नई दिल्ली: भारत में पहली हाई-स्पीड ट्रेन यानी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन अगस्त 2027 से शुरू होने की उम्मीद है. इस बुलेट ट्रेन परियोजना का निर्माण जापानी तकनीक की मदद से किया जा रहा है. हाल में नई दिल्ली में संपन्न हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या रूस की इवोल्गा FG हाई-स्पीड ट्रेन भारत में भी दौड़ेगी.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिक्स समिट के दौरान रूसी रोलिंग स्टॉक निर्माता कंपनी ट्रांसमाशहोल्डिंग (TMH) ने भारत में इवोल्गा एफजी ट्रेन (Ivolga FG) को संयुक्त रूप से विकसित और उत्पादित करने की पेशकश की है.
इवोल्गा एफजी ट्रेन की डिजाइन स्पीड 360 किमी प्रति घंटा (kmph) है और इसे भारत के लिए एक संभावित हाई-स्पीड रेल समाधान के रूप में पेश किया जा रहा है. TMH ने रूसी इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक विशेषज्ञता का उपयोग करके हाई-स्पीड रेल तकनीक में संयुक्त अनुसंधान और विकास का प्रस्ताव दिया है.
रूसी कंपनी ट्रांसमाशहोल्डिंग पहले से ही रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के साथ वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण कार्य में लगी है. TMH की भारत में ‘किनेट रेलवे सॉल्यूशंस’ (Kinet Railway Solutions) के माध्यम से एक साझेदारी है, जो TMH और RVNL का एक जॉइंट वेंचर है. यह कंपनी भारतीय रेलवे के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण और रखरखाव पर काम कर रही है.
इस प्रोजेक्ट में महाराष्ट्र के लातूर में मराठवाड़ा रेल कोच फैक्ट्री में 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाए जा रहे हैं, जिनमें से हर एक ट्रेनसेट में 16 कोच हैं.
ट्रांसमाशहोल्डिंग की तरफ से यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारत हाई-स्पीड और सेमी-हाई-स्पीड रेल इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी महत्वाकांक्षाओं को बढ़ा रहा है. देश के रेलवे मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम में तेज पैसेंजर सर्विस, बेहतर रोलिंग स्टॉक और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं के विकास पर अधिक ध्यान दिया गया है.
इसलिए, प्रस्तावित इवोल्गा FG प्रोग्राम पूरी तरह से नए औद्योगिक रिश्ते को दिखाने के बजाय मौजूदा भारत-रूस रेलवे पार्टनरशिप पर बनेगा. संयुक्त निर्माण और उत्पादन के लिए TMH का प्रस्ताव हाई स्पीड वाली रेलवे टेक्नोलॉजी में आगे बढ़कर सहयोग को और गहरा कर सकता है