लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने गुरुवार को लोक भवन में आयोजित राज्य ऋण संगोष्ठी एवं राज्य फोकस पेपर 2026-27 का उद्घाटन किया. इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने नाबार्ड के कार्यों की प्रशंसा की.
नाबार्ड ने मंच पर उन एफपीओ को, जिन्होंने अच्छा कार्य किया उन्हें सीएम योगी के हाथों से सम्मानित करवाया. उन पैक्स को उन कोऑपरेटिव बैंक्स को, जिन्होंने अपना अच्छा व्यवसाय किया. उन सभी को यहां पर सम्मानित करवाया है, यह एक अच्छी पहल है.
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सरकार की नीयत साफ है. हम पूरे देश के परिप्रेक्ष्य में सोचते हैं. आज भारत, दुनिया का सबसे तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपने को स्थापित कर चुका है. पहली बार देश के अंदर आजादी के बाद कोऑपरेटिव एक मंत्रालय के रूप में कार्य कर रहा है. एफपीओ को हर एक स्तर पर प्रोत्साहन मिल रहा है.
उन्होंने कहाकि इस बार के यूनियन बजट में लखपति दीदी को अब उनके ग्रामीण क्षेत्र में जो भी प्रोडक्ट उनके द्वारा तैयार किया जाता है. उसको मार्केट से लिंक करने के लिए शी-मार्ट की स्थापना करने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषित किया है. अनेक प्रोत्साहन इस दिशा में प्रारंभ हुए हैं और इसका परिणाम है कि थोड़ा सा मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, तो यह सभी सेक्टर तेजी के साथ आगे बढ़ रहे हैं.योगी ने कहाकि इसी का परिणाम है कि भारत, दुनिया के अंदर तीसरी अर्थव्यवस्था के रूप में अपने को स्थापित करने में सफल हुआ है. सीएम योगी ने कहा कि यही प्रोग्रेस की स्थिति देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की है. यह प्रकृति और परमात्मा की विशेष अनुकंपा है कि जो नियम देश के अंदर दुनिया के अंदर भारत पर लागू होते हैं, वहीं भारत में यूपी पर लागू होती है. यूपी की एकदम वही परिस्थितियां हैं.समाजवादी पार्टी की तत्कालीन सरकार पर इशारों में हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने कहा कि 2017 के पहले यूपी की स्थिति क्या थी. कहां थे हम लोग? न विकास था, न ही रोजगार था. प्रदेश के अंदर कोऑपरेटिव सेक्टर में सबसे बड़ा माफिया हावी था. कोऑपरेटिव सेक्टर चौपट था. 16 जिला सहकारी बैंक रिजर्व बैंक ने उन्हें डिफाल्टर घोषित कर दिया था और बंदी का आदेश कर दिया था. आज 16 में से 15 प्रॉफिट में आ गए हैं. 16वें को भी प्रॉफिट में लाया जा रहा है. हमने उनके टर्नओवर को बढ़ाया है. उनके क्रेडिट की सीमा को बढ़ाया है.मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद वितरण के कार्य के लिए सहकारिता विभाग में थोड़ा मैनपॉवर की शॉर्टेज की है, लेकिन उसको पूरा भर देते तो देश के अंदर सबसे अच्छा फर्टिलाइजर वितरण का कार्य उत्तर प्रदेश के अंदर हुआ होता. कृषि और सहकारिता मिलकर उस कार्य को कैसे आगे बढ़ाएं. इसके लिए थोड़ा प्रयास करें. सरकार की नीयत साफ हो, तो उसके परिणाम भी स्पष्ट दिखाई देते हैं.
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एमएसएमई की क्या स्थिति थी. यूपी के अंदर से लोग पलायन कर चुके थे. हस्तशिल्पी निराश था. कारीगर हताश थे. एमएसएमई सेक्टर बंदी के कगार पर था. सरकार ने उसको थोड़ा सा प्रोत्साहन दिया. वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) के रूप में हमने उसे प्रोत्साहित किया. आज यूपी देश का पहला राज्य है जो अपने यहां एमएसएमई सेक्टर को ₹500000 की सुरक्षा बीमा कवर देता है. 96 लाख एमएसएमई यूनिट यूपी के अंदर कार्य कर रहे हैं. तीन करोड़ परिवार इसी सेक्टर पर निर्भर है, क्योंकि यह तब संभव हो पाया, जब सरकार ने उसकी ब्रांडिंग की. एमएसएमई को टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ा. उसे मार्केट से जोड़ा. पैकेजिंग के साथ जोड़ा. डिजाइनिंग के साथ जोड़ा. आज हम सबके सामने ये परिणाम है. सीएम योगी आदित्य नाथ ने कहा कि पूरे देश के अंदर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट एक ब्रांड बन चुका है.
