महालक्ष्मी व्रत लगातार सोलह दिनों तक रखा जाता है. यह व्रत हिंदू महीने भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को शुरू होता है और आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को समाप्त होता है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, यह समय सितंबर और अक्टूबर के दौरान आता है. यह व्रत गणेश चतुर्थी के शुभ त्योहार के चार दिन बाद शुरू होता है और पितृ पक्ष के आठवें दिन तक चलता है. महालक्ष्मी व्रत में हिंदू भक्त देवी लक्ष्मी के लिए कठोर व्रत रखते हैं और उनका दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. भारत के उत्तरी क्षेत्रों, जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में यह व्रत बहुत उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है.
ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्रा के अनुसार, 16 दिनों के महालक्ष्मी व्रत (जो आज (18 सितंबर) से शुरू हो रहा है) के दौरान कुछ खास उपाय करने से आपके घर में सुख-समृद्धि आ सकती है और सभी आर्थिक परेशानियां दूर हो सकती हैं. ज्योतिषाचार्य का कहना है कि हिंदू धर्म में महालक्ष्मी व्रत का बहुत महत्व है. देवी लक्ष्मी को समर्पित यह व्रत 16 दिनों तक रखा जाता है. इस दौरान भक्त पूरी विधि-विधान से देवी की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं, पवित्र कथाएं सुनते हैं और दान-पुण्य के कार्य करते हैं.
इस दौरान लगातार 16 दिनों तक हर सुबह देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है. इस समय महालक्ष्मी के सभी आठ रूपों की पूजा होती है. कुछ इलाकों में, भक्त इस दौरान सूर्य देव की भी पूजा करते हैं. भक्त रोजाना सूर्योदय के समय सूर्य देव को ‘अर्घ्य’ देते हैं. पूजा-विधि के हिस्से के तौर पर, एक धागे में सोलह गांठें बांधी जाती हैं और महालक्ष्मी व्रत रखने वाला व्यक्ति इसे अपने बाएं हाथ में पहनता है. महालक्ष्मी व्रत रखने वाला व्यक्ति पूरे 16 दिनों तक पूरी निष्ठा और संयम के साथ इसका पालन करता है. इस दौरान मांसाहारी भोजन करना पूरी तरह वर्जित होता है. महालक्ष्मी व्रत के दौरान ‘लक्ष्मी सहस्रनाम’, ‘शतनामावली’ और ‘लक्ष्मी अष्टोत्तर’ जैसी धार्मिक किताबें पढ़ना बहुत फायदेमंद माना जाता है.
यह पूजा कैसे की जाती है?
ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्रा का कहना है कि यह व्रत आश्विन कृष्ण अष्टमी की शाम को देवी लक्ष्मी की पूजा के साथ पूरा होता है. आखिरी दिन पूर्ण कुंभ या कलश (पवित्र पात्र) की पूजा की जाती है. कलश में पानी, कुछ सिक्के और अक्षत भरे जाते हैं. इसके मुंह पर आम या पान के पत्ते रखे जाते हैं और ऊपर एक नारियल रखा जाता है. पूजा के दौरान, कलश और नारियल पर चंदन का लेप, हल्दी का लेप और कुमकुम लगाया जाता है. कलश के चारों ओर एक साफ, नया कपड़ा बांधा जाता है, जिसे देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. आखिरी दिन, देवी को चढ़ाने के लिए नौ तरह की मिठाइयां और नमकीन व्यंजन तैयार किए जाते हैं. इसके बाद, इन्हें दोस्तों और परिवार के सदस्यों के बीच प्रसाद के रूप में बांटा जाता है.
महालक्ष्मी व्रत का महत्व
महालक्ष्मी व्रत हिंदुओं द्वारा रखा जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत है. स्वयं भगवान कृष्ण ने पांडव भाइयों में सबसे बड़े राजा युधिष्ठिर को इस पवित्र व्रत की महिमा बताई थी. महालक्ष्मी व्रत की महानता का वर्णन भविष्य पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है. यह व्रत भगवान विष्णु की पत्नी देवी लक्ष्मी के सम्मान में रखा जाता है, जिन्हें ‘मां शक्ति’ (दिव्य ऊर्जा) का स्वरूप माना जाता है. यह पवित्र व्रत भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को शुरू होता है, जिस दिन राधा अष्टमी भी मनाई जाती है. यह दिन देवी राधा (भगवान कृष्ण की पत्नी) की जयंती का प्रतीक है. यह दिन इसलिए भी खास है क्योंकि इसी दिन ध्रुव अष्टमी भी होती है, जिसमें दूर्वा घास की पूजा की जाती है. साथ ही, इस दिन ‘ज्येष्ठा देवी पूजा’ भी की जाती है और इसकी रस्में तीन दिनों तक चलती हैं. जो लोग महालक्ष्मी व्रत रखते हैं, उन पर जीवन भर देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महालक्ष्मी व्रत रखने से धन, वैभव और समृद्धि में वृद्धि होती है. हालांकि, अगर आप व्रत नहीं रख पाते हैं, तब भी आप ये खास उपाय अपना सकते हैं. माना जाता है कि ऐसा करने से देवी लक्ष्मी आपके घर को सुख-समृद्धि से भर देंगी…
खुशी और समृद्धि के लिए किए जाने वाले उपाय
ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्रा के अनुसार, महालक्ष्मी व्रत की पूजा के दौरान देवी लक्ष्मी को खीर (मीठे चावल की खीर) का भोग लगाएं और इसे 16 छोटी कन्याओं में बांटें. माना जाता है कि इससे देवी प्रसन्न होती हैं और घर में खुशी, धन और समृद्धि आती है.
आर्थिक लाभ के लिए
महालक्ष्मी व्रत के दौरान पूरी विधि-विधान से देवी लक्ष्मी की पूजा करें और उन्हें चांदी के सिक्के और कौड़ियां अर्पित करें. अगले दिन, इन सिक्कों और कौड़ियों को लाल कपड़े में लपेटकर अपनी तिजोरी या पैसे रखने की जगह पर रख दें. माना जाता है कि इस उपाय से धन और संपत्ति में वृद्धि होती है.
देवी महालक्ष्मी की पूजा के दौरान उनके चरणों में कमल और पलाश के फूल अर्पित करें और साथ में श्री यंत्र रखें. फल, फूल, धूप, दीपक, लाल कपड़ा और सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें. पूजा के दौरान गाय के घी का दीपक जलाएं. माना जाता है कि इससे देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है.
(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट धार्मिक मान्यताओं और जानकारी के साथ-साथ एक ज्योतिषी के बयानों पर आधारित है.किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद आवश्यक है. खबर केवल जानकारी के लिए है.)
