नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कॉल नहीं किया, इसलिए ट्रेड डील फेल हो गई. यह बयान खुद अमेरिका के कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लटनिक ने दिया है. लटनिक ने कहा कि सबकुछ हो चुका था, लेकिन पहली शर्त यह थी कि पीएम मोदी को कॉल करना पड़ेगा. यह उस समय की बात है, जब अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा नहीं की थी. लटनिक ने यह खुलासा ऑल-इन पॉडकास्ट में किया. इसे एंटरप्रेन्योर चमाथ पालिहापिटिया होस्ट करते हैं.
इसका मतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का “इगो” बीच में आ गया, क्योंकि पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप को पर्सनली कॉल नहीं किया, इसलिए अमेरिका ने भारत के साथ डील को मंजूरी नहीं दी. संभवतः यही वजह है कि अब ट्रंप 500 फीसदी टैरिफ तक की बात कर रहे हैं.पूर्व राजनयिक सुरेश गोयल ने कहा, “मैं अमेरिका से इस तरह की भाषा सुनकर काफी हैरान और अचंभित हूं 40 से ज्यादा सालों तक डिप्लोमेसी के क्षेत्र में रहने के बाद, मैंने कभी नहीं सोचा था कि अमेरिका जैसा कोई देश किसी दूसरे संप्रभु देश के साथ इस तरह का व्यवहार कर सकता है. देश एक-दूसरे के साथ इस तरह से पेश नहीं आते. डिप्लोमेसी इस तरह से नहीं की जाती. जहां तक ट्रेड डील की बात है, हां, अगर यही वजह है कि वे डील साइन करने को तैयार नहीं हैं, तो ठीक है. लेकिन भारत एक बड़ा देश है. भारत अब चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. किसी को भी, अमेरिका समेत, भारत के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए, चाहे नतीजे कुछ भी हो, अगर वे भारतीय सामानों पर 500% टैरिफ लगाना चाहते हैं, तो बात यहीं खत्म. हमारे मंत्री ने कहा कि ट्रेड बातचीत चल रही है. अगर यूएस चाहेगा तो हम ट्रेड बातचीत जारी रखने में खुश होंगे.”हालांकि, लटनिक ने उस समय का जिक्र नहीं किया जब ये घटनाएं हुईं, लेकिन पिछले साल अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स और एक जर्मन अखबार की रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ट्रंप ने जुलाई में मोदी को “चार बार” फोन किया, लेकिन प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति से बात करने से मना कर दिया था.
डील को लेकर लटनिक ने कहा कि बाद में भारत चाहता था कि बातचीत आगे बढ़े, लेकिन तब तक अमेरिका ने नई शर्तें थोप दीं. उन्होंने कहा, “मैं कॉन्ट्रैक्ट्स पर भारतीय प्रतिनिधियों से बातचीत करता और पूरी डील सेट कर देता था. यह डील उनकी थी. वही डील फाइनल करते हैं. वही डील करते हैं. मैंने कहा आपको मोदी से कॉल करवाना होगा सब कुछ सेट है. आपको मोदी से प्रेसिडेंट को कॉल करवाना होगा. लेकिन वे ऐसा करने में असहज थे, इसलिए मोदी ने कॉल नहीं किया.”
लटनिक का यह बयान उस समय आया है, जबकि अमेरिका ने उस बिल को मंजूरी प्रदान कर दी है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वालों पर अमेरिका के प्रेसिडेंट 500 फीसदी तक टैरिफ लगा सकते हैं. इस समय भारतीय एक्सपोर्ट पर अमेरिका 50 फीसदी का टैरिफ वसूलता है.
अमेरिकी प्रतिनिधि लटनिक ने कहा कि भारत के सथ बातचीत सही समय पर शुरू हुई थी. लेकिन वे काम नहीं कर पाए और फिर दूसरे देशों से बातचीत होती रही. उन्होंने कहा कि हमने वियतनाम, इंडोनेशिया और अन्य देशों के साथ बातचीत किया और उन्हें राहत मिल गई. लटनिक के अनुसार भारतीय प्रतिनिधि यह सब देखकर उनके पास आए, और कहा कि आपने तो कहा था कि डील फाइनल हो गई है, तो भारत के साथ टैरिफ को फाइनल क्यों नहीं करते हैं. इसके जवाब में लटनिक ने कहा कि उस समय की बात अलग थी, और अब तो परिस्थिति बदल चुकी है, अब भारत को फिर से बातचीत करनी होगी.
उन्होंने कहा, “अगर आपको याद हो, तो मैंने पहली डील यूनाइटेड किंगडम के साथ की थी. उन्हें भी हमने जल्द ही डील करने को कहा था, क्योंकि कतार में और भी देश इंतजार कर रहे थे. अगर कोई और पहले आता है, तो जाहिर है डील उसके साथ ही होगी. आप तो जानते हैं कि प्रेसिडेंट ट्रंप सीढ़ी की तरह डील करते हैं. पहली सीढ़ी को सबसे अच्छी डील मिलती है. आपको सबसे अच्छी डील नहीं मिल सकती. पहले आदमी के जाने के बाद, सब कहते हैं, मुझे यूके वाली डील चाहिए. मुझे यूके वाली डील चाहिए. जवाब है, नहीं. वे पहले थे. उन्होंने मौका लिया. वे सबसे तेजी से आगे बढ़े.”
लटनिक ने कहा कि इंतजार करने पर नुकसान तो होता है, यूके ने सबसे पहले यह काम कर लिया, उन्हें भी यह जल्द करना था, वह समय पर आ गए, अब जो भी डील होगी, उस तरह की डील तो नहीं हो सकती है.
अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी लटनिक ने कहा, “तो सबने प्रेसिडेंट से पूछा, आपको क्या लगता है कि अगला कौन होगा? और अगर आप उस समय को देखें, तो उन्होंने कहा कि वह कई देशों के बारे में बात करते हैं, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कई बार भारत का नाम लिया. यह कोई बड़ा राज नहीं था. और हम भारत के बारे में बात कर रहे थे, और हमने भारत से कहा, आपके पास इसे पूरा करने के लिए तीन शुक्रवार हैं.”
अपने इंटरव्यू में लटनिक ने कहा कि डील करने के लिए उनके पास कई देश आ रहे थे. इसलिए जिसने तेजी से पहल की, उसे फायदा हुआ. उन्होंने कहा, “सीढ़ी ऊपर और दाईं ओर जाती है. और अब राष्ट्रपति इन सभी डील्स के दौरान मुझे अब तक का सबसे महान टेबल सेटर कहते थे. ठीक है? क्योंकि आपके पास पहले कभी कोई ऐसा नहीं था जो मेरे जितना सफल बिजनेसमैन हो, जो सिर्फ टेबल सेट करता हो, आप जानते हैं? तो क्योंकि मैं क्या करता था कि मैं कॉन्ट्रैक्ट्स पर बातचीत करता था और पूरी डील सेट करता था. लेकिन साफ कर दूं, यह उनकी डील है.”
कॉमर्स सेक्रेटरी ने कहा कि आपको पता है कि हमने सोचा था कि भारत के साथ डील फाइनल पहले ही हो जाएगी, हमने समय भी दिया, फाइनल भी कर दिया, पर अब तो डील ज्यादा रेट पर हुई. फिर भारत ने कहा कि हम तैयार हैं, उस समय की डील फाइनल कर दीजिए, पर मैंने कहा, तब आपने ट्रेन मिस कर दी, अब समय निकल चुका है.