मोदी की अपील…सोना मत खरीदो, पेट्रोल कम जलाओ, विदेश कम घूमो, जानिए कैसे सरकार के बच सकते हैं 2 लाख करोड़ रुपए

PM Modi Import Advice: बढ़ती महंगाई और चल रहे वैश्विक तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से खास अपील की है. उन्होंने लोगों से अगले एक साल तक सोने की खरीदारी रोकने, विदेश यात्रा टालने, पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए वर्क फ्रॉम होम कल्चर को लाने और घरेलू-देसी चीजों को अपनाने की भी सलाह दी है. हैदराबाद के कार्यक्रम में पीएम मोदी की इस अपील ने लोगों के जेहन में सवाल खड़ा कर दिया है आखिर ऐसा क्यों कहा गया?

पेट्रोल-डीजल, सोना, खाने योग्य तेल, खाद और विदेश यात्रा में कितना हो रहा खर्च: सबसे पहले जानते हैं कि जिन चीजों की खपत कम करने के लिए पीएम मोदी ने अपील की है, उन पर भारत सालाना कितना खर्च कर रहा. दरअसल, भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर हिस्सा क्रूड ऑयल, सोना, खाने का तेल और खाद दूसरे देशों से आयात करता है.

केवल इन 4 चीजों के आयात पर FY26 में करीब 240.7 अरब डॉलर यानी लगभग 20 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए. यह देश के कुल आयात का करीब 31 प्रतिशत है. यानी हर 3 रुपए में से 1 रुपया सिर्फ इन 4 चीजों पर खर्च हो रहा है. इसके अलावा विदेश यात्रा पर लगभग 31.7 बिलियन डॉलर यानी 2.72 लाख करोड़ रुपए (वित्त वर्ष 2023-24) खर्च होते हैं.

भारत के पास कितना सोना: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के मई 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के पास आधिकारिक सोने का भंडार केंद्रीय बैंक RBI के पास है, जो लगभग 880-881 टन (880.52 मीट्रिक टन) है. इससे भारत दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, भारत का आधिकारिक रिजर्व दुनिया में 8वें स्थान पर है.

पीएम मोदी की 7 सलाह

  • सोने की खरीद कम से कम एक साल के लिए टाल दें.
  • पेट्रोल-डीजल की खपत कम करें. मेट्रो और अन्य सार्वजनिक वाहनों का प्रयोग करें.
  • वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता दें. इससे तेल के साथ बिजली और अन्य संसाध बचेंगे.
  • खाने के तेल का प्रयोग कम से कम करें.
  • रासायनिक उर्वरकों (खाद) का प्रयोग कम करें, प्राकृतिक खेती को तरजीह दें.
  • विदेशी उत्पाद का कम प्रयोग करें, स्वदेशी अपनाएं.
  • एक साल तक विदेश यात्रा और डेस्टीनेशन वेडिंग से दूरी बनाए रखें.

भारतीय घरों में सबसे ज्यादा सोना: केंद्रीय बैंक RBI के पास तो आधिकारिक तौर पर घोषित सोने का भंडार है. जबकि, भारतीय लोगों के घरों की अलमारी, लॉकर और मंदिरों में काफी ज्यादा मात्रा में सोना जमा है. एक अनुमान के मुताबिक घरों और मंदिरों में 25,000 से 34,600 टन के बीच सोना रखा है, जो बहुत अधिक मात्रा में होने का अनुमान है. ये दुनिया में सबसे ज्यादा है.

भारत सोने के आयात पर निर्भर क्यों: इतना सोने का भंडार होने के बाद भी भारत अपनी जरूरत का करीब 90% सोना आयात करता है. इसकी वजह उत्पादन में कमी है. देश में 4 सोने की खदाने हैं, जिनमें से कर्नाटक की हुट्टी गोल्ड माइंस ही उत्पादन करती है. बाकी आंध्र प्रदेश के करनूल में जोंनागिरी (निजी), ओडिशा के देवगढ़, क्योंझर और मयूरभंज में उत्पादन काफी कम है.

