लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सभी गांवों को जल्द ही नल से शुद्ध पेयजल की सुविधा मिलने वाली है. जल जीवन मिशन के अन्तर्गत प्रदेश में 40 हजार से अधिक योजनाओं को निर्माण कराया जा रहा है, जो अंतिम चरण में है.
मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित मंत्री स्तरीय नीतिगत संवाद में उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने ये बातें बताईं.40 हजार से अधिक योजनाओं का कराया जा रहा निर्माण: इस दौरान जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बताया कि जल जीवन मिशन के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश में 40 हजार से अधिक योजनाओं को निर्माण कराया जा रहा है, जो लगभग पूर्ण होने की ओर अग्रसर हैं. इन योजनाओं के पूरा होते ही गांवों को नल से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू हो जाएगी.
मंत्री ने बताया कि बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के अधिकांश गांवों में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण परिवारों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है. इसके कारण क्षेत्र की महिलाओं के जीवन में अभूतपूर्व बदलाव आया है.
कार्यक्रम के दौरान जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बताया कि 15 अगस्त 2019 तक उत्तर प्रदेश में केवल 5 लाख 16 हजार ग्रामीण परिवारों को ही नल से जल उपलब्ध कराया गया था, जो प्रदेश के कुल ग्रामीण परिवारों का मात्र 1.93 प्रतिशत था.
आधिकतर योजनाएं बंद हो जाती थीं: मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बताया कि जल जीवन मिशन से पूर्व में निर्मित ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाओं को ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने के बाद योजनाओं का संचालन और अनुरक्षण ग्राम पंचायतों द्वारा ही किया जा रहा था. ऐसे में ग्राम पंचायतों के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन एवं तकनीकी दक्षता न होने के कारण योजनाओं पर बिजली बिल का भुगतान नहीं हो पा रहा था. साथ ही रखरखाव नहीं होने की वजह से अधिकतर योजनाएं बंद हो जाती थीं.
देव सिंह ने बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया कि निर्माण कार्य करने वाली एजेंसियों से 10 वर्षों तक संचालन एवं अनुरक्षण भी कराया जाए.
इसके साथ ही इस योजना के निर्माण की गुणवत्ता इत्यादि के संबंध में उनकी जिम्मेदारी सुनिश्चित भी की जा सकेगी. योजनाओं के संचालन एवं अनुरक्षण पर होने वाला व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किये जाने की व्यवस्था की गई है.
लागत में करीब 50 प्रतिशत की कमी आएगी: जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बताया कि प्रदेश में अधिकतर योजनाएं सौर ऊर्जा आधारित बनाई गई हैं. इससे योजनाओं का संचालन और अनुरक्षण की लागत में करीब 50 प्रतिशत की कमी आएगी. साथ ही स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा.
उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन की 80 प्रतिशत से अधिक योजनाएं सौर ऊर्जा पर आधारित हैं. इसके अलावा पेयजल की गुणवत्ता राज्य सरकार द्वारा लैब में कराई जा रही है. ग्रामीण स्तर पर जल की गुणवत्ता की जांच करने के लिए हर गांव में 5 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है.