कानपुर: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की आज पहली बरसी है. उस हमले में देश के 26 निर्दोष नागरिकों ने अपनी जान गंवाई थी. इनमें कानपुर के शुभम द्विवेदी भी शामिल थे. इस हमले के जवाब में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर की बरसी पर शहीद शुभम के परिवार ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.
शुभम की पत्नी ऐशन्या ने बताया कि सेना द्वारा इस जवाबी कार्रवाई का नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रखना बेहद प्रतीकात्मक और भावनात्मक है. उन्होंने कहा कि पहलगाम में जिस तरह हिंदू पहचान पूछकर महिलाओं के सामने उनके पतियों को मारा गया, वह बेहद दर्दनाक था. आतंकियों ने हमारा सिंदूर छीना था, इसलिए सरकार और सेना ने इस ऑपरेशन को यह नाम देकर हम 26 महिलाओं को यह संदेश दिया कि देश हमारे सम्मान के लिए खड़ा है.
पिता का छलका दर्द: शुभम द्विवेदी के पिता संजय द्विवेदी ने कहा कि पिछले वर्ष 22 अप्रैल को धर्म के आधार पर की गई जघन्य हत्याओं के जवाब में माननीय प्रधानमंत्री और भारतीय सेना ने जो साहस दिखाया, वह अभूतपूर्व है. संजय द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत दुश्मन देश के 9 आतंकी ठिकानों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया. यह न केवल एक सैन्य प्रहार नहीं बल्कि उन परिवारों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि भी थी, जिन्होंने अपनों को खोया.
उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन उन सुहागिनों के दर्द और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है, जिनकी खुशियां आतंकवाद ने उजाड़ दी थीं. ट्रेनिंग कैंप्स का विनाश जरूरी था. ऐशन्या ने ऑपरेशन की सफलता पर जोर देते हुए कहा कि सिर्फ गोली चलाने वाले आतंकी तो महज मोहरे थे, असली जड़ वे ट्रेनिंग कैंप्स थे, जहां नफरत की शिक्षा दी जाती है. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत उन कैंप्स को नष्ट करना बहुत जरूरी था. भारत के इतिहास में शायद ही किसी आतंकी हमले के खिलाफ इतना त्वरित और प्रभावी कदम उठाया गया हो.
यादों को संजोने के लिए शुभम ट्रस्ट की शुरुआत: शुभम की यादों को जीवित रखने के लिए परिवार लगातार सामाजिक कार्य कर रहा है. ऐशन्या ने बताया कि 22 अप्रैल को एक बड़ी श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई थी, जिसमें न सिर्फ शुभम बल्कि हमले में मारे गए सभी 26 लोगों को याद किया गया. परिवार अब शुभम द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट बनाकर उनके माध्यम से बड़े स्तर पर जरूरतमंदों की मदद करने की योजना बना रहा है.
सरकार से मांग: शुभम के परिजनों ने सरकार के जीरो टॉलरेंस स्टैंड की सराहना की. ऐशन्या ने प्रधानमंत्री से अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकियों के खिलाफ यह लड़ाई लंबी है.
वहीं, पिता संजय द्विवेदी ने कहा कि आज पूरा देश इस सैन्य सफलता पर संतोष व्यक्त कर रहा है, लेकिन सरकार से मांग है कि जब तक आतंकवाद का पूर्ण खात्मा नहीं हो जाता, ऐसी कठोर कार्रवाइयां जारी रहनी चाहिए. उन्होंने उन 26 निर्दोष नागरिकों के लिए राष्ट्रीय सम्मान की भी पुरजोर मांग की.