 

वैसे, देश में 2191.53 मीट्रिक टन से अधिक के सोने के खनिज संसाधन होने का अनुमान है, लेकिन तकनीकी और अन्य कारणों से इनका खनन सीमित है. इन सबके बीच देश में वार्षिक स्वर्ण उत्पादन लगभग 1.5 से 2 टन के बीच है, जबकि खपत बहुत अधिक है.

पीएम मोदी ने क्यों कहा, सोना मत खरीदो: देश में सोने की खदाने तो हैं लेकिन, तकनीकी और अन्य कारणों से खनन सीमित होने के कारण देश को अपनी जरूरत का 90% से ज्यादा सोना दूसरे देशों से आयात करना पड़ता है, जिसकी डील विदेशी मुद्रा में होती है. आरबीआई के वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़े के अनुसार, भारत सोने के आयात पर लगभग 4.89 लाख करोड़ रुपए खर्च करता है.

सालाना लगभग 700-800 टन सोने का उपभोग करता है. FY26 में देश का गोल्ड इंपोर्ट बढ़कर रिकॉर्ड 72 अरब डॉलर (6.80 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंच गया. यह पिछले साल के मुकाबले करीब 24 प्रतिशत ज्यादा है. ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में छाए संकट के बीच इस खर्च को कम करने के लिए पीएम मोदी ने एक साल तक सोने की खरीद को टालने की अपील की है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर ज्यादा असर न पड़े.

सोना खरीद पर पीएम मोदी ने क्या कहा: हैदराबाद के एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, “सोने की खरीद में विदेशी मुद्रा बहुत खर्च होती है. एक समय था जब संकट आता था तब लोग देशहित में सोना दान दे देते थे. आज दान की जरूरत नहीं है लेकिन, देशहित में हमें यह तय करना होगा कि सालभर तक घर में कोई कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे. विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें यह स्वीकार करके विदेशी मुद्रा बचानी होगी.”

भारत में पेट्रोल-डीजल की कितनी खपत: जनवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, आंकड़ों के अनुसार, भारत में ईंधन की खपत काफी अधिक है. रोज लगभग 10 करोड़ लीटर पेट्रोल और 35 करोड़ लीटर से अधिक डीजल की खपत हो रही है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है. वहीं, भंडार की बात करें तो मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल का रिफाइनरियों के पास मौजूद वाणिज्यिक स्टॉक और जलमार्ग में आ रहे तेल को मिलाकर, भारत की कुल भंडारण क्षमता लगभग 10 करोड़ बैरल तक है. इसके अलावा 5.33 मिलियन मीट्रिक टन का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) भी है. उत्पादन में कमी और डिमांड अधिक होने कारण देश को अपनी जरूरतों का 85-90% हिस्सा आयात करना पड़ता है.

मोदी ने पेट्रोल-डीजल के लिए क्या कहा: हैदराबाद के कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, “भारत के पास बड़े-बड़े तेल के कुएं नहीं हैं. हमें अपनी जरूरत के पेट्रोल-डीजल-गैस बहुत बड़ी मात्रा में दुनिया के दूसरे देशों से मंगाने पड़ते हैं. युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में पेट्रोल, डीजल, गैस और फर्टिलाइजर के दाम बहुत अधिक बढ़ चुके हैं. इसलिए इनके इस्तेमाल में संयम बरतना चाहिए, जिससे देश की बचत होगी.”

पीएम मोदी ने क्यों कहा, पेट्रोल-डीजल की खपत कम करें: देश को प्रतिदिन 55 से 56 लाख बैरल (7-8 लाख मीट्रिक टन) कच्चे तेल की जरूरत होती है. लेकिन, उत्पादन कम होने कारण अपनी जरूरतों का लगभग 85-90% हिस्सा देश को आयात करना पड़ता है और वह दूसरे देशों पर निर्भर रहता है. FY26 में कच्चे तेल के आयात पर करीब 134.7 अरब डॉलर (11 लाख करोड़ रुपए) खर्च किए. यह देश के कुल आयात का सबसे बड़ा हिस्सा रहा.

