”जो सीखेगा वो जीतेगा’, जिंदगी की परीक्षा में सब कुछ आउट ऑफ सिलेबस”; IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह में युवाओं को PM मोदी का संदेश

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए युवाओं से निरंतर सीखने और वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने का आह्वान किया. उन्होंने जोर देकर कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में तकनीक सबसे बड़ी ताकत है और आने वाले 30-35 वर्षों में युवाओं द्वारा उठाए गए कदम ही ‘विकसित भारत’ की दिशा तय करेंगे.

इस दौरान प्रधानमंत्री ने दीक्षांत समारोह में डिग्री और मेडल हासिल करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि आईआईटी दिल्ली के युवा केवल डिग्री लेकर नहीं, बल्कि देश की कठिन समस्याओं को सुलझाने का सपना लेकर आगे बढ़ रहे हैं. प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों को जीवन में आने वाली चुनौतियों से न घबराने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि अगर कोई समस्या बहुत बड़ी दिखाई दे तो उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर हल करना चाहिए.

कोविड के बाद पहली बार छात्रों के बीच पहुंचे पीएम

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछली बार जब वह आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह से जुड़े थे, तब देश कोविड के दौर से गुजर रहा था और वह वर्चुअल माध्यम से विद्यार्थियों से जुड़े थे. उन्होंने कहा कि इस बार छात्रों के बीच उपस्थित होकर बेहद खुशी हो रही है. यह विद्यार्थियों के जीवन का यादगार पल है और उन्हें भी परिवारों की तरह विद्यार्थियों की उपलब्धियों पर गर्व है. उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि दीक्षांत समारोह के इस पल को पूरी तरह जीना चाहिए. आने वाले समय में जब उन पर बड़ी जिम्मेदारियां होंगी, तब आईआईटी दिल्ली की यादें उन्हें ऊर्जा देंगी.

हॉस्टल और कैंपस की यादों को साथ लेकर जाएं

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आईआईटी दिल्ली के हॉस्टल और कैंपस की जिंदगी का भी जिक्र किया. उन्होंने विद्यार्थियों को कुमाऊं, आरा, कारा, विंडी, नील, कैलाश और हिमाद्री जैसे हॉस्टलों की यादों के साथ इंटर-हॉस्टल प्रतियोगिताओं और दोस्तों के साथ बिताए पलों को याद करने को कहा. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि कई विद्यार्थियों को जिया सराय का पोहा और सतपुरा मेस के पराठे भी याद आ रहे होंगे. उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने विभाग, पसंदीदा जगहों और दोस्तों के साथ बिताए समय को भी याद रखना चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षक, मेंटर, प्रोफेसर और सपोर्ट स्टाफ विद्यार्थियों के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं. उन्होंने छात्रों से अपील की कि कैंपस छोड़ते समय इन रिश्तों को पीछे न छोड़ें, बल्कि इन्हें अपनी जिंदगी की पूंजी के रूप में साथ लेकर जाएं.

”जो सीखेगा, वही जीतेगा”-पीएम

पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले वर्षों में दुनिया, तकनीक, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र तेजी से बदलेंगे. अगले 20-30 वर्षों में दुनिया कैसी होगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना मुश्किल है. ऐसे में लगातार सीखते रहना सबसे जरूरी है. उन्होंने कहा, “जो सीखेगा, वो जीतेगा”. उनके मुताबिक नई चुनौतियों के समाधान खोजने का साहस रखने वालों के लिए चुनौती ही अवसर में बदल जाती है. प्रधानमंत्री ने कहा कि आईआईटी दिल्ली की डिग्री केवल परीक्षा पास करने, अच्छा सीजीपीए हासिल करने या प्लेसमेंट पाने का प्रमाण नहीं है. यह इस बात का प्रमाण है कि विद्यार्थी कठिन समस्याओं को समझकर उनका समाधान खोजने की क्षमता रखते हैं.

बड़ी समस्या को छोटे हिस्सों में बांटकर हल करें

प्रधानमंत्री मोदी ने विद्यार्थियों को कहा कि अगर कोई समस्या बहुत बड़ी दिखाई दे तो उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर हल करना चाहिए. आईआईटी दिल्ली में विद्यार्थियों ने लैब, प्रोजेक्ट और सिमुलेशन के दौरान कई समस्याओं का सामना किया और समाधान खोजे हैं. यही तरीका जीवन में भी काम आएगा. उन्होंने कहा कि मुश्किलें अक्सर अकेली नहीं आतीं, बल्कि अपने साथ नए अवसर भी लेकर आती हैं. जरूरत इस बात की है कि युवा सतर्क रहें और उन अवसरों को पहचानें.

