शिक्षकों-शिक्षामित्रों को लेकर सीएम योगी का मास्टरस्ट्रोक? चुनाव में दिख सकता है असर

लखनऊ:मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस वर्ष के अंत में प्रस्तावित खंड-शिक्षक विधायक (एमएलसी), पंचायत चुनाव और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर पिच तैयार कर दी है। सीएम ने इन चुनावों से पहले लाखों शिक्षकों व उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा के बाद शिक्षामित्रों, अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने की घोषणा कर मजबूत पारी की शुरुआत की है।सीएम ने जनवरी के अंत में बेसिक-माध्यमिक के 15 लाख शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों व उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की। इसकी वे लंबे समय से मांग कर रहे थे। साथ ही 1.68 लाख शिक्षामित्रों व अनुदेशकों का नौ साल का सूखा भी समाप्त किया है। इनके मानदेय में 80 फीसदी के भारी इजाफा की घोषणा को 2027 के चुनावी चौसर के लिए मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है।

खंड शिक्षक व खंड स्नातक (एमएलसी) की 11 सीटों पर इसी साल दिसंबर में चुनाव होना है। बेसिक-माध्यमिक के राजकीय और वित्तविहीन स्नातक वाले काफी शिक्षक, शिक्षामित्र व अनुदेशक खंड-शिक्षक के चुनाव में मतदाता हैं। खंड स्नातक में लगभग एक लाख शिक्षामित्र व लगभग 10 हजार अनुदेशक मतदाता हैं। इतना ही नहीं पंचायत चुनाव में भी यह शिक्षक गांव-गांव तक माहौल बनाने का काम करते हैं। ऐसे में कई वर्षों से लंबित मांगें पूरी होना सरकार के पक्ष में जा सकता है। 

69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों की बढ़ी उम्मीद

एक के बाद एक शिक्षकों व शिक्षामित्रों की वर्षों से लंबित मांग पूरी होने के साथ ही 69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों में भी उम्मीद जगी है। हाईकोर्ट से जीतने के बाद सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि सरकार उनके मामले में भी जल्द सकारात्मक निर्णय लेगी।

हम सरकार के साथ खड़े रहेंगे
सरकार ने शिक्षामित्रों व अनुदेशकों की कई साल से लंबित मांगों को पूरा किया है। कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलने व मानदेय बढ़ने से हमारे परिवार को बड़ी राहत मिलेगी। हम सरकार के साथ खड़े रहेंगे।- शिव कुमार शुक्ला, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ

सरकार की छवि बनती है इससे 
शिक्षक और शिक्षामित्र गांव-गांव से सीधे जुड़े होते हैं। ये सरकार की छवि को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि सरकार चुनाव के समय इनमें किसी तरह का असंतोष नहीं देखना चाहती है। ऐसे में यह निर्णय सरकार के पक्ष में जाएगा।– प्रो. सुशील पांडेय, राजनीतिक विशेषज्ञ, बीबीएयू अमेठी कैंपस