हैदराबादः हाल ही में 30 सितंबर 2026 को इराक सरकार और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने इराक से अमेरिकी नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय सैन्य गठबंधन के मिशन को आधिकारिक और पूर्ण रूप से समाप्त करने की घोषणा की है. तय रोडमैप के तहत विदेशी सेनाओं ने इराक में अपने आखिरी सैन्य ठिकानों को भी पूरी तरह खाली कर दिया है, जिसके बाद इराक ने देश में चार दिवसीय ‘संप्रभुता दिवस’ राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाने का ऐलान किया है.
इराक में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के मुख्य कारण क्या थे?
20 मार्च 2003 को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सेनाओं ने इराक पर हमला किया. अमेरिका का दावा था कि इराक के पास बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाले हथियार हैं और वह अंतर्राष्ट्रीय शांति के लिए खतरा है. हालांकि अधिकांश देशों ने इस सैन्य कार्रवाई का समर्थन करने से इनकार कर दिया था.
तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बुश ने दावा किया था कि सद्दाम लगातार घातक हथियार इकट्ठा कर रहे हैं और उनका निर्माण कर रहे हैं. उन्होंने इराक को ईरान और उत्तर कोरिया के साथ अंतर्राष्ट्रीय “बुराई की धुरी” का हिस्सा बताया था. अक्टूबर 2002 में, अमेरिकी कांग्रेस ने इराक के खिलाफ सैन्य बल के इस्तेमाल को मंजूरी दी थी. इस कार्रवाई के लिए ब्रिटेन ने 45,000, ऑस्ट्रेलिया ने 2,000 और पोलैंड ने 194 विशेष बल (स्पेशल फोर्सेज) के जवान भेजे थे.
इस लेख में हम इस पूरे सैन्य मिशन के ऐतिहासिक घटनाक्रमों, अमेरिका को मिली रणनीतिक सफलताओं और इस खौफनाक युद्ध में जान-माल के रूप में चुकाई गई भारी ‘मानवीय कीमत’ का एक विस्तृत और सिलसिलेवार विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं.
2002: अमेरिकी सेना की लंबे समय तक रहने वाली इस मौजूदगी की शुरुआत 16 अक्टूबर 2002 को हुई, जब अमेरिकी कांग्रेस ने ‘इराक के खिलाफ सैन्य बल के इस्तेमाल के अधिकार’ का प्रस्ताव पास किया. इसने कार्यपालिका (राष्ट्रपति) को इराक के पास बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाले हथियार होने और आतंकवाद से संबंध होने के आरोपों के चलते सद्दाम हुसैन की सरकार के खिलाफ सशस्त्र बलों को तैनात करने की शक्ति दी.
2003: 19 मार्च 2003 को अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने ‘ऑपरेशन इराकी फ्रीडम’ की घोषणा की, जिसका उद्देश्य “इराक को हथियारों से मुक्त करना, वहां के लोगों को आजाद कराना और दुनिया को एक गंभीर खतरे से बचाना” था. गठबंधन सेनाओं ने अप्रैल 2003 में बगदाद में प्रवेश किया, जिससे वहां की सरकार गिर गई. ‘गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस’ के आंकड़ों के अनुसार, उस महीने अमेरिकी सैनिकों की संख्या 1,45,600 से अधिक हो गई और कई सालों तक यह 1,00,000 से ऊपर बनी रही.
2006: अमेरिकी सैनिकों ने 13 दिसंबर 2003 को टिकरित के पास सद्दाम हुसैन को पकड़ लिया था, जिसके बाद एक इराकी न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) द्वारा उन पर मुकदमा चलाया गया और 30 दिसंबर 2006 को उन्हें फांसी दे दी गई.
2007: बढ़ते सांप्रदायिक संघर्ष (हिंसा) से निपटने के लिए, राष्ट्रपति बुश ने 10 जनवरी 2007 को सेना को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त टुकड़ियों की तैनाती की घोषणा की. इसके तहत अतिरिक्त ब्रिगेड भेजे गए, जिससे सैनिकों की संख्या 2006 के आखिर में 1,31,500 से बढ़कर अगस्त 2007 तक युद्ध के समय के अपने सबसे उच्चतम स्तर यानी 1,69,000 पर पहुंच गई.
2008: 17 नवंबर 2008 को अमेरिका और इराक ने एक ‘रणनीतिक रूपरेखा समझौते’ के साथ-साथ एक द्विपक्षीय ‘स्टेटस ऑफ फोर्सेज एग्रीमेंट’ (SOFA) पर हस्ताक्षर किए, जिसने विदेशी सेनाओं की वापसी का रास्ता तय कर दिया. 14 दिसंबर 2008 को एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इराक के प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी ने इस समझौते को मंजूरी मिलने की तारीफ की. जबकि बुश ने इसे “एक बड़ी उपलब्धि” बताया. इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक इराकी पत्रकार ने बुश पर जूते फेंके थे.
