मेरठ में स्वाइन फ्लू का बढ़ा खतरा, अब तक 16 मरीज पॉजिटिव

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में स्वाइन फ्लू (H1N1) के 16 मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. कुल 54 संदिग्ध मरीजों के सैंपल लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज की माइक्रोलाजी लैब में आरटी-पीसीआर जांच के लिए भेज गई है, जिनमें से 16 मरीजों की रिपोर्ट अब-तक पॉजिटिव मिली है, जिसके बाद अब प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है.

दिल्ली-एनसीआर समेत राष्ट्रिय राजधानी क्षेत्र में स्वाइन फ्लू (H1N1) तेजी से फैल रही है. मेरठ स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक करीब छह साल बाद मेरठ में स्वाइन फ्लू (H1N1) की रफ्तार जिले में बढ़ी थी. मेरठ में साल 2000 में लगभग 100 मामले स्वाईन फ्लू के मिले थे.

विशेषज्ञों के का मानना है कि आनुवंशिक संरचना में हल्के बदलाव के कारण इस बार वायरस सक्रिय हुआ है. इसी बदलाव के चलते लोगों की पुरानी प्रतिरोधक क्षमता वायरस इस नए स्वरूप के खिलाफ कम प्रभावी साबित हो रही है.

जिला सर्विलांश अधिकारी डॉक्टर सुधीर ने बताया कि मेरठ में स्वाइन फ्लू (H1N1) का पहला केस जुलाई महीने में सामने आया था. जुलाई से अब-तक जिले में 54 संदिग्ध मरीजों के सैंपल लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज की माइक्रोलाजी लैब में आरटी-पीसीआर जांच के लिए भेजे गए है, जिनमें 16 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है.

उन्होंने बताया कि दिल्ली में संक्रमण काफी फैल चुका है. एक लाख से अधिक यात्री अकेले नमो भारत से ही दिल्ली से मेरठ के बीच आवाजाही करते हैं. ऐसे में बेहद जरूरी है कि मास्क का इस्तेमाल करें, क्योंकि ये संक्रमण खांसने और छीकने से भी फैलता है. ऐसे में ये आवश्यक है कि जब भी भीड़भाड़ से निकलें तो चेहरे पर मास्क अवश्य लगाएं. इससे संक्रमण से बचा जा सकें.

अगर किसी मरीज को सर्दी, जुखाम, बुखार, खांसी, गले में खराश हो सकती है. सीएमओ रामप्रसाद का कहना है कि जिला अस्पताल में सेपरेट आइसोलेश वार्ड बनाया गया है. जिन लोगों को ऐसी समस्याएं हो रही है वह लोग जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज की फ्लू ओपीडी में जाकर संपर्क कर सकते हैं. जिला चिकित्सालय में अलग से फ्लू ओपीडी शुरू की गई है, जिससे कि संक्रमितों की समय से पहचान करके उनका उपचार किया जा सके.

वहीं लाला लाजपत राय स्मारक मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एचओडी डॉक्टर अमित कुमार का कहना है, जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है उन्हें विशेष रूप से सचित रहना चाहिए. अगर उनकी तबीयत खराब होती है तो तत्काल जांच भी करानी चाहिए.

क्या हैं स्वाइन फ्लू के लक्षण: तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, बदन दर्द, थकान और सांस लेने में तकलीफ स्वाइन फ्लू के मुख्य लक्षण हैं. क्या करें:

  • खांसी-जुकाम होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और खुद से दवा न लें.
  • लक्षण दिखने पर घर में एकांतवास में रहें और मास्क पहनें.
  • हाथों को साबुन से बार-बार धोएं.
  • पौष्टिक आहार लें और पानी अधिक सेवन करें.
  • भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें.

क्या न करें:

  • बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न लें.
  • संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें.
  • लक्षणों को सामान्य फ्लू समझकर नजरअंदाज न करें.

आप अपना बचाव कैसे कर सकते हैं? यहाम स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य संबंधी सलाह दी गई है:

  • भीड़-भाड़ वाली जगहों पर पहनें मास्क: भीड़-भाड़ वाली और बंद जगहों पर मास्क पहनने से सांस के जरिए निकलने वाली बूंदों और एरोसोल के संपर्क में आने का खतरा कम हो सकता है.
  • अपनाएं खांसने और छींकने के सही तरीके: खांसते और छींकते समय अपना मुंह और नाक ढकें. खांसने या छींकने के समय टिश्यू या अपनी कोहनी के अंदरूनी हिस्से का इस्तेमाल करें.
  • साबुन से अपने हाथ धोएं- साबुन और पानी से अपने हाथ धोने से सांस से जुड़ी बीमारियों को फैलने से रोकने में मदद मिली है.
  • अपने चेहरे को छूने से बचें- बिना हाथ धुले अपनी आंख, नाक और मुंह को न छूने की कोशिश करें, जिससे वायरस दूषित सतहों से आपके चेहरे तक पहुंच सकते हैं.
  • आइसोलेट रखना- जिन लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है, उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों से अलग रखें.
  • डॉक्टर की सलाह के बिना खुद से दवा नहीं लीजिए. अगर स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें, तो डॉक्टर की सलाह के बिना खुद से दवा नहीं लीजिए.
  • अगर आप बीमार हैं तो घर पर ही रहें- बुखार या सांस लेने में गंभीर तकलीफ होने पर दूसरों के करीबी संपर्क से बचने से संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिल सकती है.
  • शरीर में पानी की कमी नहीं होने दीजिए: बुखार या सांस की बीमारी के दौरान शरीर में तरल पदार्थों का सही स्तर बनाए रखना जरूरी है, खासकर तब जब आपको पसीना आ रहा हो या भूख कम लग रही हो.
  • नैपकिन या टिश्यू का दोबारा न करें- इस्तेमाल किए गए नैपकिन या टिश्यू का दोबारा इस्तेमाल कभी नहीं करें. इन नैपकिन या टिश्यू को इधर-उधर फेंकने से बचें और सही तरीके से इसे नष्ट करें.
  • हाथ मिलाने से बचें- संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए दूसरों से हाथ मिलाने से बचना चाहिए.