लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अब न्यूनतम मजदूरी तय करने का आधार सिर्फ महंगाई या काम की प्रकृति नहीं होगा। नई नियमावली में पहली बार मजदूर परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों का पूरा खाका खींच दिया गया है। सरकार न्यूनतम मजदूरी तय करते समय मानक मजदूर परिवार के लिए रोज 2700 कैलोरी भोजन, साल में 66 मीटर कपड़े, भोजन-कपड़े के खर्च का 10 प्रतिशत आवास, न्यूनतम मजदूरी का 20 प्रतिशत ईंधन-बिजली और 25 प्रतिशत बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा, मनोरंजन व आकस्मिक खर्च के लिए मानेगी। यानी मजदूरी तय करने का आधार अब मजदूर की वास्तविक जीवन-जरूरतों से सीधे जुड़ गया है।
उन्होंने बताया कि नई नियमावली में मानक मजदूर परिवार में कमाने वाले कर्मचारी के अलावा पति या पत्नी और दो बच्चों को तीन वयस्क उपभोग इकाइयों के बराबर माना गया है। नई व्यवस्था में महंगाई भत्ते के पुनरीक्षण की प्रक्रिया भी तय कर दी गई है। इसके लिए श्रम ब्यूरो के औद्योगिक कामगारों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को आधार बनाया जाएगा और साल में दो बार एक अप्रैल और एक अक्टूबर से पहले इसकी गणना की जाएगी।
मजदूरी अवधि में किस्तों में वसूला जाएगा
साप्ताहिक अवकाश दिवस पर काम कराने पर ओवरटाइम की दर से भुगतान होगा। साथ ही वैकल्पिक विश्राम दिवस भी देना होगा। वैकल्पिक छुट्टी की व्यवस्था ऐसी नहीं हो सकती जिससे कर्मचारी लगातार दस दिन से अधिक बिना अवकाश काम करता रहे। किसी कर्मचारी की मजदूरी से कुल कटौतियां 50 प्रतिशत से अधिक होने पर उसे आगे की मजदूरी अवधि में किस्तों में वसूला जाएगा।
नियोक्ता किसी कर्मचारी पर जुर्माना लगाने से पहले उसे आरोप और उसके आधार की जानकारी लिखित देगा। कर्मचारी को जवाब के लिए सात दिन मिलेंगे। आरोप साबित होने पर ही जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माने, कटौती और वसूली से जुटी रकम का इस्तेमाल संस्थान में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए श्रम विभाग से अनुमोदित कल्याणकारी योजनाओं में किया जाएगा।
नई व्यवस्था में वेतन पर्ची में निर्धारित प्रारूप में कर्मचारी का यूएएन, बैंक खाता, मूल वेतन, महंगाई भत्ता, अन्य भत्ते, उपस्थिति, ओवरटाइम, सकल वेतन, पीएफ-ईएसआई समेत कटौतियां और हाथ में मिलने वाली शुद्ध मजदूरी दर्ज होगी। नई नियमावली में कामगारों को अकुशल, अर्धकुशल, कुशल और अतिकुशल श्रेणियों में वर्गीकृत करने की व्यवस्था भी विस्तार से की गई है।