श्रीनगर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लद्दाख में कई प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और लोकार्पण किया, जिसमें लेह में एयरपोर्ट टर्मिनल भी शामिल है. कुल 3350 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स में लेह में पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग कुशोक बकुला रिम्पोची एयरपोर्ट शामिल है. इसके अलावा प्रोजेक्ट्स में स्ट्रेटेजिक रोड कनेक्टिविटी, हाइड्रोपावर, हेरिटेज कंजर्वेशन और वॉटर सिक्योरिटी शामिल हैं.
पीएम ने अपने वर्चुअल संबोधन में कहा, ‘आज लद्दाख की तरक्की और विकास में एक और चैप्टर जुड़ गया है. मुझे टेक्नोलॉजी के जरिए इस मौके का हिस्सा बनकर खुशी हो रही है. आज लद्दाख में कई जरूरी विकास प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन हुआ है. इन प्रोजेक्ट्स से कई लोगों का आना-जाना आसान होगा, कुछ इलाकों में बिजली की सुविधा बेहतर होगी, पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और हमारी पुरानी विरासत के संरक्षण को नई ताकत मिलेगी.’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैं इन प्रोजेक्ट्स के लिए लद्दाख के सभी लोगों को बधाई देता हूं. मैं इन प्रोजेक्ट्स में शामिल सभी इंजीनियरों, मजदूरों और स्थानीय साथियों को भी बधाई देता हूं. मैं खास तौर पर बीआरओ के हमारे साथियों की तारीफ करता हूं.’
640 करोड़ रुपये से बना लेह एयरपोर्ट 23,800 स्क्वायर मीटर में फैला है
640 करोड़ रुपये की लागत से बना लेह एयरपोर्ट 23,800 स्क्वायर मीटर में फैला है और उम्मीद है कि इससे हर साल 35 लाख पैसेंजर आ-जा सकेंगे. पीएम ने याद दिलाया कि कुछ समय पहले उन्होंने लेह के कुशोक बकुला रिम्पोची एयरपोर्ट पर पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग की नींव रखी थी, और आज उन्हें इस जरूरी प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने का मौका मिला.’
खराब मौसम को लेकर जियोथर्मल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
पीएम ने कहा, ‘यह टर्मिनल एयरपोर्ट की सालाना पैसेंजर कैपेसिटी को 10 लाख से बढ़ाकर 35 लाख कर देगा. यहां फ्लाइट्स की संख्या भी तीन गुना बढ़ सकती है. इस टर्मिनल की एक और खास बात यह है कि लद्दाख के खराब मौसम को ध्यान में रखते हुए, यहां जियोथर्मल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. सोलर एनर्जी का भी इस्तेमाल किया गया है. यह भारत का पहला एयरपोर्ट टर्मिनल है जिसमें जियोथर्मल हीटिंग की सुविधा है. आप सभी को बधाई.’
298 km लंबी निम्मू-पदुम-दारचा सड़क का उद्घाटन
पीएम ने 298 किलोमीटर लंबी निम्मू-पदुम-दारचा रोड भी देश को समर्पित की. बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने इसे बनाया है. यह लेह में निम्मू को हिमाचल प्रदेश के दारचा से दूर ज़ांस्कर वैली के जरिए जोड़ेगी और श्रीनगर-लेह और मनाली-लेह हाईवे को सपोर्ट करते हुए लद्दाख के लिए एक अल्टरनेटिव कॉरिडोर होगा.
एक अधिकारी ने कहा, ‘इस सड़क की स्ट्रेटेजिक अहमियत ऑपरेशनल मोबिलिटी को बढ़ाने और आर्म्ड फोर्सेज के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट को मजबूत करने में है,’ उन्होंने आगे कहा कि इससे ज़ांस्कर के लोगों को हेल्थकेयर, एजुकेशन, मार्केट और जरूरी सर्विसेज तक पहुंच बेहतर होने से भी फ़ायदा होगा.
9 मेगावाट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट का उद्घाटन
पीएम मोदी ने 9 मेगावाट के हनु स्मॉल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट और 66 केवी डबल-सर्किट दाह-हनु-खलत्सी ट्रांसमिशन लाइन का भी उद्घाटन किया.
40 वॉटर बॉडीज का आज उद्घाटन
इसके अलावा लेह के सिंधु घाट में भारत का पहला पेट्रोग्लिफ़ कंजर्वेशन पार्क और प्रोजेक्ट हिम सरोवर के तहत 40 गाँवों में डेवलप की गई 40 वॉटर बॉडीज का आज उद्घाटन किया गया. यह एक पहल है जिसका मकसद मिशन अमृत सरोवर के मकसद के मुताबिक पानी बचाकर लद्दाख की खास भौगोलिक और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों का हल निकालना है.
पीएमओ के मुताबिक लद्दाख में खेती में पानी की उपलब्धता और मांग के बीच मौसमी असंतुलन का सामना करना पड़ता है. किसानों को अक्सर बुवाई के जरूरी मौसम में पानी की कमी का सामना करना पड़ता है, जबकि बर्फ पिघलने और ग्लेशियर के बहाव से दूसरे समय में पानी के काफी साधन मिलते हैं.
पीएमओ ने आगे कहा, ‘प्रोजेक्ट हिम सरोवर इस चुनौती का समाधान पानी उपलब्ध होने पर उसे बचाकर और जरूरत पड़ने पर उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करके करना चाहता है, जिससे सिंचाई में मदद मिले, खेती से होने वाली आजीविका बनी रहे और इस क्षेत्र में लंबे समय तक पानी की सुरक्षा मजबूत हो.’
गृह मंत्रालय की टीम लद्दाख लीडरशिप से बातचीत करने के लिए लेह जाएगी
इस बीच गृह मंत्रालय की एक टीम आज लद्दाख लीडरशिप से बातचीत करने के लिए लेह जाएगी. सब-कमेटी लेवल की बातचीत केंद्र शासित प्रदेश के नेतृत्व वाली बॉडी और आर्टिकल 371k के तहत संवैधानिक सुरक्षा उपायों पर फोकस करेगी.
इससे पहले गृह मंत्रालय ने लद्दाख के लिए केंद्र शासित प्रदेश के नेतृत्व वाली विधानसभा में आर्टिकल 371K को शामिल करने का प्रस्ताव दिया था. आर्टिकल 371K को शामिल करने से एक ‘सुई जेनेरिस’ मॉडल बन सकता है, जिससे लद्दाख की चुनी हुई बॉडी को जमीन, संस्कृति, भाषा, जंगल, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण पर कंट्रोल करने के लिए फाइनेंशियल, एग्जीक्यूटिव और एडमिनिस्ट्रेटिव अधिकार मिल सकेंगे. सूत्रों ने कहा कि एक बार गृह मंत्रालय और लद्दाख ग्रुप एक समझौते पर पहुँच जाते हैं, तो प्रस्ताव को संसद में एक संवैधानिक संशोधन के जरिए लागू किया जाएगा.