2010: ‘ऑपरेशन इराकी फ्रीडम’ आधिकारिक रूप से 31 अगस्त 2010 को समाप्त हो गया, और इसके बाद सैनिकों की संख्या कम करके ‘ऑपरेशन न्यू डॉन’ की शुरुआत की गई, जिसका मुख्य काम वहां की स्थानीय सेना को सलाह और ट्रेनिंग देना था.
2011: 12 दिसंबर 2011 को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और इराकी पीएम मलिकी ने इस सैन्य अभियान के खत्म होने की घोषणा की. 15 दिसंबर 2011 को बगदाद में अमेरिकी सेना ने आधिकारिक रूप से अपने संगठनात्मक झंडे समेट लिए. हालांकि द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते के तहत देश छोड़ने की आखिरी कानूनी समय सीमा 31 दिसंबर 2011 तय की गई थी. लेकिन 500 सैनिकों और 100 से अधिक वाहनों का आखिरी सैन्य काफिला तय तारीख से लगभग दो सप्ताह पहले ही, 18 दिसंबर 2011 को सीमा पार कर कुवैत चला गया.
अमेरिकी सेना की वापसी- ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व
इराक में सुरक्षा हालात तब तेजी से बिगड़ गए जब आतंकवादी संगठन आईएसआईएस (ISIS) ने उत्तरी और पश्चिमी इराक में भारी तबाही मचाई. उन्होंने 10 जून 2014 को इराक के एक बड़े महानगर मोसुल पर कब्जा कर लिया और इराक के लगभग एक-तिहाई हिस्से को अपने नियंत्रण में ले लिया.
2014: बगदाद (इराक सरकार) की ओर से मदद की आधिकारिक अपील के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने 16 जून 2014 को शुरुआती जांच दल को इराक भेजा. इसके बाद 7-8 अगस्त को इरबिल (Erbil) शहर पर हो रहे हमलों को रोकने और सिंजार पहाड़ी पर फंसे नागरिकों की सुरक्षा के लिए हवाई हमलों (एयरस्ट्राइक) और मानवीय सहायता सामग्री गिराने की मंजूरी दी गई.
10 सितंबर 2014 को वाशिंगटन (अमेरिका) ने एक वैश्विक गठबंधन का गठन किया, जिसमें आगे चलकर दर्जनों देश शामिल हुए. इसके बाद, आतंकवाद विरोधी हवाई अभियान चलाने और इराक की जमीनी सेना की मदद करने के लिए 17 अक्टूबर 2014 को आधिकारिक रूप से ‘कंबाइंड जॉइंट टास्क फोर्स – ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व’ (CJTF-OIR) का गठन किया गया.
आईएसआईएस की हार और मोसुल पर दोबारा कब्जा
2017: शहरों में लंबी और भारी लड़ाई के बाद, इराकी सेना ने जुलाई 2017 में मोसुल को आजाद करा लिया. सीरिया के साथ लगी सीमा पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने के बाद, 9 दिसंबर 2017 को इराकी प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी ने आधिकारिक रूप से इराक की धरती से आईएसआईएस (ISIS) की हार की घोषणा की.
2019: 27 दिसंबर 2019 को क्षेत्रीय तनाव तब बहुत ज्यादा बढ़ गया, जब किरकुक के एक सैन्य ठिकाने पर हुए रॉकेट हमले में एक अमेरिकी ठेकेदार की मौत हो गई. इसके जवाब में अमेरिका ने कताइब हिजबुल्लाह के पांच ठिकानों पर हवाई हमले किए.
2020: 3 जनवरी 2020 को बगदाद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के बाहर एक अमेरिकी हमले में ईरान की कुड्स फोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी और इराकी मिलिशिया नेता अबू महदी अल-मुहांदिस मारे गए. इसके दो दिन बाद, इराक की संसद ने एक गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव पारित कर सभी विदेशी सैन्य बलों को देश से बाहर निकालने की मांग की.
2021: 26 जुलाई 2021 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और इराकी प्रधानमंत्री मुस्तफा अल-काधिमी के बीच साल के अंत तक युद्ध अभियानों (कॉम्बैट ऑपरेशंस) को समाप्त करने पर सहमति बनी. इस गठबंधन ने 9 दिसंबर 2021 को आधिकारिक रूप से अपनी लड़ाकू भूमिका खत्म कर दी, जिसके बाद वहां बचे लगभग 2,500 अमेरिकी सैनिकों को केवल ट्रेनिंग, सलाह और खुफिया जानकारी साझा करने के काम में लगा दिया गया.
