विरासत की संपत्ति के नामांतरण पर राहत, शुल्क में पांच गुना तक कमी; आदेश जारी

लखनऊ:छोटे मकान वालों को अब उत्तराधिकारी के तौर पर संपत्ति का दाखिल खारिज (गृहकर नामांतरण) कराने पर पांच गुना तक कम शुल्क देना होगा। नगर निगम के प्रस्ताव को शासन ने मंजूरी देते हुए आदेश जारी कर दिया है। 10 दिन में इसका फायदा भवन स्वामियों को मिलने लगेगा।

नगर निगम अभी पारिवारिक संपत्तियों के नामांतरण पर पांच हजार रुपये शुल्क लेता है। यह शुल्क ईडब्ल्यूएस मकान से लेकर 10 हजार वर्गफीट के बंगले तक के लिए समान था। इससे छोटे मकान मालिकों पर अपेक्षाकृत ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ रहा था। अब शासन ने मकान के आकार के अनुसार शुल्क निर्धारित कर दिया है।
करीब दो साल पहले तक नगर निगम संपत्ति के दाखिल-खारिज पर उसकी कीमत का एक प्रतिशत शुल्क लेता था। शासन के निर्देश पर इसे कम किया गया था। इसके बाद एलडीए और आवास विकास की तर्ज पर नगर निगम ने बैनामे के आधार पर होने वाले नामांतरण का शुल्क घटा दिया था। इससे बैनामे के आधार पर नामांतरण कराने वालों को राहत मिली। हालांकि, पैतृक संपत्ति, उत्तराधिकार या वसीयत के आधार पर नामांतरण कराने वालों को कोई छूट नहीं मिली थी।

इस मामले पर सवाल उठे तो अमर उजाला ने भी प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद शासन स्तर पर वसीयत और उत्तराधिकार के आधार पर होने वाले नामांतरण शुल्क को कम करने का प्रस्ताव तैयार किया गया। जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब शासन ने आदेश जारी कर दिया है।

उत्तराधिकार, वसीयत के मामलों में नया शुल्क
– 1000 वर्गफीट तक 1000 रुपये
– 1001 से 2000 वर्गफीट तक 2000 रुपये
– 2001 से 3000 वर्गफीट तक 3000 रुपये
– 3000 वर्गफीट से अधिक 5000 रुपये

बैनामे के आधार पर नामांतरण का मौजूदा शुल्क

– पांच लाख रुपये तक की संपत्ति पर : 3500 रुपये
– पांच लाख से अधिक और 10 लाख रुपये तक : 5500 रुपये
– 10 लाख से अधिक और 20 लाख रुपये तक 7500 रुपये
– 20 लाख से अधिक और 30 लाख रुपये तक: 9500 रुपये
– 30 लाख रुपये से अधिक 10 हजार रुपये

(नोट- बैनामे के आधार पर नामांतरण की यह शुल्क व्यवस्था एक साल से लागू है। शासन ने इसमें कोई बदलाव नहीं किया है। इससे पहले संपत्ति की कीमत का एक प्रतिशत शुल्क लिया जाता था।

नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अशोक सिंह का कहना है कि वसीयत के आधार पर गृहकर नामांतरण का शुल्क शासन ने कम कर दिया है। इसका आदेश जारी हो गया है। करीब दस दिन में भवनस्वामियों को लाभ मिलने लगेगा। इसके लिए नगर निगम के सॉफ्टवेयर में बदलाव किए जाएंगे।