सहारनपुर: पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से जुड़े 17 करोड़ 29 लाख की नकली करेंसी के सनसनीखेज मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है. वैसे-वैसे कई अहम कड़ियां सामने आ रही हैं. करोड़ों रुपये की नकली करेंसी मिलने के बाद अब उसी करेंसी चेस्ट से 4 लाख 33 हजार 900 रुपये की मुद्रा निकाले जाने के मामले में पुलिस ने वांछित आरोपी को गिरफ्तार किया है.
आरोपी के कब्जे से 20,200 रुपये नकद बरामद होने के बाद मुकदमे में बरामदगी से संबंधित धारा भी बढ़ाई गई है. सदर बाजार पुलिस की इस कार्रवाई को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब 17.29 करोड़ की नकली करेंसी के मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है. स्थानीय स्तर पर गठित विशेष जांच दल (SIT) भी इस मामले में जांच कर चुका है और उसके द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों की केस डायरी अब एनआईए को सौंप दी गई है.
आपको बता दें कि 29 अगस्त 2026 को पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य प्रबंधक एवं नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे की तहरीर पर सदर बाजार थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सिविल लाइन स्थित पीएनबी करेंसी चेस्ट परिसर में नोटों के बंडलों से 4,33,900 के नोट निकाले गए थे.
मामले में पार्ट-टाइम हाउस कीपर विशाल कुमार समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. पुलिस लगातार आरोपी की तलाश कर रही थी. शनिवार को मुखबिर की सूचना पर सदर बाजार पुलिस ने विशाल पुत्र ब्रह्मपाल निवासी ग्राम बालेली, पोस्ट सिम्भालकी गुर्जर, थाना गागलहेड़ी को छोटी रेलवे लाइन खंडहर क्वार्टर के सामने रेलवे राशन डिपो के पास से गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस के मुताबिक आरोपी के कब्जे से 20,200 नकद बरामद हुए. पुलिस ने बरामद रकम को इसी मुकदमे से संबंधित बताया है. गिरफ्तारी और बरामदगी के आधार पर मुकदमे में धारा 317(2) बीएनएस की बढ़ोतरी की गई है. पीएनबी करेंसी चेस्ट से जुड़े दो अलग-अलग घटनाक्रम सामने आने के बाद जांच एजेंसियों की सक्रियता बढ़ना स्वाभाविक है.
एक तरफ करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ की नकली करेंसी मिलने का मामला है, तो दूसरी तरफ इसी अवधि में करेंसी चेस्ट के नोटों के बंडलों से लाखों रुपये निकाले जाने का मुकदमा दर्ज हुआ.
हालांकि अभी तक पुलिस या एनआईए की ओर से गिरफ्तार विशाल को 17.29 करोड़ की नकली करेंसी के स्रोत या नेटवर्क से सीधे जोड़ने की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. ऐसे में दोनों मामलों के बीच सीधा संबंध होने का दावा करना जल्दबाजी होगी, लेकिन करेंसी चेस्ट से जुड़े घटनाक्रमों के कारण इस गिरफ्तारी को जांच के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
17.29 करोड़ की नकली करेंसी का मामला सामने आने के बाद शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की थी. डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि एसएसपी अभिनंदन सिंह ने सात सदस्यीय SIT का गठन किया था. SIT के साथ क्राइम ब्रांच ने भी साक्ष्य जुटाए और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए.
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों, बयानों, बरामदगी और अन्य साक्ष्यों को केस डायरी में दर्ज किया गया. अब यह केस डायरी एनआईए को सौंप दी गई है. एनआईए स्थानीय जांच में सामने आए तथ्यों को अपनी जांच के साथ जोड़कर देखेगी.
17 करोड़ 29 लाख की नकली करेंसी के मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोटों का स्रोत क्या था और इन्हें बैंक की करेंसी चेस्ट तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया क्या रही. एनआईए की जांच अब इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
इधर, करेंसी चेस्ट से 4.33 लाख की मुद्रा निकाले जाने के मामले में विशाल की गिरफ्तारी ने जांच का एक अलग पहलू सामने रखा है. आरोपी से पूछताछ और आगे की विवेचना में यह स्पष्ट हो सकता है कि 20,200 की बरामद रकम किस परिस्थिति में उसके पास पहुंची और करेंसी चेस्ट से रकम निकालने की घटना में उसकी भूमिका क्या थी.
इस तरह 17.29 करोड़ की नकली करेंसी, करेंसी चेस्ट से 4.33 लाख की रकम निकलना और अब आरोपी विशाल से 20,200 की बरामदगी—इन तीनों घटनाक्रमों ने सहारनपुर के पीएनबी करेंसी चेस्ट मामले को जांच एजेंसियों के लिए और महत्वपूर्ण बना दिया है. अब निगाहें एनआईए की जांच और आगे सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हैं.