लखनऊः उत्तर प्रदेश पुलिस की 112 सेवा में बड़ा बदलाव हुआ है. अभी तक 112 सेवा को फोन करने के बाद कॉलर को अपना एड्रेस और अपने पते का लैंडमार्क बताने पड़ते थे. इसके बाद 112 के कंट्रोल रूम रूम से पीआरबी को सूचना भेजी जाती थी जिसके बाद करीब 25 से 30 मिनट में यह सेवा सहायता के लिए पहुंचती थी. अब इस बदलाव के जरिए यह सेवा अधिकतम 7 मिनट में संबंधित कॉलर के पते पर पहुंचने में सक्षम होने जा रही है. चलिए जानते हैं इसके बारे में.
कॉलर की लाइव लोकेशन मिलेगी: उत्तर प्रदेश पुलिस की 112 सर्विस डायरेक्टर जनरल नीरा रावत ने बताया कि एंड्रॉयड इमरजेंसी लोकेशन सर्विस (ईएलएस) का काम ट्रायल बेसिस पर चल रहा है. यह सेवा जल्द ही पूरे उत्तर प्रदेश में लागू की जाएगी. ईएलएस प्रणाली के जरिए हम फोन करने वाले बॉलर के हैंडसेट से उसकी लाइव लोकेशन 112 के कंट्रोल रूम में देख सकेंगे. इसकी मदद से मदद मांगने वाले को अपनी लोकेशन नहीं बतानी पड़ेगी बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस खुद ही उनकी लाइव लोकेशन को ट्रैक कर लेगी.
पहली बार कब शुरू हुई थी सेवा: उन्होंने बताया कि साल 2016 में पहली बार हाईटेक अप डायल 100 की शुरुआत हुई थी उसे समय रिस्पांस टाइम 25-30 मिनट का था यानी किसी भी शिकायत आने पर उसे सूचना के देने वाले के पास पुलिस 25-30 मिनट में पहुंचती थी. पर अब इसमें टेक्नोलॉजी के मदद से बदलाव किया जा रहा है अब 112 का रिस्पांस टाइम घटकर 7 मिनट का आ गया है. ईएलएस प्रणाली के लागू होने के बाद इसमें और भी सुधार होगा और कुछ ही मिनट में हम मदद मांगने वाले के पास पहुंच सकेंगे.ऐसे संचालित होती है सेवा: डीजी नीरा रावत ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति इमरजेंसी के समय यूपी 112 डायल करता है तो और मदद मांगता है. तो कॉल सेंटर ऑपरेटर कॉल की लोकेशन के हिसाब से निकटतम मौजूद पीआरबी को घटना के बारे में बताता है और उसे वहां पहुंचने का निर्देश देता है. एंड्रॉयड इमरजेंसी लोकेशन सर्विस (ईएलएस) के माध्यम से आप सिस्टम पीआरबी को कॉलर की लोकेशन की जानकारी भेजता है.पूर्व में लगी डिवाइस रिजल्ट टाइम में व्हीकल की लोकेशन को ट्रैक करता है और इसे सेंट्रल सर्वर पर अपडेट करता रहता है. साथी असाइनमेंट के तुरंत बाद कॉलर के मोबाइल पर एक एसएमएस या ऐप पर नोटिफिकेशन भेजा जाता है. इसमें पीआरवी का पूरा विवरण जिसमें व्हीकल नंबर, पुलिस कर्मी का नाम और लिंक और ट्रैकिंग कोड शामिल होता है. सहायता मांगने वाला व्यक्ति एसएमएस में दिए गए लिंक को क्लिक करता है या 112 के एप या वेबसाइट पर ट्रैकिंग क्षेत्र में कोर्ट इंटर करता है तो इसे एक मैप ओपन होता है जो पीआरबी की लाइव लोकेशन दिखता है.
मैप पर आइकन मूव कर बताएगा लोकेशन: मैप पर आइकन मूव करता रहता है. सिस्टम पूरी कैलकुलेट करके बताता है कि पीड़ित कितने किलोमीटर दूर है और कितने अनुमति समय में सहायता मांगने वाले के पास पहुंच सकता है. इस नई प्रणाली के तहत जब पीआरवी कॉलर की लोकेशन के करीब पहुंचती है. तो एक फाइनल नोटिफिकेशन भेजा जाता है गाड़ी के पहुंचने के बाद ट्रैकिंग खुद ही बंद हो जाती है. डीजी ने बताया कि मौजूदा समय में 112 में नई टेक्नोलॉजी के साथ एआई का भी भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है.
इस बार 30 करोड़ का बजट: 2016 में जब डायल 100 जो मौजूदा समय में अप 112 है उसमें पहले चरण में 4800 गाड़ियां थी. इसके बाद 2023 दिसंबर में इसके दूसरे चरण में गाड़ियों की संख्या बढ़कर 6278 की गई इसमें टू व्हीलर गाड़ियों की संख्या करीब 2000 के आसपास है. सरकार की ओर से जारी 30 करोड़ के बजट से 284 नई गाड़ियां 112 के लिए खरीदी जा रही है जिसमें 31 इनोवा क्रिस्टा 166 महिंद्र स्कॉर्पियो और 87 टू व्हीलर गाड़ियां है. इन गाड़ियों के बेड़े में शामिल होने से 112 का रिस्पांस टाइम में काफी सुधार आएगा.