नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में कथित जहरीले कफ सिरप से हुई बच्चों की मौतों की सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) शुक्रवार को खारिज कर दी. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया.
याचिकाकर्ता, अधिवक्ता विशाल तिवारी ने कहा कि इस तरह की मिलावटी दवा का यह पहला मामला नहीं है, और राज्य एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं; इसलिए एक ही एजेंसी से जांच जरूरी है.
वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि तमिलनाडु, मध्य प्रदेश आदि राज्य सरकारें इस संबंध में कदम उठाएंगी. मेहता ने कहा, “हम राज्यों पर भरोसा नहीं कर सकते. बेशक, वे कदम उठाएंगे.”
तिवारी ने कहा कि कई बच्चों की मौत हुई है, और कोई उचित प्रयोगशाला परीक्षण या क्लिनिकल परीक्षण नहीं किया गया है.
मेहता ने तिवारी की जनहित याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जब भी कुछ होता है, सभी संस्थान मौजूद होने के बावजूद, वह अखबार पढ़ते हैं और यहां आते हैं.
इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने वकील से पूछा कि उन्होंने कितनी जनहित याचिकाएं दायर की हैं. तिवारी ने जवाब दिया कि उन्होंने आठ से दस जनहित याचिकाएं दायर की हैं. इसके बाद पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी.
जनहित याचिका में दूषित कफ सिरप के निर्माण, विनियमन, परीक्षण और वितरण की व्यापक जांच करने और प्रणालीगत दवा-सुरक्षा सुधारों की सिफारिश करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड न्यायाधीश की अध्यक्षता में राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति के गठन की मांग की गई थी. इसके अलावा, याचिका में शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में विभिन्न राज्यों में बच्चों की मौत की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की गई थी.
याचिका में दावा किया गया था कि सितंबर की शुरुआत से अब तक कम से कम 14 बच्चों की मौत हो चुकी है, जिनमें से ज्यादातर मामले महाराष्ट्र के नागपुर और मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से सामने आए हैं. याचिका में यह भी दावा किया गया कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किए गए प्रयोगशाला परीक्षणों में तमिलनाडु की श्रीसन फार्मा प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित ‘कोल्ड्रिफ कफ सिरप’ में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जो जहरीला औद्योगिक विलायक (toxic industrial solvent) है और दवाइयों में इस्तेमाल के लिए प्रतिबंधित है.
याचिका में कहा गया है, “भयावह निष्कर्षों के बावजूद, केंद्र सरकार और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) कथित तौर पर तत्काल देश भर से कफ सिरप को वापस मंगाने या प्रतिबंध जारी करने में विफल रहे, जिससे राज्यों में संभावित रूप से जहरीली दवाओं का प्रचलन जारी रहा.”
याचिकाकर्ता ने गाम्बिया और उजबेकिस्तान की घटनाओं का भी जिक्र किया था, क्योंकि डीईजी-दूषित भारतीय कफ सिरप विदेश में 90 से अधिक बच्चों की मौतों से जुड़े थे. जनहित याचिका में कहा गया, “यह संयोग की त्रासदी नहीं, बल्कि लापरवाही, उदासीनता और नियामक विफलता है – जो नकली और मिलावटी दवाओं को सार्वजनिक बाजार में बेरोकटोक प्रवेश करने देती है.”