लखनऊ KGMU में शुरू हुआ यूपी का पहला बोन बैंक, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

लखनऊ : किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में उत्तर प्रदेश का पहला बोन बैंक स्थापित किया गया है. एक करोड़ रुपये की लागत से बनी इस सुविधा से अब प्रदेश के मरीजों को जोड़ प्रत्यारोपण और अन्य जटिल हड्डी सर्जरी के लिए टाटा मेमोरियल अस्पताल, दिल्ली एम्स या रामैया-मद्रास जैसे संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.

अभी तक उत्तर प्रदेश के किसी भी अस्पताल में बोन बैंक की सुविधा नहीं थी. नतीजा यह होता था कि जब भी किसी मरीज को जोड़ प्रत्यारोपण या रिवीजन सर्जरी के दौरान अतिरिक्त हड्डी की जरूरत पड़ती है, तो उसे बाहर से मंगाना पड़ता था वह भी ऊंची कीमत चुकाकर. ऑर्थो विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मधुसूदन के अनुसार, बाहर से एक फीमोरल हेड मंगाने पर करीब 15 हजार रुपये खर्च होते थे.

एक बार में 120 हड्डियां रखने की क्षमता : विभागाध्यक्ष प्रो. आशीष कुमार ने बताया, बोन बैंक की मशीन में एक समय में 120 हड्डियां सुरक्षित रखी जा सकती हैं. इन्हें माइनस 80 डिग्री तापमान पर कम से कम छह महीने तक संरक्षित रखा जाता है और इस अवधि की पूरी जांच-प्रक्रिया के बाद ही किसी मरीज के ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जा सकता है.

उन्होंने बताया कि अकेले मेडिकल कॉलेज में ही रोजाना पांच से 10 जोड़ प्रत्यारोपण सर्जरी होती हैं और प्रदेश के बाकी अस्पतालों को मिलाकर यह आंकड़ा कहीं अधिक है. ट्यूमर सर्जरी और रिवीजन जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसे मामलों में जब मरीज की अपनी हड्डी क्षतिग्रस्त निकलती है, तब बोन बैंक से मिलने वाली हड्डी बेहद अहम भूमिका निभाती है.

हड्डियां कहां से आएंगी : बोन बैंक के लिए हड्डियां मुख्यतः उन मरीजों से ली जाएंगी जिनका ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी के दौरान अंग निकाला जाता है, या जिनके हाथ-पैर दुर्घटना में कटने के बाद निकालने पड़ते हैं. इन्हें साफ कर तय प्रक्रिया के तहत संरक्षित किया जाएगा. प्रो. आशीष कुमार ने स्पष्ट किया कि अभी अंगदान जैसी बड़ी प्रक्रिया शुरू करने का चरण नहीं आया है. उससे पहले ऑपरेशन थिएटर से मिलने वाली हड्डियों को ही संग्रहित किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि हर हड्डी को स्टोर करने से पहले संक्रामक रोगों, जैसे हेपेटाइटिस बी की जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी, ताकि किसी दूसरे मरीज में संक्रमण फैलने का खतरा न रहे.

दान से प्रत्यारोपण तक: आठ चरणों की सतर्क यात्रा : KGMU में यह पूरी प्रक्रिया गुणवत्ता, सुरक्षा, ट्रेसेबिलिटी और दान की गरिमा इन चार सिद्धांतों पर आधारित है. ऑपरेशन थिएटर के बाहर ही दानदाता की पहचान, चिकित्सा इतिहास और लिखित सहमति दर्ज की जाती है. इसके बाद NOTTO और THOTA के दिशा-निर्देशों के मुताबिक संक्रामक रोगों की जांच होती है.

ऑपरेशन थिएटर के भीतर आठ चरण पूरे होते हैं-

  • फीमर को सावधानी से निकालना : फीमर का सिरा बांझ परिस्थितियों में सावधानी से निकाला जाता है, बिना इलेक्ट्रोकॉटरी के.
  • स्वाब नमूने: दो अलग बिंदुओं से नमूने लेकर सैंपल ट्यूबों में सुरक्षित किए जाते हैं.
  • रासायनिक विसंक्रमण: हड्डी को वैन्कोमाइसिन घोल में 30 मिनट डुबोकर तीन बार सलाइन से धोया जाता है.
  • डिब्रीडमेंट: नरम ऊतक और मलबा हटाकर हड्डी की मूल संरचना सुरक्षित रखी जाती है.
  • पैकेजिंग: सील किए गए सैंपल पात्र और ज़िप-लॉक पाउच में रखकर दस्तावेज पूरे किए जाते हैं.
  • यूनीक बोन बैंक ID : हर हड्डी को विशिष्ट पहचान संख्या देकर रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है.
  • क्वारंटीन भंडारण : माइनस 80 डिग्री पर कम से कम तीन महीने तक बिना पिघलाए सुरक्षित रखा जाता है.
  • नैदानिक रिलीज़: सभी जांचें पूरी होने के बाद ही हड्डी उपयोग के लिए जारी होती है.

हर चरण में समय, तारीख, दानदाता का विवरण और शामिल कर्मियों के हस्ताक्षर तक दर्ज किए जाते हैं.

स्टोरेज में डीप फ्रीजर का इस्तेमाल : प्रो. आशीष कुमार ने बताया, फीमोरल हेड, स्वाब नमूने और दस्तावेज हमेशा 2-8 डिग्री सेल्सियस के कोल्ड चेन बॉक्स में ही ले जाए जाते हैं. भंडारण में डीप फ्रीजर और परिवहन में ड्राई आइस का इस्तेमाल होता है. एक बार पिघली हड्डी को दोबारा फ्रीज नहीं किया जाता और न ही उसे कमरे के तापमान में देर तक रखा जाता है.

निकासी के समय भी “सही हड्डी, सही मरीज़, सही समय” के सिद्धांत पर पहले दस्तावेजों का मिलान होता है, फिर कोल्ड चेन बनाए रखते हुए ही हड्डी ऑपरेशन थिएटर में भेजी जाती है. सुरक्षा के लिए हर हड्डी तीन परतों में पैक की जाती है, “पहले आया-पहले गया” (FEFO) व्यवस्था अपनाई जाती है और तापमान की निगरानी चौबीसों घंटे होती है.

डॉ. मधुसूदन के मुताबिक, शुल्क को लेकर अभी कोई गाइडलाइन तय नहीं हुई है. शुरुआत में यह सुविधा KGMU के मरीजों के लिए ही इस्तेमाल होगी. जरूरत से ज्यादा भंडार होने पर इसे अन्य सरकारी और निजी अस्पतालों को भी उपलब्ध कराया जा सकेगा.