Ganesh Chaturthi: गणेश चतुर्थी आते ही घर-घर में एक खास तैयारी शुरू हो जाती है। गणपति की प्रतिमा, मोदक, लाल फूल और पूजा की थाली के साथ एक चीज लगभग हमेशा दिखाई देती है दूर्वा। देखने में बेहद साधारण, खेतों और मैदानों में आसानी से उग आने वाली यह हरी घास गणेश पूजा में इतना महत्वपूर्ण स्थान कैसे पा गई? इसके पीछे सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक बेहद रोचक पौराणिक कथा है। कथा जुड़ी है अनलासुर नाम के एक भयंकर असुर से, जिसकी देह से निकलती आग ने देवताओं और ऋषियों तक को परेशान कर दिया था। कहा जाता है कि जब इस अग्नि का सामना गणेश जी से हुआ, तो उन्होंने अनलासुर को निगल लिया। लेकिन असुर की अग्नि गणेश जी के भीतर ही भड़कती रही। उनका शरीर भयंकर ताप से तपने लगा। कई उपाय किए गए, लेकिन राहत नहीं मिली। अंततः दूर्वा अर्पित किए जाने पर उनका ताप शांत हुआ। यहीं से दूर्वा और गणेश पूजा का वह संबंध सामने आता है, जो आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की पूजा का हिस्सा है।
गणेश चतुर्थी 2026 में कब है?
जब अनलासुर की आग से कांप उठे देवता
अनलासुर की आग और दूर्वा की ठंडक: एक प्रतीकात्मक अर्थ
21 दूर्वा का क्या है रहस्य?
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