नई दिल्ली: भारतीय रेलवे में ट्रेन टक्करों व सिग्नल उल्लंघन जैसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लगाया जा रहा स्वदेशी सुरक्षा सिस्टम ‘कवच 4.0’ अब तकनीकी रूप से और अधिक परिपक्व रूप में सामने आ रहा है. कवच बनाने वाली कंपनी मेधा सर्वो ड्राइव्स प्रा. लि. के मार्केटिंग इंजीनियर केशव यादव ने बातचीत में इस सिस्टम की कार्यप्रणाली व विशेषताओं पर विस्तार से जानकारी दी. उनके मुताबिक यह कवच सिर्फ एक उपकरण नहीं, बल्कि ट्रेन, ट्रैक व सिग्नल के बीच लगातार संवाद करने वाला इंटेलिजेंट सेफ्टी नेटवर्क है.
केशव यादव ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि कवच का मूल उद्देश्य ट्रेन मूवमेंट को ‘फेल-सेफ’ बनाना है, यानी यदि किसी भी स्तर पर मानव त्रुटि हो तो सिस्टम खुद हस्तक्षेप कर दुर्घटना को टाल दे. लोकोमोटिव में लगी ड्राइव मशीन इंटरफेस (डीएमआई) यूनिट के जरिए लोको पायलट को आगे आने वाले सिग्नल की स्थिति—रेड, येलो या ग्रीन—रियल टाइम में दिखाई देती रहती है. खास बात ये है कि कोहरा, बारिश या कम दृश्यता जैसी परिस्थितियों में भी सिग्नल की जानकारी डिजिटल रूप से मिलती रहेगी. इससे ट्रेनों का संचालन निर्धारित समय पर हो सकेगा.कवच 4.0 में सबसे अहम फीचर है SPAD प्रोटेक्शन (Signal Passing At Danger). यदि लोको पायलट किसी कारण रेड सिग्नल पार कर देता है, तो कवच तुरंत स्वतः ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक देता है. इसी तरह सिस्टम में ऐसा सॉफ्टवेयर लॉजिक डाला गया है कि दो ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी की लगातार मॉनिटर होती रहती है. आमने-सामने (हेड-ऑन), पीछे से (रियर-एंड) या साइड मूवमेंट—किसी भी स्थिति में संभावित टक्कर से पहले ट्रेन अपने आप ट्रेन रुक जाती है. कवच 4.0 का एक बड़ा पहलू ऑटोमैटिक स्पीड कंट्रोल है. हर सेक्शन की निर्धारित गति सीमा सिस्टम में फीड रहती है. यदि चालक स्पीड बढ़ाने की कोशिश करता है, तब भी ट्रेन तय सीमा से ऊपर नहीं जा सकती है. लूप लाइन, स्टेशन एरिया या सीमित गति वाले सेक्शन में प्रवेश करते ही कवच स्पीड को स्वतः नियंत्रित कर देता है.मानव आबादी वाले क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए इसमें लेवल क्रॉसिंग प्रोटेक्शन भी लगाया गया है. ये सिस्टम फाटक की स्थिति को डिटेक्ट कर सकता है और जरूरत पड़ने पर ट्रेन को रोक देता है. इसके साथ ही ऑटोमैटिक हॉर्न फीचर हॉर्न भी बजाता है और आसपास के लोगों को सतर्क करने में मदद करता है.कवच का यह संस्करण वन पॉइंट जीरो से विकसित होकर अब 4.0 तक पहुंचा है, जिसे अपडेटेड व अधिक एडवांस्ड माना जा रहा है. यह सिस्टम SIL-4 स्तर की उच्चतम अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा श्रेणी के अनुरूप डिजाइन किया गया है.
बता दें कि दिल्ली डिवीजन में तुगलकाबाद जंक्शन केबिन (दिल्ली) से पलवल सेक्शन पर इस सिस्टम का सफल ट्रायल और कमीशनिंग भी हुई है, जहां विभिन्न परिस्थितियों में इसकी कार्यक्षमता को परखा गया. रेलवे चरणबद्ध तरीके से इसे नेटवर्क में विस्तार दे रही है. कवच जैसे सिस्टम भविष्य में मानव त्रुटियों से होने वाली बड़ी रेल दुर्घटनाओं को लगभग समाप्त करने में मदद करेगा. कवच 4.0 भारतीय रेलवे के लिए एक ऐसी तकनीकी ढाल बनकर उभर रहा है, जो ट्रेन संचालन को मानव निर्भरता से आगे बढ़ाकर डिजिटल सुरक्षा के दायरे में ले जा रहा है.