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‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक से स्वच्छता और पर्यावरण तक की चर्चा की

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र ने आज सितंबर के आखिरी रविवार को अपने चर्चित रेडियो कार्यक्रम में मन की बात की. इस दौरान उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, स्वच्छता, पर्यावरण समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा की.

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पीएम मोदी ने कहा, ‘मन की बात’ के इस सितंबर एडिशन में मुझे एक बार फिर आपसे जुड़ने का मौका मिला है. मैं देश के सभी लोगों का स्वागत करता हूं. ‘मन की बात’ में हम अपने देशवासियों की अच्छी कोशिशों को एक मंच देते हैं. हम देश की कामयाबियों के बारे में बात करते हैं.

भारत की ऐसी ही एक बड़ी ऐतिहासिक कामयाबी एक दिन में 10 साल पूरे करने वाली है. यह कामयाबी है सर्जिकल स्ट्राइक, दस साल पहले, 28-29 सितंबर 2016 को, भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी. दुनिया यह देखकर हैरान रह गई थी कि कैसे हमारे बहादुर सैनिकों ने लाइन ऑफ़ कंट्रोल (LoC) पार करके आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की.’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘आतंकवादी हमलों ने भारत को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाया है. एक समय था जब भारत में सीरियल ब्लास्ट आम बात थी. इसी सितंबर महीने में 13 सितंबर 2008 को दिल्ली में हुए सीरियल ब्लास्ट में कई बेगुनाह नागरिक मारे गए थे. इसके कुछ ही हफ्तों बाद मुंबई में 26/11 जैसा बड़ा हमला हुआ.

दोस्तों, पहले भी हर आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाती थी, लेकिन उस पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता था. लोग समय बीतने का इंतजार करते थे. अब आज का भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी के साथ आगे बढ़ रहा है, और हम इसके नतीजे भी देख रहे हैं.’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘मेरे प्यारे देशवासियों इन दिनों देश की एक बहुत बड़ी तस्वीर बन रही है. इस तस्वीर में आप भी हैं, आपका परिवार भी है, और आपके पड़ोसी भी हैं. मैं भारत के सेंसस की बात कर रहा हूं. देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसका पहला फेज लगभग पूरा हो चुका है.

32 करोड़ से ज़्यादा परिवारों की जानकारी पहले ही रिकॉर्ड हो चुकी है. इन दिनों यह काम लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के मुश्किल और बर्फीले इलाकों में भी चल रहा है. वहां से कई प्रेरणा देने वाले अनुभव हमारे सामने आए हैं. उत्तराखंड में सेंसस की शुरुआत चमोली के माना गांव से हुई. माना को देश का पहला गांव कहा जाता है. माना में यह प्रोसेस सबसे पहले 83 साल की पूर्णिमा रावत के साथ शुरू हुआ. उत्तरकाशी के बागोरी गांव में होमस्टे चलाने वाले हरदेव सिंह राणा ने डिजिटल माध्यम से खुद अपनी जानकारी डाली.’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आज 27 सितंबर की यह तारीख एक खास वजह से और भी खास हो गई है. आज एक ऐसे महान व्यक्तित्व की 100वीं जयंती है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन संस्कृति, समाज और देश को समर्पित कर दिया. मैं विश्व हिंदू परिषद के पूर्व इंटरनेशनल वर्किंग प्रेसिडेंट, आदरणीय स्वर्गीय अशोक सिंघल की बात कर रहा हूं. उनका जन्म आज ही के दिन 1926 में आगरा में हुआ था

समाज में रहते हुए उन्होंने एक तपस्वी जैसा जीवन जिया. उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन को जो दिशा और ऊर्जा दी, उसी वजह से आज हम अयोध्या में भव्य मंदिर देख रहे हैं. मैं बहुत खुशकिस्मत रहा हूं कि मैंने न सिर्फ उनके जीवन को करीब से देखा, बल्कि इस मिशन में उनके साथ जुड़ने का मौका भी मिला.’

अपने इस कार्यक्रम में आगे कहा, ‘हमने इस साल की शुरुआत स्वाभिमान के एक बड़े त्योहार से की. यह त्योहार था ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’. एक हजार साल पहले, 1026 में महमूद गजनी ने पहली बार सोमनाथ मंदिर को नष्ट किया था लेकिन जो लोग सोमनाथ को नष्ट करके भारत की पहचान मिटाने आए थे, उनका आज कोई वजूद नहीं है.

सोमनाथ मंदिर अपनी पूरी शान के साथ विशाल समुद्र के किनारे खड़ा है. भारत को अमरता का आशीर्वाद दे रहा है. इसीलिए हमने इस साल ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ को बड़े गर्व के साथ मनाया. दोस्तों, एक खास वजह भी है कि मैं आज ‘मन की बात’ में इस पर फिर से बात कर रहा हूँ.

1026 में जब गजनी ने सोमनाथ को नष्ट किया था, उसी साल गुजरात के मोढेरा के मशहूर सूर्य मंदिर पर भी हमला करके उसे तोड़ दिया गया था. इसका मतलब यह भी है कि इस साल मोढेरा मंदिर के विनाश के एक हजार साल पूरे हो रहे हैं. हालाँकि, उस समय यह मंदिर सिर्फ एक साल पहले बना था. साल पहले, राजा भीमदेव ने 1025 में यह मंदिर बनवाया था.’

उन्होंने कहा,’दोस्तों, अतीत से हमारा नाता आज भी कायम है. इसके पीछे उन लोगों का समर्पण और कड़ी मेहनत है जो इस रिश्ते को और भी गहरा बना रहे हैं. ऐसा ही एक अनोखा प्रयास तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के मनाप्पराई में चल रहा है. इस विषय पर उन्होंने एक क्षेत्रीय दौरे की योजना बनाई, इस दौरे के दौरान उन्हें विभिन्न स्थानों पर कई मूर्तियाँ और प्राचीन मंदिर मिले.’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जब हम पर्यावरण की रक्षा करते हैं, तो हम सिर्फ पेड़-पौधों और जंगली जानवरों की ही रक्षा नहीं कर रहे होते. हम जीवन को बनाए रखने वाले पूरे इकोसिस्टम को भी मजबूत कर रहे होते हैं. देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रही कुछ कोशिशें इस भावना को खूबसूरती से सामने ला रही हैं. दोस्तों, असम में सोनाई रूपाई वन्यजीव अभयारण्य है.

एक समय था जब यह इलाका हाथियों का घर था लेकिन धीरे-धीरे जंगल की जमीन पर इंसानों का कब्ज़ा बढ़ता गया, जिसके नतीजे में हाथी इस इलाके से दूर चले गए. तीन साल पहले इस जमीन को कब्जे से मुक्त कराया गया, और अब, हम शानदार नतीजे देख रहे हैं. हाथी एक बार फिर इस जंगल में लौट आए हैं. हाथियों के झुंड एक बार फिर उस इलाके में देखे जा रहे हैं जहाँ वे सालों से एक्टिव नहीं थे.’