कुकरैल नदी पर हुए अवैध निर्माण को भी चिह्नित कर उसे ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के समय एलडीए उपाध्यक्ष डा. इंद्रमणि त्रिपाठी और अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा भी वहां उपस्थित थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एलडीए ने आवेदन करने वाले पात्रों का चयन कर 20 मई तक बसंत कुंज योजना में प्रधानमंत्री आवास आवंटित करने की तैयारी शुरू कर दी।
अकबरनगर प्रथम और अकबरनगर द्वितीय में 1068 आवासीय और 101 व्यावासायिक निर्माण को गिराने की नोटिस दी गई थी। एलडीए ने 21 दिसंबर 2023 को ताजमहल फर्नीचर सहित अवैध व्यावसायिक निर्माण को तोड़ना शुरू किया था। हाईकोर्ट में अपील के बाद एलडीए को कार्रवाई रोकना पड़ी। हाईकोर्ट का आदेश मिलते ही इस साल फरवरी में 24 बड़े-बड़े शोरूम को तोड़ा गया। इसके बाद कई चरण में अवैध शोरूम और फर्नीचर के कारखाने और गोदामों को तोड़ा गया।
अकबरनगर प्रथम और द्वितीय के कई लोगों ने कुकरैल नदी को नाला बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी थी। इस बीच एलडीए ने अकबरनगर प्रथम और द्वितीय के लोगों को लीज पर निश्शुल्क बसंत कुंज योजना में पीएम आवास दिलाने के लिए शिविर लगाए थे।