कच्चा तेल मंगाने में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा का खर्च होता है. ईराना युद्ध के चलते छाए वैश्विक संकट को देखते हुए ही पीएम मोदी ने लोगों से अपील की है कि पेट्रोल-डीजल की खपत कम करें. सार्वजनिक वाहनों और ईवी (Electronic Vehcle) का प्रयोग ज्यादा करें.

हर साल खाद के लिए 10.23 बिलियन डॉलर खर्च करता है भारत: कृषि के लिए देश में हर साल लगभग 600 लाख मीट्रिक टन (60 मिलियन टन) से अधिक विभिन्न प्रकार के उर्वरकों (खाद) की आवश्यकता होती है. 2025 में, भारत ने अपनी लगभग 73% उर्वरक आवश्यकता का उत्पादन घरेलू स्तर पर किया, जो अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है.

देश में यूरिया उत्पादन में 87% और NPK में 90% आत्मनिर्भर है, लेकिन DAP और अन्य कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर है. 2024-25 में उर्वरक आयात पर 10.23 बिलियन डॉलर खर्च हुए थे, जो 2025-26 में 76% बढ़कर 18 बिलियन डॉलर यानी 1.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है. वैश्विक संकट के बीच पीएम मोदी ने इस खर्च को कम करने के लिए किसानों से उर्वरक की जगह प्राकृतिक खेती करने पर जोर देने के लिए कहा है.

विदेश यात्रा पर भारतीय कितना करते हैं खर्च: वित्त वर्ष 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार भारतीयों ने विदेश यात्राओं पर रिकॉर्ड 3.65 लाख करोड़ रुपए से अधिक (लगभग 31.7 बिलियन डॉलर) खर्च किए हैं. यह खर्च मुख्य रूप से छुट्टियों, लग्जरी ट्रैवल, शॉपिंग और मेडिकल टूरिज्म के लिए किया गया, जिसमें थाईलैंड, यूएई (दुबई), और अमेरिका लोकप्रिय गंतव्य शामिल हैं. दरअसल, युवा और महिलाओं के बीच विदेश में छुट्टियां बिताने और डेस्टीनेशन वेडिंग (Destination Weddings) का क्रेज बढ़ा है, जिससे औसत खर्च में वृद्धि हुई है.

पीएम मोदी ने विदेश यात्रा टालने की सलाह क्यों दी: विदेश यात्रा पर हो रहे भारी-भरकम विदेशी मुद्रा के खर्च और पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) संकट के कारण उत्पन्न वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिंता व्यक्त की है. उन्होंने विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को बचाने और घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लोगों से एक साल तक अनावश्यक विदेशी यात्राएं और डेस्टिनेशन वेडिंग टालने की अपील की है.

खाने वाले तेल की भारत में कितनी खपत: देश में खाद्य तेल यानी खाने योग्य तेल की वार्षिक जरूरत 230-250 लाख टन (23-25 मिलियन टन) के बीच रहती है. देश अपनी कुल मांग का लगभग 55-60% हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है, यानी घरेलू उत्पादन सिर्फ 40-45% जरूत को पूरा करता है. यही कारण है कि देश को सालाना खाने योग्य तेल के आयात पर 1.6 लाख करोड़ रुपए (लगभग 19.5 अरब डॉलर) खर्च करना पड़ता है. इसमें सबसे ज्यादा पाम ऑयल का आयात किया जाता है. भारत पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और सनफ्लावर ऑयल को इंडोनेशिया, मलेशिया, अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे देशों से आयात करता है.

मोदी ने क्यों कहा, खाद्य तेल का प्रयोग कम करें: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपने दैनिक भोजन में खाद्य तेल का उपयोग 10% तक कम करने की अपील की है. इसके पीछे की 2 मुख्य वजहे हैं. उनका मानना है कि अगर हर परिवार तेल का उपयोग कम करता है, तो यह देश सेवा और देश के खजाने की सेहत में बड़ा योगदान होगा. इसके अलावा अत्यधिक तेल का सेवन मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी गैर-संचारी बीमारियों का कारण बन रहा है. तेल कम करके भारतीय अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं.

