नई दिल्ली: दिल्ली को जल्द ही अपना पहला सरकारी स्वामित्व वाला अत्याधुनिक ‘राज्य अतिथि गृह’ मिलने जा रहा है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की महत्वपूर्ण बैठक में इस परियोजना को आधिकारिक रूप से हरी झंडी दे दी गई है. दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के द्वारका सेक्टर-19 में बनने वाले इस भव्य ‘दिल्ली सदन’ परियोजना पर लगभग 151.97 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है. आधिकारिक दस्तावेजों और रिपोर्टों के अनुसार, यह परियोजना राजधानी के आतिथ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी.
अभी तक राष्ट्रीय राजधानी होने के बावजूद दिल्ली सरकार के पास अपना कोई समर्पित ‘राज्य अतिथि गृह’ नहीं था. ऐसे में आधिकारिक दौरों, उच्च-स्तरीय बैठकों, सम्मेलनों और आयोजनों में भाग लेने के लिए आने वाले देश-विदेश के गणमान्य अतिथियों, वीवीआईपी मेहमानों और वरिष्ठ अधिकारियों के ठहरने के लिए पुख्ता और किफायती व्यवस्था करने में प्रशासनिक स्तर पर अक्सर परेशानियां आती थीं. सरकार के इन विशिष्ट मेहमानों को विश्वसनीय, सुरक्षित और विश्वस्तरीय आवास सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से ही ‘दिल्ली सदन’ के निर्माण का यह बड़ा निर्णय लिया गया है.
वास्तुकला और आधुनिक सुविधाओं का अनूठा संगम
प्रस्तावित ‘दिल्ली सदन’ द्वारका सेक्टर-19 में लगभग 3,899.42 वर्ग मीटर के विशाल भूखंड पर विकसित किया जाएगा. इस परियोजना की रूपरेखा तैयार करते समय आधुनिकता और संस्कृति दोनों का विशेष ध्यान रखा गया है. इस भव्य अतिथि गृह की वास्तुकला में मध्यकालीन दिल्ली की पुरानी संस्कृति और प्राचीन विरासत के तत्वों की अनूठी छाप देखने को मिलेगी. यह परिसर देश और दुनिया की सर्वोत्तम आतिथ्य प्रथाओं के आधार पर तैयार किया जाएगा, जिसमें उच्चस्तरीय कमरे, कॉन्फ्रेंस हॉल, और डाइनिंग एरिया जैसी सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी. द्वारका का यह क्षेत्र इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और प्रमुख मार्गों के नजदीक स्थित है, जिससे मेहमानों की आवाजाही बेहद सुगम होगी.
21 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के लिए आवश्यक भूमि मार्च 2020 में ही दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा दिल्ली सरकार के पर्यटन विभाग को आवंटित कर दी गई थी. अब व्यय वित्त समिति (EFC) द्वारा वित्तीय मंजूरी मिलने और अन्य संबंधित एजेंसियों से जरूरी क्लीयरेंस प्राप्त होने के बाद, निर्माण कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा. सरकार का लक्ष्य सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अगले 21 महीनों के भीतर इस विशाल परियोजना के निर्माण कार्य को पूरी तरह से जमीन पर उतार कर पूरा करना है. इस प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने से न केवल दिल्ली सरकार की मेजबानी से जुड़ी वर्षों पुरानी कमी दूर होगी, बल्कि दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के इस क्षेत्र को एक नया और भव्य प्रशासनिक लैंडमार्क भी प्राप्त होगा.
बता दें कि चालू वित्त वर्ष का बजट पेश करते हुए विधानसभा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा था कि, दिल्ली में उत्तर प्रदेश भवन है, राजस्थान सदन है और महाराष्ट्र सदन भी है. लेकिन क्या यह विडंबना नहीं कि जिस दिल्ली की जमीन पर ये सब बने हैं, उसी दिल्ली का अपना कोई सदन नहीं है? अब दिल्लीवासियों और यहां आने वाले मेहमानों को अपनी पहचान मिलेगी. अभी तक दिल्ली सरकार के पास मेहमानों को ठहराने या विशेष आयोजनों के लिए अपना कोई भव्य गेस्ट हाउस नहीं था.