नई दिल्ली: प्रभु श्रीकृष्ण व राधा रानी के दर्शन करने के लिए आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कड़ी सुरक्षा के बीच ट्रेन से मथुरा के लिए निकलीं. दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से राष्ट्रपति के लिए मथुरा तक ‘महाराजा एक्सप्रेस’ को प्रेसिडेंट स्पेशल ट्रेन के रूप में चलाया गया. इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी इसी विशेष ट्रेन से दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से कानपुर स्थित अपने पैतृक गांव गए थे. अब महाराजा एक्सप्रेस को प्रेसिडेंट स्पेशल ट्रेन के रूप में इसलिए चलाया जाता है, क्योंकि पारंपरिक राष्ट्रपति सैलून (प्रेसीडेंट ट्विन कार) को अब विरासत के तौर पर नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रेल संग्रहालय में संरक्षित कर दिया गया है.
प्रेसिडेंट स्पेशल ट्रेन से सफर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बृहस्पतिवार सुबह 8:10 बजे दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से प्रेसिडेंट स्पेशल ट्रेन से मथुरा के लिए रवाना हुईं. महाराजा एक्सप्रेस को प्रेसीडेंट स्पेशल ट्रेन के रूप में चलाया गया. इसमें कुल 18 कोच लगाए गए हैं. राष्ट्रपति के साथ भारी संख्या में सुरक्षा बल व उनके स्टाफ भी गए है. इतना ही नहीं प्रेसिडेंट स्पेशल ट्रेन से आगे रेलवे ट्रैक के सुरक्षा जांच के लिए एडवांस पायलट का इंजन और एक कोच को चलाया गया. सुरक्षा जांच के बाद पीछे से प्रेसीडेंट स्पेशल ट्रेन चलाई गई. राष्ट्रपति आज ही शाम दर्शन करने के बाद इसी ट्रेन से दिल्ली वापस आ जाएंगी. बता दें कि इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जून 2023 में भुवनेश्वर से अपने गृह नगर रायरंगपुर (ओडिशा) तक स्पेशल ट्रेन से सफर किया था.
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: प्रेसिडेंट स्पेशल ट्रेन को कड़ी सुरक्षा के बीच चलाया गया. कई दिन पहले से ही रेलवे स्टेशन से लेकर रलवे ट्रैक तक की कड़ी सुरक्षा जांच चल रही थी. रेलवे स्टेशन पर एसपीजी, आरपीएफ, दिल्ली पुलिस समेत तमाम सुरक्षा एंजेंसियों के जवान तैनात रहे. बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी दिल्ली से प्रेसिडेंट स्पेशल ट्रेन में मथुरा भी गए. इतना ही नहीं रेलवे ट्रैक पर भी सुरक्षा के लिहाज से आरपीएफ और राज्य पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है.
2021 में भी चली थी ये ट्रेन: 25 जून 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी ट्रेन से ही दिल्ली से कानपुर गए थे. उस समय भी महाराजा एक्सप्रेस को प्रेसिडेंट स्पेशल ट्रेन के रूप में चलाया गया था. तब भी यह स्पेशल ट्रेन दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से कानपुर तक के लिए चलाई गई थी. उस समय भी यही प्रोटोकाल पूरे किए गए थे.
पहले होता था राष्ट्रपति सैलून: देश की आजादी से बाद राष्ट्रपति के लिए अलग सैलून हुआ करता था, जिसे राष्ट्रपति सैलून या प्रेसिडेंट ट्विन कार कहा जाता है, जिसमें दो विशेष कोच होते थे, एक राष्ट्रपति के लिए और दूसरा उनके स्टाफ के लिए होता था. यह स्पेशल सैलून 1956 में तैयार किया गया था. वर्ष 2024 में राष्ट्रपति कार्यालय के निर्देश पर नेशनल रेल म्यूजियम में संरक्षित कर दिया गया है, जहां पर इस सैलून को लोग देख सकते हैं. इस ऐतिहासिक सैलून में देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से लेकर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तक और कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने सफर किया था.