जिंदगी की परीक्षा में सब कुछ ‘आउट ऑफ सिलेबस’

प्रधानमंत्री ने कहा कि कैंपस की पढ़ाई और कैंपस के बाहर की जिंदगी में बहुत अंतर है. आईआईटी की परीक्षा में सिलेबस होता है, लेकिन जिंदगी की परीक्षा में सब कुछ “आउट ऑफ सिलेबस” होता है. उन्होंने कहा कि कॉलेज में विद्यार्थियों को पता होता है कि कौन-सा असाइनमेंट करना है और कौन-सी परीक्षा देनी है, लेकिन जिंदगी में कई बार यह भी खुद तय करना पड़ता है कि असली सवाल क्या है. उन्होंने विद्यार्थियों से जिज्ञासा बनाए रखने और उन समस्याओं पर सवाल उठाने को कहा जिन्हें लोग सामान्य मानकर स्वीकार कर चुके हैं.

विकसित भारत में युवाओं की बड़ी भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हर पीढ़ी के सामने अपनी चुनौतियां होती हैं और उसी के अनुसार उसका राष्ट्रीय दायित्व भी तय होता है. आज देश के सामने विकसित भारत बनाने की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक आत्मनिर्भरता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और औद्योगिक आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इस मजबूत नींव पर विकसित भारत का निर्माण युवाओं को करना है. उन्होंने कहा कि देश का युवा जितना सशक्त होगा, भारत उतना ही मजबूत होगा. सरकार ने ऐसे कई क्षेत्रों को युवाओं के लिए खोला है, जहां पहले प्रवेश के अवसर सीमित थे.

‘चिप से लेकर शिप तक यहीं बनेगा’

प्रधानमंत्री ने स्पेस सेक्टर का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले इस क्षेत्र में सरकार की भूमिका प्रमुख थी, लेकिन आज निजी क्षेत्र और युवा इसमें तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. युवा अपने लॉन्च व्हीकल बना रहे हैं और रॉकेट लॉन्च कर रहे हैं. उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र का भी जिक्र किया और कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में काम आगे बढ़ चुका है. उन्होंने कहा कि “चिप से लेकर शिप तक सब कुछ यहीं पर, आप ही के हाथों से बनेगा.” उन्होंने ड्रोन सेक्टर को भी युवाओं के लिए बड़े अवसर वाला क्षेत्र बताया. खेती, दवाओं की डिलीवरी और देश की सुरक्षा में ड्रोन के इस्तेमाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि युवा इस क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर रहे हैं.

AI, क्वांटम और डीप सी एक्सप्लोरेशन में अवसर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज), डीप सी एक्सप्लोरेशन (गहरे समुद्र की खोज), बैटरी, पावर स्टोरेज, ऊर्जा सुरक्षा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए बड़ी संभावनाएं हैं. उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों को प्रतिभा, नवाचार और नेतृत्व की जरूरत है और देश को उम्मीद है कि आईआईटी जैसे संस्थानों से निकलने वाले युवा इन अवसरों को आगे बढ़ाएंगे.

रिसर्च पर जोर, युवाओं से बड़ी उम्मीद

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को नई रिसर्च की जरूरत है और सरकार शोध को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है. उन्होंने प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप, रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन स्कीम और नेशनल रिसर्च फाउंडेशन का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि रिसर्च के लिए एक लाख करोड़ रुपये तक की फंडिंग की व्यवस्था की जा रही है. साथ ही वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन के माध्यम से देश के छोटे शहरों तक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय रिसर्च जर्नल की पहुंच आसान हुई है.

पैकेज और नौकरी की तुलना से बचें

प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों को सोशल मीडिया और दूसरों से तुलना करने से बचने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि दीक्षांत के बाद कई विद्यार्थी इस बात को लेकर तुलना कर सकते हैं कि किसे कितना पैकेज मिला, कौन किस कंपनी में गया या किसने स्टार्टअप शुरू किया. उन्होंने कहा कि जिंदगी कोई लीडरबोर्ड नहीं है. असली मुकाबला दूसरों से नहीं, बल्कि खुद से है. युवाओं को हर दिन खुद को कल से बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए. प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों से अपनी शारीरिक और मानसिक सेहत का ध्यान रखने की भी अपील की.

हर फैसले में देश का हित सोचें- पीएम

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आने वाले 30-35 वर्षों में युवाओं के फैसले विकसित भारत की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. इसलिए युवाओं को अपने हर निर्णय में यह सोचना चाहिए कि उससे देश को क्या लाभ होगा. उन्होंने सभी विद्यार्थियों, उनके माता-पिता, परिवारों, शिक्षकों और आईआईटी दिल्ली की पूरी टीम को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.