यूपी सरकार की नई योजना से गांवों में बढ़ेगी आमदनी, शहर जाने की जरूरत नहीं

लखनऊ : गांवों को आत्मनिर्भर बनाने और पलायन रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने खास प्लान तैयार किया है. इससे युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे शहरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. लोग आत्मनिर्भर बनेंगे. सरकार की यह योजना कई लोगों के जीवन में खुशहाली लाने का जरिया बनेगी.

सरकार की योजना के तहत गांवों के बड़े जमीन मालिकों को अपनी ही जमीन पर छोटी औद्योगिक कॉलोनियां विकसित करने की छूट दी जा रही है. सरकार यहां कई तरह की सुविधाएं मुहैया कराएगी. क्या है यह योजना?, कहां करना है आवेदन?’जमीन मालिकों को बनाएंगे कॉलोनाइजर’ : लघु एवं सूक्ष्म उद्योग विभाग के उपाध्यक्ष नटवर गोयल ने बताया कि हमारा मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और पलायन रोकना है. अभी तक गांवों में उद्योग लगाने के लिए जमीन अधिग्रहण, बिजली-पानी और सड़क जैसी समस्याएं आड़े आती थीं. अब हम भूस्वामी को ही कॉलोनाइजर बना रहे हैं, ताकि वह अपनी जमीन का अधिकतम उपयोग कर सकें. गांव में ही छोटे-छोटे कारखाने, वर्कशॉप, गोदाम या प्रोसेसिंग यूनिट लगवा सके.

‘जमीन बेचने या डेवलपर को देने की जरूरत नहीं’ : उपाध्यक्ष ने बताया कि योजना की खास बात यह है कि भूस्वामी को अपनी जमीन बेचने या किसी बड़े डेवलपर को देने की जरूरत नहीं पड़ेगी. वह खुद मालिक बना रहेगा. अपनी मर्जी से प्लॉट काटकर उद्यमियों को किराए या बिक्री पर दे सकेगा. सरकार केवल बुनियादी ढांचा देगी, बाकी फैसला भूस्वामी का ही होगा. इससे जहां एक तरफ गांव में निवेश आएगा, वहीं दूसरी तरफ भूस्वामी को नियमित आय का जरिया भी मिलेगा.

उपाध्यक्ष ने बताया कि विभाग के पास अब तक पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सैकड़ों गांवों से आवेदन आ चुके हैं. जालौन, हमीरपुर, चंदौली, गाजीपुर, बुलंदशहर, मथुरा जैसे जिलों के बड़े जमींदारों ने सबसे ज्यादा रुचि दिखाई है. कई भूस्वामियों ने तो 10-15 एकड़ तक की जमीन इस योजना के लिए चिन्हित कर ली है.

‘ग्रामीण भारत की नई औद्योगिक क्रांति’ : नटवर गोयल का मानना है कि यह योजना यदि सफल रही तो उत्तर प्रदेश के ग्रामीण परिदृश्य को पूरी तरह बदल देगी. गांवों में ही फूड प्रोसेसिंग, हैंडीक्राफ्ट, लकड़ी का फर्नीचर, लोहे का सामान, प्लास्टिक रिसाइक्लिंग जैसी छोटी-छोटी इकाइयां लगने लगेंगी. इससे न केवल रोजगार बढ़ेगा बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था भी आत्मनिर्भर बनेगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस योजना को ‘ग्रामीण भारत की नई औद्योगिक क्रांति’ करार दिया है. उन्होंने कहा है कि हम गांव को शहर बनाने की नहीं, बल्कि गांव को गांव की ताकत देने की बात कर रहे हैं.

उपाध्यक्ष ने बताया कि योजना के पहले चरण में 500 से ज्यादा गांवों को चिन्हित किया जा रहा है. आने वाले कुछ महीनों में प्रदेश के कोने-कोने में छोटी-छोटी औद्योगिक कॉलोनियां नजर आने लगेंगी. ग्रामीण युवाओं में इस योजना को लेकर जबरदस्त उत्साह है. कई युवा पहले ही भूस्वामियों से संपर्क करके अपनी यूनिट लगाने की योजना बना रहे हैं. कुल मिलाकर यह योजना न केवल पलायन रोकने में कारगर साबित हो सकती है बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है.योजना के लिए इतनी होनी चाहिए जमीन : उपाध्यक्ष ने बताया कि लघु एवं सूक्ष्म उद्योग विभाग की इस योजना के तहत जमीन मालिक की कम से कम 5 एकड़ जमीन होनी चाहिए. इतनी जमीन होने पर सरकार भूस्वामी को औद्योगिक कॉलोनाइजर घोषित कर देगी. वहां सरकार प्लॉट तक अपने खर्चे पर पक्की सड़क, स्ट्रीट लाइट, सीवर, बिजली के पोल, ट्रांसफार्मर और पब्लिक यूटिलिटी सुविधाएं उपलब्ध कराएगी. योजना की घोषणा होते ही पूरे प्रदेश से सैकड़ों आवेदन विभाग के पास पहुंच गए हैं.

एक ही गांव के कई लोग कर सकते हैं आवेदन : योजना के अनुसार, जमीन मालिक अपनी जमीन पर लघु औद्योगिक इकाइयों की कॉलोनी बना सकेगा. इतना ही नहीं, लेआउट पास कराने और रजिस्ट्री कराने में भी पूरी छूट मिलेगी. आवेदन प्रक्रिया अभी आनलाइन नहीं है. लघु एवं सूक्ष्म उद्योग के जिला कार्यालय के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. जिस जमीन पर कृषि हो रही है, उस पर उद्योग नहीं लगाया जा सकेगा. आवेदन की कोई सीमा नहीं है. एक गांव से कई लोग आवेदन कर सकते हैं.

औद्योगिक कॉलोनी में उद्योग लगाने की जिम्मेदारी जमीन मालिक की होगी. वह लोगों को रोजगार देकर या रोजगार के लिए किराए पर जमीन देकर दोनों स्थितियों में कमाई कर सकेंगे.