लखनऊ विश्वविद्यालय पूरी तरह डिजिटल: 69वें दीक्षांत में ई-ऑफिस की शुरुआत, 1.25 लाख छात्रों को मिली ई-डिग्री

लखनऊ: लखनऊ विश्वविद्यालय ने अपनी प्रशासनिक कार्यप्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. विश्वविद्यालय में 31 जुलाई से पेपरलेस वर्किंग की शुरुआत हो गई है. दरअसल, यूनिवर्सिटी के 69वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने ई-ऑफिस प्रणाली का उद्घाटन किया. समारोह का आयोजन किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर में किया गया.

दीक्षांत समारोह में कुल 1,25,239 विद्यार्थियों को डिजिटल डिग्रियां दी गईं. इसमें 93,536 स्नातक, 31,006 परास्नातक, 419 डिप्लोमा और 30 ऑनलाइन शिक्षा कार्यक्रम के विद्यार्थी शामिल रहे. वहीं, 248 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई. इसके साथ ही समारोह में 111 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 204 पदक दिए गए, जिनमें 80 छात्राएं और 31 छात्र शामिल रहे.

विश्वविद्यालय में 44 देशों के छात्र कर रहे हैं पढ़ाई

कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने बताया कि वर्तमान में 44 देशों के विद्यार्थी लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे हैं. नए शैक्षणिक सत्र में करीब 3,350 सीटों की वृद्धि की गई है, जो लगभग 30 प्रतिशत बढ़ोतरी है. उन्होंने बताया कि इस वर्ष विश्वविद्यालय में 324 शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं. वहीं, 77 देशों से 3,400 से अधिक विदेशी छात्रों ने प्रवेश के लिए आवेदन किया है. प्रो. सैनी ने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट के सहयोग से विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है, जहां हर साल लगभग 20 हजार विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा.

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन की नई यात्रा का प्रारंभ है. उन्होंने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वच्छ ऊर्जा और नई तकनीकें वैश्विक अर्थव्यवस्था को नया स्वरूप दे रही हैं. ऐसे समय में विद्यार्थियों के लिए निरंतर सीखते रहना सबसे बड़ी आवश्यकता है. उन्होंने छात्रों से कहा कि वे केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनने का संकल्प लें.

इतिहास वही बनाते हैं जो डटे रहते हैं : रजनी तिवारी

इस दौरान उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि आज के दौर में युवाओं के सामने अनेक प्रकार के भटकाव हैं, लेकिन उन्हें अपने लक्ष्य पर अडिग रहना होगा. उन्होंने कहा कि चुनौतियां हर व्यक्ति के जीवन में आती हैं, लेकिन उनसे घबराने वाले नहीं, बल्कि उनका सामना करने वाले ही इतिहास रचते हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि वास्तविक शिक्षा वही है जो संस्कार, तकनीक और रोजगार से जोड़ने का कार्य करे.

इन छात्रों को मिला पदक

  • चांसलर मेडल : स्वराज शुक्ला
  • वाइस चांसलर मेडल : श्रुति कुमारी
  • डॉ. चक्रवर्ती गोल्ड मेडल : शैलजा सिंह
  • चांसलर सिल्वर मेडल : फराह चांद
  • चांसलर ब्रॉन्ज मेडल : कंचन श्रीवास्तव, सिद्धार्थ श्रीवास्तव, शुभम भारती, अंशिता वर्मा और मेधा द्विवेदी

वहीं, डॉ. चक्रवर्ती स्वर्ण पदक से सम्मानित शैलजा सिंह ने बताया कि उन्होंने विश्वविद्यालय के विधि संकाय से पांच वर्षीय बीए-एलएलबी पाठ्यक्रम पूरा किया है. उनका सपना एक निष्पक्ष और संवेदनशील न्यायिक अधिकारी बनने का है. उनके पिता विमलेश कुमार सिंह भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त हैं, जबकि उनकी मां अलका सिंह गृहिणी हैं.

चांसलर गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले स्वराज शुक्ला ने बताया कि उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से पांच वर्षीय एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई पूरी की है. उनका लक्ष्य पीसीएस (जे) परीक्षा उत्तीर्ण कर न्यायाधीश बनना है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में भी उन्हें डॉ. चक्रवर्ती मेडल मिल चुका है. इस बार उन्हें सर्वश्रेष्ठ छात्र के रूप में चांसलर मेडल के साथ दो अन्य स्वर्ण पदकों से भी सम्मानित किया गया. स्वराज के पिता विष्णु कुमार शुक्ला राजकीय इंटर कॉलेज में शिक्षक हैं, जबकि उनकी मां जयश्री गृहिणी हैं.

इन शिक्षकों को मिला टीचर्स एक्सीलेंस अवार्ड

दीक्षांत समारोह में उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान के लिए चार शिक्षकों को टीचर्स एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया गया. इनमें स्टेटिस्टिक्स विभागाध्यक्ष प्रो. शशि भूषण, नवयुग कन्या महाविद्यालय की डॉ. नेहा अग्रवाल, अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज की डॉ. सरिता सिंह और बीएसएनवी पीजी कॉलेज की डॉ. मंजुल त्रिवेदी शामिल रहीं.