फतेहपुर: गायत्री परिवार ने सनातन धर्म को मजबूत करने के और उसकी प्रतिष्ठा को पुर्नस्थापित करने के लिए पंच कुण्डीय यज्ञ किया। एएस इंटर कॉलेज में सुबह ढाई घंटे चले यज्ञ में गायत्री महामंत्र की आहुति दी गई। इस यज्ञ को करवाने में गायत्री परिवार के आचार्य मिथलेश सविता की बड़ी भूमिका रही। उनके साथ यहां पर अन्य आचार्य भी मौजूद रहे।
गौरतलब है कि हिंदुत्व की भावना को मजबूत करने के लिए विश्व हिन्दू परिषद और बजरंगदल ने शोभा यात्रा निकाली थी। इसी क्रम में गायत्री परिवार की ओर से दिव्य कार्यक्रम किया गया था।

ढाई घंटे तक लगातार किया गया हवन
गायत्री परिवार के आचार्य मिथलेश सविता ने बताया कि शौर्य यात्रा के क्रम में अखिल भारतीय विश्व गायत्री परिवार फतेहपुर के कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया है। सभी ने निष्ठा के साथ अपना योगदान दिया है। प्रात: सात बजे से लेकर साढ़े नौ बजे तक ढाई घण्टे लगातार हवन किया गया। विश्व कल्याण और सनातन धर्म को आगे ले जाने के लिए पंच कुण्डीय यज्ञ किया गया। साथ ही यज्ञ के माध्यम से दिव्य वातावरण के निर्माण के लिए भी माहौल बनाया गया।
उन्होंने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद के साथ गायत्री परिवार कदम से कदम मिलकर चल रहा है। गायत्री परिवार का कार्य सनातन धर्म के परम्पराओं को पुन: स्थापित करना है। गायत्री परिवार सनातन में व्याप्त सभी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने का पक्षधर है। उसी दिशा में कार्य कर रहा है।

विहिप के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा गायत्री परिवार
आचार्य पंडित श्रीराम शर्मा ने कहा कि हम ऐसे पुरोहित पैदा करेंगे, जो राष्ट्र और देश के शौर्य को जाग्रत करेंगे। इसी को दर्शाते हुए हमारे गायत्री परिवार के मंच में सर्व समाज के लोग प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनमें गायत्री परिवार के आचार्य राजाराम प्रजापति, आचार्य मिथलेश सविता, आचार्य वासदेव मौर्य, आचार्य कमलेश, आचार्य मलय प्रकाश, आचार्य रामबिहारी लाल गुप्त, आचार्य सतीश शिवहरे, राम नरायण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हमारे स्वाभिमान को हजारों साल कुचला गया है, हम उसे फिर से स्थापित करने का कार्य करेंगे। मुझे यह बताते हुए बड़ी प्रसन्नता हो रही है कि विश्व हिंदू परिषद के साथ गायत्री परिवार कंधे से कंधा और कदम से कदम मिला कर चल रहा है और हमेशा चलता रहेगा।
यज्ञ में इन आचार्यों ने दी आहुति
पंच कुण्डीय यज्ञ में आहुति देने वालों में आचार्य मिथलेश सविता के साथ ही कई अन्य गायत्री परिवार के कई आचार्यों की बड़ी भूमिका रही। इनमें आचार्य राजाराम प्रजापति, आचार्य वासदेव मौर्य, आचार्य कमलेश, आचार्य मलय प्रकाश, आचार्य रामबिहारी लाल गुप्त, आचार्य सतीश शिवहरे, राम नरायण शामिल रहे। सभी ने विश्व कल्याण और शौर्य जागरण के लिए महामंत्र गायत्री मंत्र की अग्निकुण्ड में आहुति दी।