लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कालिदास मार्ग स्थित सरकारी आवास में सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अवसर पर ‘फ्लैग पिन’ और ‘स्मारिका’ का विमोचन किया. यह दिवस देश की रक्षा में शहीद हुए वीर जवानों और उनके परिवारों के कल्याण और सम्मान के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अवसर पर मुख्य सचिव एसपी गोयल को उत्तर प्रदेश के सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास के निदेशक ब्रिगेडियर अतुल कुमार एसएम ने प्रतीकात्मक झंडा लगाकर स्मृति चिन्ह भेंट किया. उन्होंने कहा कि हमारी सशस्त्र सेनाओं का साहस, शौर्य, त्याग, बलिदान और निःस्वार्थ भाव से सेवा करने का स्वर्णिम इतिहास रहा है.
सशस्त्र सेनाएं कठिन परिस्थितियों और दुर्गम स्थानों पर न सिर्फ राष्ट्र की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने, बल्कि देश की आन्तरिक कठिनाइयों व दैवीय आपदाओं के समय लोगों की जीवन रक्षा करने और उन्हें राहत पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य सम्पन्न करती हैं. इस अवसर पर उन्होंने देश की सशस्त्र सेनाओं के सभी सैनिकों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की.
समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव एल. वेंकटेश्वर लू, सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास के अतिरिक्त निदेशक कर्नल शैलेंद्र उत्तम, कर्नल बलराम तिवारी और विंग कमांडर परमिंदर कौर उपस्थित रहीं.
क्यों मनाया जाता है सशस्त्र सेना झंडा दिवस : सशस्त्र सेना झंडा दिवस या झंडा दिवस हर साल सात दिसंबर को मनाया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के जवानों का आभार प्रकट करते हुए सेना के लिए धनराशि एकत्र करना है, जिसकी जरूरत आजादी के बाद ही भारतीय सशस्त्र बलों के कर्मियों और सेना के कल्याण के लिए महसूस हुई. 28 अगस्त 1949 को तत्कालीन रक्षामंत्री बलदेव सिंह की अध्यक्षता में एक समिति का गठन हुआ था. इसका गठन रक्षाकर्मियों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए किया गया था.
देश का कोई भी नागरिक अपना योगदान सेना को देना चाहता है, तो केंद्रीय सैनिक बोर्ड की वेबसाइट पर जाकर योगदान दे सकता है. इस दिवस के आयोजन का एक कारण सेना के प्रति सम्मान का इजहार करना भी है. सशस्त्र सेना झंडा दिवस के दिन जल, थल और वायु सेना के प्रतिकात्मक छोटे झंडे वितरित किए जाते हैं, जिसके बदले देश के नागरिक दान देते हैं. देश के लिए कुर्बान हुए सैनिकों के प्रति यह अपनी भागीदारी निभाने का बड़ा जरिया भी है.