गोरखपुर: नगर निगम शहर के प्रदूषण को कम करने में जुटा है, शहर से हर माह निकलने वाले 22 टन कचरे के निस्तारण के लिए सहजनवा के सुथनी में प्लांट लगाने की प्रकिया शुरू हो गई है. जहां प्रतिदिन छह टन कचरे का निस्तारण होगा. निगम अभी तक, कचरे को कबाड़ियों को मुफ्त में दे देता था, लेकिन अब नगर निगम आपने 80 वार्डों से इकठ्ठा होने वाले कबाड़ से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा.
नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने इस संबंध में बताया कि वेस्ट प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार ने वर्ष 2011 में ही नीति बनाई थी. इसके बाद से कचरा प्रबंधन नियम 2016 और 17 लागू किया गया. अप्रैल 2023 से लागू नियमों में 134 इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों को चिन्हित कर, उनके उपयोग की औसत अवधि निर्धारित की गई है. जिसमें फ्रिज की उम्र अधिकतम 10 वर्ष, वाशिंग मशीन की नौ वर्ष, पंखे की 10 वर्ष, रेडियो सेट की 8 वर्ष, टैबलेट और आईपैड की 5 वर्ष और इलेक्ट्रॉनिक खिलौने की दो वर्ष है.
इसके बावजूद वास्तविकता यह है कि शहर के अधिकांश घरों में पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लंबे समय से पड़े रहते हैं, जो बाद में ई-वेस्ट के रूप में जमा हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि गोरखपुर में प्रदूषण नियंत्रण विभाग से नगर निगम को इस दिशा मे काम करने के लिए कई बार निर्देश मिले है, लेकिन, जब तक कोई प्रभावी योजना नहीं बन जाता, निगम कुछ करने की स्थिति में नहीं था. हाँ यह जरूर था कि कचरा गाड़ी से इकठ्ठा होने वाला कबाड़ बिक जाता था, जिससे कुछ पैसे निगम के पास आ जाते थे.
उन्होंने कहा कि आम लोगों में भी ई-वेस्ट के प्रति जागरूकता की कमी है. निगम के पास ई-वेस्ट के निस्तारण के लिए अभी तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी. लेकिन अब निगम ई वेस्ट के निस्तारण की दिशा में आत्मनिर्भर बनने जा रहा है.
उन्होंने बताया कि सुथनी में लगभग चार एकड़ भूमि में ई-वेस्ट प्लांट स्थापित किया जा रहा है. गोरखपुर शहर को हर प्रकार के प्रदूषण मुक्त करने के लिए, नगर निगम जो अभियान चला रहा है, उसी क्रम में ई वेस्ट का निस्तारण भी एक प्रमुख पहल है. जिन कबाड़ियों को यह वेस्ट दिया जाता था, वह, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, मथुरा जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र में इसे बेचकर मुनाफा कमाते थे.
उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों के अनुसार, ई-वेस्ट केवल कचरा नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरण खतरा है. चिकित्सकों के अनुसार, इस कचरे में पारा,आर्सेनिक और कैडमियम जैसे खतरनाक रसायन पाए जाते हैं. यह तत्व भूजल को दूषित करने के साथ-साथ स्वसन रोग, फेफड़ों के कैंसर और त्वचा संबंधी बीमारियों का कारण बन सकते हैं.
उन्होंने बताया कि यह विषैला पदार्थ गर्भवती महिलाओं और बच्चों के साथ किशोर के लिए भी अधिक खतरनाक होते हैं, क्योंकि वह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के विकास को प्रभावित करते हैं. इसके अलावा ई-वेस्ट मस्तिष्क, हृदय, लीवर और किडनी पर भी बुरा असर डालते हैं.