उन्होंने कहा कि एफपीओ की क्या ताकत है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हम लोगों ने पिछले चार-पांच वर्षों से ग्रेटर नोएडा में यूपी ट्रेड शो का आयोजन करना प्रारंभ किया है और इसमें देश में यूपी के एफपीओ को सराहा गया था. हर एक सेक्टर में कुछ न कुछ नया हुआ है. चाहे महिला स्वयं सेवी समूह हो, एफपीओ हो एमएसएमई सेक्टर हो या कोऑपरेटिव का सेक्टर हो हर सेक्टर में संभावनाओं को नई उड़ान मिली है.
उन्होंने कहा कि साल 2026-27 के लिए हमारा तीन लाख करोड रुपए का जो कृषि ऋण है, ये पहले की तुलना में 13 फीसद बढ़ा है. हम लोग इस बात को मानते हैं कि टेक्नोलॉजी इरिगेशन स्टोरेज आफ प्रोसेसिंग इस दिशा में हमें नए निवेश को आगे बढ़ना होगा. हमारा किसान मेहनत कर सकता है, लेकिन जब तक वैल्यू एडिशन के साथ हम उसे नहीं जोड़ेंगे, तब तक वह उसके लिए लाभकारी नहीं होगा. लागत का डेढ़ गुना एमएसपी के माध्यम से मिले. उसको ज्यादा मुनाफा कमाना है तो उसे वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ना होगा. इसमें एफपीओ की अहम भूमिका होगी.
उन्होंने कहाकि 2017 के पहले यूपी के अंदर यही बीमारी थी. एक तो शासन की योजना का लाभ सीधे किसान को नहीं मिलता था. इसका लाभ बिचौलिया लेते थे. आज हम सीधे पैसा किसान के खाते में डाल रहे हैं. किसान को उपलब्ध करवा रहे हैं, इसलिए इस दिशा में हम लोगों को नए प्रयास को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है. हमें एक्सपोर्ट की दिशा में आगे बढ़ना होगा. आज देश के अंदर यूपी ने खाद्यान्न लक्ष्य को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया है. भारत की आबादी का 17 फीसदी यूपी में निवास करता है, लेकिन कृषि योग्य भूमि सिर्फ 11 फीसदी है फिर भी खाद्यान्न का उत्पादन उत्तर प्रदेश में ही काफी होता है. हम देश में एथेनॉल के उत्पादन में नंबर वन हैं. हम लगातार और भी ज्यादा प्रयास कर रहे हैं.
राज्य ऋण संगोष्ठी पर योगी आदित्यनाथ ने कही ये बात
उधर राज्य ऋण संगोष्ठी पर योगी आदित्यनाथ ने कहाकि गन्ना किसानों की प्रदेश के अंदर क्या स्थिति थी..वर्ष 2000 से 2017 के बीच में गन्ना किसानों को कुल ₹2,14,000 करोड़ का भुगतान हुआ है. यहा 17 वर्षों में ₹2,14,000 करोड़ का भुगतान हुआ है.
सीएम ने कहाकि इतना ही नहीं 2017 से लेकर 2025 के बीच में, इन 8-9 वर्षों में हम लोगों ने ₹3,00,000 करोड़ अन्नदाता किसानों के खाते में गन्ना किसानों के खाते में सीधे पैसा दिया है. 17 वर्ष में जितना नहीं हुआ, उसके आधे वर्षों में उससे भी हम लोगों ने ₹86,000 करोड़ अधिक किसान के खाते में भेजे हैं. आज एक क्विंटल का हम ₹400 अन्नदाता किसान को दे रहे हैं. इतना गन्ना किसान को दे रहे हैं. उन्होंने कहाकि ये सरकार के द्वारा उठाए गए कदम हैं और इसके माध्यम से लाभान्वित होने वाले किसानों का परिणाम है.
आज यूपी इथेनॉल उत्पादन में देश के अंदर नंबर एक पर है. गन्ना उत्पादन में देश का कुल गन्ना उत्पादन का 55 फीसदी केवल यूपी कर रहा है, चीनी उत्पादन में भी देश के अंदर यूपी नंबर एक पर है..
आज यूपी इथेनॉल उत्पादन में देश के अंदर नंबर एक पर है. गन्ना उत्पादन में देश का कुल गन्ना उत्पादन का 55 फीसदी केवल यूपी कर रहा है, चीनी उत्पादन में भी देश के अंदर यूपी नंबर एक पर है..