पीएम मोदी की अपील की वजह

  • पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव की वजह से कच्चे तेल, गैस-खाद की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ रहा है. इससे भारत का आयात खर्च बढ़ रहा है. ऐसे में गैर-जरूरी खर्चे कम होंगे तो सरकारी खजाने पर दबाव कम पड़ेगा.
  • भारत विदेश से सोना खरीदता है तो इसके बदले बड़ी मात्रा में डॉलर खर्च करता है. यानी सोने का ज्यादा आयात देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाता है. सरकार पर आर्थिक बोझ और बढ़ जाता है.
  • देश अपनी जरूरत का करीब 55% खाने का तेल दूसरे देशों से आयात करता है. जिसके लिए बड़ी मात्रा में सरकार विदेशी मुद्रा खर्च करती है. इससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ता है.
  • क्रूड ऑयल, खाद्य तेल, उर्वरक और सोने के आयात में 10% कटौती होती है तो देश को 2 लाख करोड़ रुपए की बचत होगी.
  • क्रूड ऑयल, खाद्य तेल, उर्वरक और सोने के आयात में 20% कटौती होती है तो देश को 4 लाख करोड़ रुपए की बचत होगी.

खाने के तेल को लेकर मोदी ने क्या कहा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाने के तेल की खपत कम करने की भी सलाह दी है. उन्होंने कहा, “खाने के तेल के आयात के लिए भी बहुत बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है. हर खाने में तेल के उपयोग में कुछ कमी करें तो वो भी देशभक्ति का काम है. इससे देश सेवा भी होगी और देह सेवा भी होगी. इससे देश के खजाने का स्वास्थ्य भी सुधरेगा और परिवार के लोगों का भी स्वास्थ्य सुधरेगा.”

वर्क फ्रॉम होम को फिर से तरजीह देने के लिए मोदी ने क्यों कहा: पीएम मोदी ने पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील करने के साथ ही वर्क फ्रॉम होम को तरजीह देने के लिए भी कहा. उन्होंने कहा कि “समय की मांग है कि हम वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग जैसी सुविधाओं को फिर से शुरू करें”. माना जा रहा है कि पीएम मोदी ने इसे पेट्रोल-डीजल की खपत कैसे कर सकते हैं? उसके उपाय के रूप में कही है. क्योंकि, ऐसी उम्मीद है कि इस तरह से फ्यूल का इस्तेमाल कम होगा. लोगों की घर से दफ्तर आवाजाही कम होगी. बिजली और तेल का इस्तेमाल कम होगा और बचत होगी.

10% आयात घटने से देश की कितनी बचत: FY26 में भारत ने सिर्फ क्रूड ऑयल, खाद्य तेल, उर्वरक और सोने के आयात पर करीब 240.7 अरब डॉलर यानी लगभग 20 लाख करोड़ रुपए खर्च किए. इसमें सबसे ज्यादा कच्चे तेल का आयात रहा, जिस पर 11 लाख करोड़ से ज्यादा का खर्च हुआ. जबकि, 6 लाख करोड़ रुपए का सोना दूसरे देशों से मंगाया गया.

खाने के तेल पर करीब 1.6 लाख करोड़ खर्च हुए. वहीं, खाद पर लगभग 1.2 लाख करोड़ खर्च हुए. अगर पीएम मोदी की अपील लोग मान लें और इन 4 कैटेगरी में सिर्फ 10 प्रतिशत आयात भी कम हो जाए तो देश की करीब 2 लाख करोड़ रुपए की बचत हो सकती है. वहीं, अगर यह कटौती 20 प्रतिशत होती है तो बचत 4 लाख करोड़ से अधिक पहुंच सकती है.

पीएम मोदी की अपील का उद्देश्य क्या: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो लोगों से अपील की है उसका मकसद देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखना है. सरकार चाहती है कि लोग फिलहाल जरूरी खर्चों पर ध्यान दें और विदेशी सामान पर निर्भरता कम करें. साथ ही गैर जरूरी खर्चों पर रोक लगाएं, जिससे देश सेवा हो सके और सरकारी खजाने पर बोझ कम हो.