अमित शाह से मिलीं धनंजय सिंह की पत्‍नी श्रीकला, भाजपा में शामिल होने के सवाल पर कही ये बात

जौनपुर: जौनपुर लोकसभा सीट पर जब बहुजन समाज पार्टी की ओर से श्रीकला सिंह चुनावी मैदान में उतरीं तो भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों में खलबली मच गई। पत्नी के बहाने चुनाव में जोर आजमाइश करने उतरे पूर्व सांसद धनंजय सिंह बीजेपी की राह में अवरोध बनकर उभरे थे। हालांकि, अब भाजपा को समर्थन देने के बाद बदले हालात में केवल जौनपुर ही नहीं बल्कि आसपास की सीटों पर बीजेपी के लिए लड़ाई पहले से थोड़ी आसान हो गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 400 पार के लक्ष्य में क्षत्रिय मतों में बिखराव बड़ी बाधा बन सकती थी, लेकिन धनंजय सिंह के भाजपा सरकार की तारीफ करने व पार्टी को समर्थन देने के कदम से जहां बीजेपी प्रत्याशी कृपाशंकर सिंह की राह आसान हो गई है। वहीं, मछलीशहर सीट पर भाजपा प्रत्याशी बीपी सरोज को भी बड़ी राहत मिलेगी। सियासी जानकार बताते हैं कि श्रीकला अगर बीएसपी प्रत्याशी के रूप में मैदान में रहतीं तो इसका असर जौनपुर के साथ ही आसपास के अन्य सीटों पर हो सकता था। जौनपुर लोकसभा सीट पर जातीय समीकरण बता रहे हैं कि यहां इस बार यहां कांटे की टक्कर होगी।

शाह से मुलाकात पर श्रीकला का बयान

बुधवार (15 मई) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की श्रीकला सिंह की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इस संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि दो दिन पहले उनकी गृह मंत्री शाह से नई दिल्ली में मुलाकात हुई है। इस दौरान जौनपुर की राजनीति के संबंध में भी चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान मुझे उनका आशीर्वाद प्राप्त हुआ। वहीं, भाजपा में शामिल होने के संबंध में उन्होंने हंसते हुए कहा कि जो भी अपडेट होगा, उससे अवगत करा दूंगी।

मुस्लिम मतदाताओं को साधने में जुटी सपा  

सपा ने जहां बाबू सिंह कुशवाहा को मैदान में उतारकर डेढ़ लाख से अधिक मौर्य मतदाताओं की साधने का प्रयास किया है तो वहीं, बसपा ने श्रीकला सिंह का टिकट काटकर अपने सिटिंग सांसद श्याम सिंह यादव को एक बार फिर मैदान में उतारा है। इससे ढाई लाख के करीब यादव मतदाताओं को रिझाने का प्रयास किया गया है। बदली परिस्थितियों में अब सपा यहां मुस्लिम मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में जुटी है।

अनुमान के मुताबिक, यहां अनुसूचित जाति व यादव मतदाताओं की संख्या ढाई लाख के आसपास तो मौर्य मतदाताओं की तादाद भी डेढ़ लाख के आसपास है। अल्पसंख्यक व क्षत्रिय मतदाताओं की भी संख्या डेढ़-डेढ़ लाख के करीब तो ब्राह्मण मतदाता भी एक लाख साठ-सत्तर हजार हैं। अब देखना होगा कि कौन किसके वोट बैंक में कितनी सेंध लगा पाता है?