वापसी का अंतिम रोडमैप: 2024-2026
2023: अगस्त 2023 में द्विपक्षीय सुरक्षा वार्ता फिर से शुरू हुई. इसके बाद, आईएसआईएस के लगातार बने हुए खतरे का आकलन करने और देश की आंतरिक रक्षा क्षमताओं को परखने के लिए जनवरी 2024 में ‘हायर मिलिट्री कमीशन’ का गठन किया गया.
2024: 17 सितंबर 2024 को इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुडानी ने कहा कि अब इस अंतर्राष्ट्रीय सैन्य मिशन का औचित्य पूरी तरह समाप्त हो चुका है.
27 सितंबर 2024 को वाशिंगटन (अमेरिका) और बगदाद ने वापसी का एक रोडमैप फाइनल किया. इसके पहले चरण के तहत सितंबर 2025 तक पूरे इराक से सैन्य गठबंधन के मिशन को खत्म करना तय हुआ. जबकि दूसरे चरण के तहत विदेशी सैनिकों को सीरिया में आईएसआईएस विरोधी अभियानों को चलाने के लिए सितंबर 2026 तक चुनिंदा इराकी सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई.
2025: 30 सितंबर 2025 को अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने घोषणा की कि वह अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर इस सैन्य मिशन को कम करेगा.
2026: 18 जनवरी 2026 को कमीशन ने घोषणा की कि सैन्य गठबंधन के सलाहकारों ने ऐन अल-असद एयर बेस और जॉइंट ऑपरेशंस कमांड मुख्यालय सहित सभी संघीय सैन्य ठिकानों को पूरी तरह खाली कर दिया है और सारी कमान स्थानीय सुरक्षा बलों को सौंप दी है.
27 सितंबर 2026 को एक इराकी अधिकारी ने बताया कि विदेशी सेनाएं इराक से पूरी तरह वापस जा चुकी हैं.
युद्ध में नुकसान के आंकड़े
- साल 2003 से 2011 के दौरान ‘ऑपरेशन इराकी फ्रीडम’ के तहत चलाए गए अभियान में लगभग 15 लाख अमेरिकी सैनिकों ने इराक युद्ध क्षेत्र में अपनी सेवाएं दीं.
- पेंटागन के ‘डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम’ के अनुसार, इस दौरान अमेरिकी सेना के 4,418 जवान मारे गए और 31,994 जवान घायल हुए.
- पेंटागन के रिकॉर्ड के मुताबिक, साल 2014 के बाद की गई सैन्य तैनाती के दौरान कुल 123 जवानों की मौत हुई, जबकि 2003-2011 के सैन्य कब्जे के दौरान 4,418 जवान मारे गए थे.
- ‘ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व’ के तहत 2014 से 2026 तक चले अभियान के दौरान, पेंटागन के कैजुअल्टी रजिस्टर में कुल 123 मौतों और 499 सैनिकों के घायल होने का रिकॉर्ड दर्ज किया गया.
- साल 2003 से 2024 तक के दोनों चरणों को मिलाकर, मौतों का हिसाब रखने वाली संस्था ‘इराक बॉडी काउंट’ ने संघर्ष के कारण 2,00,000 से अधिक आम नागरिकों की मौत की रिपोर्ट दी है.
- ‘एवरी कैजुअल्टी काउंट्स’ संस्था के अनुसार, इस पूरी अवधि के दौरान आम नागरिकों और लड़ाकों को मिलाकर 3,00,000 से अधिक लोगों के मारे जाने का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है.
- आर्थिक नुकसान की बात करें तो अमेरिकी कांग्रेस के बजट कार्यालय ने 26 अप्रैल 2011 को रिपोर्ट दी थी कि इन सैन्य अभियानों में करदाताओं (टैक्सपेयर्स) के लगभग 752 अरब डॉलर खर्च हुए.
इराक में अभियानों के दौरान अमेरिका की मुख्य उपलब्धियां
- 20 मार्च 2003 के आक्रमण के कुछ ही हफ्तों के भीतर सद्दाम हुसैन की सत्ता को उखाड़ फेंका.
- इस्लामिक स्टेट (ISIS) को 2017 में इराक में और 2019 में सीरिया में पूरी तरह से पराजित (हारे हुए) घोषित किया गया.
- साल 2024 तक, इराक और अमेरिका इस बात पर सहमत हो गए कि अंतर्राष्ट्रीय सैन्य गठबंधन ने अपना काम पूरा कर लिया है.

