अयोध्या:रामनगरी अयोध्या के रामायण विश्वविद्यालय में शुक्रवार को श्रीराम प्रतिमा अनावरण समारोह का आयोजन किया गया। इसमें शामिल होने के लिए राज्यपाल आनंदी बेन पटेल पहुंचीं। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की 35 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण न सिर्फ स्थापत्य का प्रतीक है बल्कि सांस्कृतिक चेतना का भी प्रतीक है। राज्यपाल ने कहा भगवान श्रीराम सांस्कृतिक केंद्र के केंद्र में हैं। श्रीराम ने यह संदेश दिया कि सत्ता सेवा का माध्यम है, शक्ति संयम से संचालित होती है और निर्णय लोकमंगल के लिए प्रेरित होना चाहिए। विकास की वास्तविक ऊंचाई मानव मूल्यों से ही प्राप्त होती है। श्रीराम का जीवन यह सीखाता है कि प्रभु श्रीराम हमारे आचरण, नीतियों में हो। वे राष्ट्र निर्माण के प्रत्येक आयाम में प्रतिबिंबित होते हैं। राज्यपाल आगे ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा आधुनिक शिक्षा एक दूसरे के पूरक हैं। शिक्षा ही अस्थाई परिवर्तन की आधारशिला है। महर्षि महेश योगी ध्यान को मानव जीवन के संपूर्ण संभावनाओं के विकास का माध्यम मानते थे। अयोध्या रामराज्य के आदर्श का शाश्वत प्रतीक है। महर्षि महेश योगी शाश्वत ज्ञान परंपरा के महान संवाहक थे।राज्यपाल ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रतिमा का अनावरण किया
महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय परिसर में शुक्रवार को धार्मिक और शैक्षणिक आस्था का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला, जब राज्यपाल ने 35 फीट ऊंची भगवान श्रीराम की भव्य प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया। राज्यपाल ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बटन दबाकर प्रतिमा का जैसे ही अनावरण किया पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। इस अवसर पर वैदिक छात्रों ने रामरक्षास्रोत का सामूहिक वाचन किया, जिसने श्रद्धा का चरम प्रदर्शित किया।
यह विश्वविद्यालय 500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार किया जा रहा है। इसे पूरी तरह हाईटेक स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय को स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म और अत्याधुनिक डिजिटल रिसर्च सुविधाओं से लैस किया गया है। इससे देश-विदेश के शोधार्थियों को रामायण, भारतीय दर्शन और संस्कृति पर गहन अध्ययन का अवसर मिलेगा।
श्रीराम की इतनी ऊंची प्रतिमा कहीं और नहीं
पूरे अयोध्या क्षेत्र में भगवान श्रीराम की इतनी ऊंची प्रतिमा कहीं और नहीं है। प्रशासनिक भवन के ऊपर स्थापित यह प्रतिमा विश्वविद्यालय की पहचान का प्रतीक बन गई है, जो परंपरा और आधुनिकता दोनों को दर्शाती है।
कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि यह विश्वविद्यालय भारतीय सोच और आधुनिक शिक्षा का संतुलित मॉडल है। यहां छात्र डिग्री नहीं लेंगे, बल्कि तकनीकी ज्ञान, शोध, जीवन मूल्यों के साथ आगे बढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा और टेक्नोलॉजी के माध्यम से वैश्विक स्तर तक पहुंचाना है। भविष्य में यहां अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, शोध परियोजनाएं और सांस्कृतिक संवाद आयोजित किए जाएंगे, जिससे रामकथा का वैश्विक विस्तार हो।