वाराणसी: काशी में आयोजित ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक के साथ शुक्रवार को कार्यक्रम संपन्न हुआ. बैठक का शुभारंभ भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. अरविंद कुमार ने किया. जहां उन्होंने पहले दिन आरंभ हुई सारगर्भित चर्चाओं को आगे बढ़ाते हुए विचार-विमर्श जारी रखा. इस दौरान सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ करने और सांस्कृतिक क्षेत्र में साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के प्रति ब्रिक्स सदस्य देशों की सामूहिक चर्चा की.
बता दें कि पहले परिचर्चा सत्र सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक संपदा की वापसी हेतु संस्थागत रणनीतियां विषय पर रखी गई. जहां सभी प्रतिनिधियों ने सांस्कृतिक संपदा की वापसी से जुड़ी चुनौतियों के समाधान हेतु सहयोग को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई और विरासत संरक्षण को साझा उत्तरदायित्व के रूप में बताया.
चर्चाओं में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि सांस्कृतिक विरासत पहचान को बेहतर करने, सामुदायिक अधिकारों की रक्षा करने और अंतर-सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
सांझा विरासत के संरक्षण पर दिया जोर: इसके उपरांत आयोजित परिचर्चा सत्र साझा विरासत के संरक्षण हेतु सहयोगात्मक दृष्टिकोण: यूनेस्को विश्व धरोहर अभिसमय, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत तथा मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कार्यक्रम के अंतर्गत संयुक्त नामांकन का संचालन डॉ. अरविंद कुमार ने किया. इस सत्र में ब्रिक्स देशों के बीच संयुक्त नामांकन की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया. प्रतिनिधियों ने साझा मूर्त एवं अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, मान्यता और पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण को बढ़ावा देने के प्रभावी माध्यम के रूप में संयुक्त नामांकन की संभावनाओं पर चर्चा की. साथ ही, ब्रिक्स ढांचे के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और सुदृढ़ करने पर भी बल दिया गया.

