BSP के कोर वोटबैंक पर BJP की नजर, बिगड़ेगा मायावती का समीकरण!

लखनऊ: लोकसभा चुनाव से पहले दलितों को जोड़ने के लिए बीजेपी हर बस्ती तक पहुंचेगी। इसके लिए प्रदेश में दो दिन का विशेष दलित बस्ती संपर्क अभियान शुरू होने जा रहा है। इसके लिए पार्टी ने मंत्रियों, विधायकों, सांसदों, मेयर और जिला पंचायत अध्यक्षों को दलित बस्तियों में भेजकर उन्हें भाजपा के बारे में समझाने की रणनीति बनाई है। यह अभियान 23 और 24 फरवरी को चलाया जाएगा। बता दें की 23 को संत गाडगे और 24 को रविदास जयंती समारोह है।

दलित युवाओं पर बीजेपी की नज़र

दरअसल, बीजेपी से जुड़े सूत्रों की मानें तो पार्टी की ओर से दलितों को जोड़ने के लिए बड़ी योजना तैयारी की गई है। इसमें विधानसभा क्षेत्रों में भीम सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। विशेष रूप से जाटव बस्तियों में सम्मेलन का आयोजन कर समाज के युवाओं से संवाद किया जाएगा। युवाओं से बातचीत कर पता लगाएंगे कि वे पार्टी से क्या चाहते हैं, सरकार को उनके लिए क्या करना चाहिए। इसके अलावा दलितों के क्षेत्रीय और फिर जिलों में सम्मेलन होंगे। इन सम्मेलनों में दलितों के लिए बीजेपी सरकार के किए गए काम के बारे में बताया जाएगा। 23 और 24 फरवरी को पार्टी के मंत्री, सांसद, विधायक और पदाधिकारी दलित बस्तियों में होंगे और दलितों से संवाद करेंगे।

क्यों है दलित वोटर पर नज़र?

बीजेपी की सीधी नजर बीएसपी के कोर दलित वोट पर है। बीजेपी का मानना है कि बीते चुनावों में बसपा की मौजूदगी के बाद भी कभी उसके कोर वोटर रहे दलित खिसकते नजर आ रहे हैं। बसपा का जनाधार 2012 से लगातार घट रहा है। लोकसभा चुनाव-2019 में सपा के साथ गठबंधन करके बीएसपी ने 10 सीटें हासिल की थीं। उसके बाद 2022 विधानसभा चुनाव बसपा ने अकेले लड़ा। इसमें बीएसपी का वोट प्रतिशत 13 से नीचे आ गया और महज एक सीट पर पार्टी सिमट गई। नगर निकाय चुनाव में भी मेयर की एक भी सीट नहीं जीत सकी और वोट प्रतिशत 12 रहा। बीजेपी अब इसी जनाधार के बीच घुसपैठ करने की तैयारी में है। देखना यह होगा की बीजेपी की रह रणनीति आगामी लोकसभा चुनाव में कितनी कारगार साबित होगी।