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Daily Insider Desk
• Wed, 13 Jul 2022 7:41 pm IST

ब्रेकिंग

प्रत्येक धर्म मतवाद ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग है: स्वामी मुक्तिनाथानंद

लखनऊ। सत् प्रसंग में रामकृष्ण मठ लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानंद ने बताया कि हमारे सबके लक्ष्य यद्यपि एक ही है लेकिन वो साधारण लक्ष्य अर्थात ईश्वर को प्राप्त करने के लिए अनेक मार्ग होना स्वाभाविक है। उन्होंने बताया कि ईश्वर एक ही है एवं मनुष्य जीवन में उनको प्राप्त करना सब मनुष्य के लिए एक ही लक्ष्य है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए अनेक मार्ग है एवं प्रत्येक मार्ग को एक-एक धर्म मत कहा जाता है। भारतीय प्राचीन संस्कृति में यह एकत्व के भीतर बहुत्व का मतवाद स्वीकृत हुआ है। ऋग्वेद में कहा गया है- एकम् सत् विप्रा बहुधा वदन्ति। अर्थात सत्य एक ही है लेकिन उस तक पहुंचने के मार्ग अनेक है। सर्वप्रकार धर्ममत को स्वीकार करने का मनोभाव हिंदू धर्म में समावेश है।

रामकृष्ण उनके एक भक्त नंद बसु के गृह में नाना प्रकार ईश्वरीय चित्र परिदर्शन करते समय यह इंगित किया था। भगवान का एक-एक रूप दर्शन करने के उपरांत उनके मन में एक-एक प्रकार भावांतर उपस्थित हो रहा था एवं वो आनंद में अपलूत हो रहे थे। रामकृष्ण कहा करते थे कि भगवान का चित्र दर्शन करने से भगवान को ही याद आ जाता है और वह चित्र के माध्यम से भगवान का सजीव सान्निध्य प्राप्त हो जाता है। स्वामी मुक्तिनाथानंद ने बताया कि चित्र परिदर्शन के उपरांत श्री रामकृष्ण ने नंद बसु की बहुत तारीफ किया था और उन्होंने बताया, "तुम प्रकृत हिंदू हो।" कारण इतने किस्म का विभिन्न देव- देवियों के चित्र इन्होंने एक साथ प्रदर्शनी के लिए संरक्षित करके रखे थे। यही हिंदू धर्म का प्रकृत स्वरूप है। हिंदू धर्म में कोई धर्म विद्वेष का स्थान नहीं है, सब मार्ग को सही मार्ग मानते हुए हम लोग अपना-अपना धर्ममत अनुसरण करते हैं एवं कोई भी धर्ममत अनुसरण करते हुए जब ईश्वर प्राप्त हो जाते है तब देखते हैं कि सभी धर्म एक ही बिंदु पर आकर मिलते हैं। स्वामी मुक्तिनाथानंद ने कहा श्री रामकृष्ण के ये उदार मनोभाव "जितने मत उतने पथ" की भावना से अगर हम भी कोई भी धर्मपथ अनुसरण करके हुए भगवान के चरणों में आंतरिक प्रार्थना करें तब उनकी कृपा से वह हमारे जीवन में प्रत्यक्ष रुप से उपस्थित होकर हमारा जीवन सार्थक एवं सफल बना देंगे।